अपूर्व असरानी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के जाने माने लेखक हैं। वह अक्सर अपने बयानों की वजह से सुर्खियों में बने रहते हैं। हाल ही में उन्होंने ट्विटर को अलविदा कह दिया था। अब इस बारे में उन्होंने खुलकर बात की है। कई साल पहले वह फेसबुक भी छोड़ चुके हैं।
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अपूर्व असरानी
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उनके मुताबिक, उन्हें फिल्मों के बारे में अपनी राय देने और अपना पक्ष भी चुनने के लिए कहा गया था। एक न्यूज पोर्टल को दिए इंटरव्यू में अपूर्व ने कहा कि उन्हें लगता है कि ट्विटर तेजी से काले या सफेद में ध्रुवीकृत हो रहा है। उन्होंने खुलासा किया कि विभिन्न समूह विशिष्ट सदस्यता की मांग करते हैं और आपको कोई एक पक्ष चुनने के लिए कहते हैं।
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सिद्धांत और अपूर्व असरानी
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उनके अनुसार, जुड़ाव बनाए रखने के लिए अक्सर सच्चाई से समझौता किया जाता है। आपको कुछ ऐसे विचारों के बारे में चुप रहना पड़ता है जो आपके समूह के साथ मेल नहीं खाते हैं। आगे विस्तार से बताते हुए असरानी ने कहा कि वह चयनात्मक सत्य नहीं बोल सकते हैं। उनकी स्पष्ट राय कभी-कभी हानिकारक और परेशान करने वाली होती है। उन्होंने कहा कि वह लोगों को नाराज करने से नहीं डरते, क्योंकि वह जानते हैं कि वह हर समय हर किसी को खुश नहीं रखा जा सकता।
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अपूर्व असरानी
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असरानी ने आगे कहा कि ट्विटर पर रहना फिलहाल सही समय नहीं है...क्योंकि हमारा समाज एक मंथन से गुजर रहा है जो ट्विटर पर दिखाई देता है। उनके अनुसार, यह परिवर्तन और अस्थिरता का समय है, क्योंकि पुरानी प्रणालियों को नई प्रणालियों के लिए चुनौती दी जा रही है। हालांकि, उनका मानना है कि भविष्य में चीजें ठीक हो जाएंगी।
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अपूर्व असरानी
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बता दें कि 45 साल के अपूर्व अब तक कई फिल्मों से अपनी लेखनी का जादू लोगों पर चला चुके हैं। क्रिमिनल जस्टिस, शाहिद जैसी फिल्मों को वह लिख चुके हैं। लेखक के अलावा वह शानदार एडिटर भी हैं। फिल्म सत्या के लिए वह बेस्ट एडिटिंग का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी अपने नाम कर चुके हैं।
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