हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के तमाम छोटे बड़े सितारे भले पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण से निपटने में की जा रही मदद के ढिंढोरे पीटने में लगे हों लेकिन अभिनेता अर्जुन कपूर का इस बारे में अलग ही विचार है। ‘अमर उजाला’ से एक खास बातचीत में अर्जुन ने कहा कि दान देना कोई ऐसा काम नहीं है जिसका ढिंढोरा पीटा जाए। वह ये काम बिना बताए करने में ज्यादा सहज महसूस करते हैं। लेकिन, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर ऐसा करने से दूसरे लोग भी दान देने के लिए प्रेरित होते हों, तो कभी कभी ऐसा करने में बुराई नहीं है।
EXCLUSIVE: ‘अमर उजाला’ से बोले अर्जुन कपूर, ‘दान देना कोई ऐसा काम नहीं है जिसका ढिंढोरा पीटा जाए’
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अभिनेता अर्जुन कपूर मानते हैं कि घर परिवार में बुजुर्गों का होना ईश्वर का बहुत बड़ा आशीर्वाद है और जिन लोगों को अपने दादा, दादी या नाना, नानी के साथ समय बिताने का मौका मिल रहा, वे बहुत भाग्यशाली हैं। अर्जुन कहते हैं, ‘आत्माभिमानी होना और अपने पैरों पर खुद खड़े होने के पहले सबक उन्होंने अपनी नानी सत्ती शौरी से ही सीखे थे। उन्होंने जिस समय में एक फिल्म निर्माता या टीवी कार्यक्रम निर्माता बनने का फैसला लिया, उस समय गिनती की महिलाएं ही इस क्षेत्र में कदम रखने का हिम्मत जुटा पाती थीं। मुझे लगता है मां ने नानी से ये सब सीखा और बाद में ये हमें भी हौसला देता रहा है।’
अपनी दादी का जिक्र चलने पर भी अर्जुन कपूर बहुत भावुक हो जाते हैं। अपनी हालिया रिलीज फिल्म ‘सरदार का ग्रांडसन’ का हवाला देते हुए वह बताते हैं, ‘बंटवारे के समय तमाम परिवार सरहद पारकर इस तरफ आए थे। इनमें हमारे बुजुर्गों का भी परिवार रहा। जड़ों से उखड़ना बहुत पीड़ादायक होता है। हमारी दादी ने हमारे परिवार को इस दर्द से निजात पाने में एक मजबूत आधार का काम किया। मुझे बचपन में उनके साथ बिताए वक्त की सारी बातें याद हैं। बुजुर्गों के साथ समय बिताने का मौका मिलना ही ईश्वर का सच्चा आशीर्वाद है।’
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अर्जुन कपूर ने हाल ही में कोरोना संक्रमित लोगों की मदद के लिए एक करोड़ रुपये जुटाए थे, इसके बारे में चर्चा करने पर अर्जुन थोड़ा झिझक जाते हैं। फिर खुद को संभालकर कहते हैं, ‘मेरा मानना है कि दान देना एक बहुत ही व्यक्तिगत मामला होता है। इसके बारे में जितने कम लोगों को पता हो उतना ही ठीक है। मैं किसी की मदद करूं और उसका ढिंढोरा भी पीटूं, ये मुझे ठीक नहीं लगता। लेकिन, जिस राशि की आप बात कर रहे हैं, वह मैंने अपने बहन के इनीशिएटिव की मदद के लिए किया था। उसका कहना है कि अगर किसी के दान देने की खबर से दूसरे लोग भी ऐसा करने के लिए प्रेरित होते हैं तो इसमें बुराई नहीं है। मैं उसकी इस बात से भी सहमति रखता हूं।’
गौरतलब है कि अर्जुन कपूर और उनकी बहन अंशुला कपूर देश भर में लोगों के लिए मदद जुटाने का काम एक स्पेशल ऐप के जरिए करते रहे है। अर्जुन और अंशुला ने अपने चाहने वालों की मदद से एक करोड़ रुपये इस काम के लिए इकट्ठा किए और इस रकम से 30 हजार से भी ज्यादा जरूरतमंद लोगों और उनके परिवारों को मदद पहुंचाई। अर्जुन कहते हैं, ‘मैंने अपने जीवन की जमा पूंजी इस उद्योग में लगाई है। यह प्लेटफॉर्म बेहद जरूरतमंद लोगों की सहायता कर पाया और इस कठिन समय में उनके काम आ पाया, यही इसका मकसद था।’