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राजनीति को खूब भुनाया गया इन 9 बॉलीवुड फिल्मों में, एक में तो भूत ने भी लड़ा चुनाव
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Tue, 11 Dec 2018 04:42 PM IST
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nayak
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आज पूरे देश में पांच विधानसभा चुनाव चर्चा में छायीं हैं। चुनाव की बेला को भुनाने में बॉलीवुड पीछे नहीं है। जी हां, चुनाव और फिल्मों का गहरा संबंध रहा है। पुराने समय से ही देखें तो चुनावों के दौरान राजनीति के इर्द-गिर्द कई फिल्में बनती रही हैं। फिल्मकार खासतौर से अपनी फिल्म की कहानी राजनीतिक मुद्दों पर रचते आए हैं और चुनाव के मौसम में ऐसी फिल्मों का प्रमोशन करना उनके लिए सोने पे सुहागा है। आईए जानते हैं, उन 9 फिल्मों के बारे में तो, जिसमें राजनीति को खूब भुनाया गया।
Bhoothnath Returns
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भूतनाथ रिटर्न्स में चुनाव की बातें
अमिताभ बच्चन की भूतनाथ वर्ष 2008 में आई थी। इसमें एक भूत और बच्चे की दोस्ती ने जमकर धमाल मचाया था। 2014 में जब भूतनाथ ने वापसी की तो कहानी को मौजूदा समय से जोड़ने के लिए इसमें लोकसभा इलेक्शन का रंग पिरोया गया। अब आप इसी से फिल्म के तेवरों का अंदाजा लगा सकते हैं। फिल्म में बोमन ईरानी नेता के रोल में हैं और वे बड़ा ही मजेदार डायलॉग कहते हैं, “इलेक्शन सर्कस की तरह होता है यहां जोकर सिर्फ टाइमपास के लिए होता है, टिकटें खरीदी जाती हैं शेर को देखने के लिए।” भूतनाथ को इलेक्शन लड़ते भी दिखाया था।
अमिताभ बच्चन की भूतनाथ वर्ष 2008 में आई थी। इसमें एक भूत और बच्चे की दोस्ती ने जमकर धमाल मचाया था। 2014 में जब भूतनाथ ने वापसी की तो कहानी को मौजूदा समय से जोड़ने के लिए इसमें लोकसभा इलेक्शन का रंग पिरोया गया। अब आप इसी से फिल्म के तेवरों का अंदाजा लगा सकते हैं। फिल्म में बोमन ईरानी नेता के रोल में हैं और वे बड़ा ही मजेदार डायलॉग कहते हैं, “इलेक्शन सर्कस की तरह होता है यहां जोकर सिर्फ टाइमपास के लिए होता है, टिकटें खरीदी जाती हैं शेर को देखने के लिए।” भूतनाथ को इलेक्शन लड़ते भी दिखाया था।
Jackky Bhagnani
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यंगिस्तान तो विवाद लाएगी
हिंदुस्तान में बसता है एक यंगिस्तान। ये यंगिस्तान इस देश की तकदीर बदलने का माद्दा रखता है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही इस फिल्म की कहानी गढ़ी गई है। फिल्म का हीरो एक राजनेता है और का चुनाव लड़ने जा रहा है। वह किस तरह युवाओं की सोच को बदलना चाहता है और किस तरह वह लोगों को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करता है, इसी के इर्द-गिर्द कहानी घूमती है। वैसे यह फिल्म राजनीति के रंग में रंगी एक प्रेम कहानी है।
हिंदुस्तान में बसता है एक यंगिस्तान। ये यंगिस्तान इस देश की तकदीर बदलने का माद्दा रखता है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए ही इस फिल्म की कहानी गढ़ी गई है। फिल्म का हीरो एक राजनेता है और का चुनाव लड़ने जा रहा है। वह किस तरह युवाओं की सोच को बदलना चाहता है और किस तरह वह लोगों को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करता है, इसी के इर्द-गिर्द कहानी घूमती है। वैसे यह फिल्म राजनीति के रंग में रंगी एक प्रेम कहानी है।
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Gulaab Gang
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गुलाब गैंग में भी राजनीति
