साल 2008 में डैनी बॉयल निर्देशित फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' ने सात श्रेणियों में ऑस्कर अवॉर्ड हासिल किया था। मुंबई की झुग्गियों के इर्द-गिर्द घूमती फिल्म की कहानी में झुग्गियों में रहने वाले कई बच्चों को मौका दिया गया था। इनमें अजहरुद्दीन मोहम्मद इस्माइल भी एक था। फिल्म में उसने सलीम मलिक का किरदार निभाया था। फिल्म को मिली सफलता के बाद अजहरुद्दीन की जिंदगी एकदम से बदल गई थी। झुग्गियों में रहने वाले अजहरुद्दीन को फ्लैट मुहैया कराया गया था। यह फ्लैट जय हो ट्रस्ट (फिल्म में ए.आर.रहमान के गाने के आधार पर पड़ा नाम) की तरफ से प्रदान किया गया था।
झुग्गियों में लौटने को मजबूर हुआ 'स्लमडॉग मिलेनियर' का ये कलाकार, मां ने लगाई मदद की गुहार
फिल्म को रिलीज हुए अब करीब 12 साल हो गए हैं। अब अजहरुद्दीन 21 वर्ष का हो गया है। इतने सालों में अजहर को मिली शोहरत भी फीकी पड़ गई है। इसकी वजह से छह महीने पहले उसे अपना 250 स्क्वायर फीट का 49 लाख का फ्लैट जो कि उसे सैंटाक्रूज वेस्ट में अनुराग प्लाजा में दिया गया था, उसे बेच कर नौपाडा इलाके की एक झुग्गी में चला गया। यह जगह गरीब नगर से काफी नजदीक है जहां डैनी बॉयल ने उसे पहली दफा देखा था। हालांकि यहां आते ही अजहर लगातार बीमार चल रहा है। बेटे को बीमार देखकर उनकी मां उन्हें अपना गांव जालना ले गईं जहां वे पिछले कुछ महीनों से रह रहे हैं।
अपनी परिस्थितियों के बारे में अजहरुद्दीन ने कहा, 'शोहरत खत्म हो गई है। अब मुझे अपना परिवार चलाने के लिए कमाना ही पड़ेगा। मुंबई काफी भीड़-भाड़ वाली और दूषित जगह है। मैं झुग्गियों में पैदा हुआ था लेकिन वहां कभी वापस नहीं जाना चाहता था।' अजहरुद्दीन का कहना है कि उनका परिवार लगातार आर्थिक दिक्कतों का सामना कर रहा था इस वजह से उसे फ्लैट बेचना पड़ा। अजहर ने फिल्म रिलीज होने के करीब एक साल बाद ही अपने पिता को खो दिया था।
अजहर की मां का कहना है, 'पिछले तीन सालों से वह लगातार संघर्ष कर रहा है। हमने इसकी बीमारी पर काफी पैसा खर्च कर दिया है। हमारे सामने फ्लैट बेचने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था। मैं डैनी बॉयल से अपने बच्चे की मदद करने की गुहार लगाती हूं। उसे सहयोग और प्रेरणा की जरूरत है।' घर बेचने के बाद अजहर अपनी मां के साथ तीन मंजिले इमारत के एक छोटे से कमरे (10X10 फीट) में चले गए, जिसे वे पांच अन्य लोगों - अजहरुद्दीन की बहन, उनके पति और उनके तीन बच्चों के साथ साझा करते हैं।
जय हो ट्रस्ट के एक ट्रस्टी नीर्जा मैटओ का कहना है कि अजहरुद्दीन 18 वर्ष का हो गया था। जिसके बाद उन्हें वह घर उन्हें आधिकारिक तौर पर सौंप दिया गया था और ट्रस्ट को भी बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'अजहरुद्दीन अपना व्यापार शुरू करना चाहता था। जिसके लिए उसे वित्तीय सहायता की जरूरत थी और उन्होंने घर बेंच दिया। अब वह बालिग है और मैं उम्मीद करता हूं कि वह भविष्य में अच्छा करेगा।'
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