ओपी नैयर की कार में बैठ मुंबई घूमती थीं आशा भोसले, 14 साल के रिश्ते के बाद रचाई किसी और से शादी
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आशा भोसले ने महज 16 साल की उम्र में अपने परिवार वालों के विरोध के बावजूद लता मंगेशकर के सचिव गणपत राव भोसले से शादी करने के लिए घर छोड़ दिया लेकिन गणपत राव भोसले के साथ उनकी शादी कामयाब नहीं हुई। दोनों एक दूसरे से 1960 के आस-पास अलग हो गए। आशा जी फिर से अपने परिवार में लौटीं और संगीत की दुनिया में जगह बनाने के लिए कोशिशों में जुट गईं। तब तक आशा भोसले तीन बच्चों की मां बन चुकी थी। इसके बाद आशा ताई की जिंदगी में आए ओ पी नैयर।
एक जमाने में ओ पी नैयर की कैडलक कार में घूमने वाली आशा भोसले ने 1972 में अपने जीवन के इस संगीतमय अध्याय को खत्म करने का फैसला किया। इसके बाद आशा भोसले और ओपी नैयर ने एक छत के नीचे कभी कदम नहीं रखा। लेकिन इससे पहले उन्होंने ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ फिल्म के लिए एक गाना रिकॉर्ड किया, जिसे 1973 का फ़िल्म पुरस्कार मिला। आशा उस समारोह में नहीं गईं। ओपी नैयर ने उनकी तरफ से ट्रॉफी ली। घर वापस लौटते समय उन्होंने वो ट्रॉफी चलती कार से सड़क पर फेंक दी।