हाल ही में आई माधुरी दीक्षित और जूही चावला की इस फिल्म में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समाज में राजनीति और जनता के बीच चल रहे गंदे खेलों को भी बड़ी खूबी से पेश किया गया। जूही (सुमित्रा देवी) एक राजनेता हैं और राजनीति की बारीकियां अच्छी तरह जानती हैं। वो सत्ता हासिल करने के लिए रज्जो (माधुरी) को लुभाने और उसका फायदा चुनाव में उठाना चाहती हैं। रज्जो सुमित्रा की नीयत भांप उसके खिलाफ ही चुनाव लड़ती है। बस, यहीं से इनके किरदारों के अस्तित्व की लड़ाई शुरू होती है।
हाल ही में आई माधुरी दीक्षित और जूही चावला की इस फिल्म में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ समाज में राजनीति और जनता के बीच चल रहे गंदे खेलों को भी बड़ी खूबी से पेश किया गया। जूही (सुमित्रा देवी) एक राजनेता हैं और राजनीति की बारीकियां अच्छी तरह जानती हैं। वो सत्ता हासिल करने के लिए रज्जो (माधुरी) को लुभाने और उसका फायदा चुनाव में उठाना चाहती हैं। रज्जो सुमित्रा की नीयत भांप उसके खिलाफ ही चुनाव लड़ती है। बस, यहीं से इनके किरदारों के अस्तित्व की लड़ाई शुरू होती है।
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Nayak
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‘आंधी’ भी राजनीतिक फिल्म
निर्देशक गुलजार की फिल्म ‘आंधी’ की कहानी पर उंगली उठी थी कि यह फिल्म गांधी परिवार पर आधारित है। इसी कारण इस फिल्म पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध भी लगा दिया गया था। हालांकि यह फिल्म स्वतंत्रता सेनानी तारकेश्वरी सिन्हा के जीवन से भी प्रेरित थी। इसमें सुचित्रा सेन के किरदार को इंदिरा गांधी से प्रेरित दिखाया गया था।
नायक आज भी प्रासंगिक
अनिल कपूर की फिल्म ‘नायक: द रियल हीरो’ आप नहीं भूले होंगे। 2001 में रिलीज हुई यह फिल्म ‘एक आम आदमी के राजनीति में आने की कहानी है। फिल्म में एक साधारण इंसान (पत्रकार) को एक दिन के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का मौका दिया जाता है। फिर उसके बाद शुरू होती है प्रशासनिक प्रणाली को सुधारने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की रोमांचक कहानी। इधर, दिल्ली में जब विधानसभा चुनाव हुए तो लोगों को अरविंद केजरीवाल में अनिल कपूर के इसी नायक को महसूस किया। नायक’ की तरह ही अरविंद केजरीवाल का सफर भी बड़ा ही रोमांचक रहा है। अब केजरीवाल की इस सफलता को फिल्म का रूप देने की तैयारी भी चल रही है। अनिल कपूर फिल्म ‘नायक’ की सीक्वल ‘नायक-2’ बनाने जा रहे हैं।
निर्देशक गुलजार की फिल्म ‘आंधी’ की कहानी पर उंगली उठी थी कि यह फिल्म गांधी परिवार पर आधारित है। इसी कारण इस फिल्म पर आपातकाल के दौरान प्रतिबंध भी लगा दिया गया था। हालांकि यह फिल्म स्वतंत्रता सेनानी तारकेश्वरी सिन्हा के जीवन से भी प्रेरित थी। इसमें सुचित्रा सेन के किरदार को इंदिरा गांधी से प्रेरित दिखाया गया था।
नायक आज भी प्रासंगिक
अनिल कपूर की फिल्म ‘नायक: द रियल हीरो’ आप नहीं भूले होंगे। 2001 में रिलीज हुई यह फिल्म ‘एक आम आदमी के राजनीति में आने की कहानी है। फिल्म में एक साधारण इंसान (पत्रकार) को एक दिन के लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने का मौका दिया जाता है। फिर उसके बाद शुरू होती है प्रशासनिक प्रणाली को सुधारने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की रोमांचक कहानी। इधर, दिल्ली में जब विधानसभा चुनाव हुए तो लोगों को अरविंद केजरीवाल में अनिल कपूर के इसी नायक को महसूस किया। नायक’ की तरह ही अरविंद केजरीवाल का सफर भी बड़ा ही रोमांचक रहा है। अब केजरीवाल की इस सफलता को फिल्म का रूप देने की तैयारी भी चल रही है। अनिल कपूर फिल्म ‘नायक’ की सीक्वल ‘नायक-2’ बनाने जा रहे हैं।