सत्यजित रे भारतीय सिनेमा के एकमात्र ऐसे पुरोधा हैं, जिनका दामन पद्मश्री से पद्म विभूषण तक और ऑस्कर अवार्ड से लेकर दादासाहेब फाल्के पुरस्कार समेत 32 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से भरा है। बुधवार को उनका 97वां जन्मदिन है। उनका जन्म 2 मई 1921 को कलकत्ता (कोलकाता) के बंगाली रॉय परिवार में हुआ था। अंग्रेज जिस तरह ठाकुर का उच्चारण ‘टैगोर’ करते थे, उसी तरह रॉय को ‘रे’ कहते थे। इसलिए वह सत्यजीत रे कहलाए। आज उनके जन्मदिन पर हम आपको बता रहे हैं एक ऐसी बात जो महानायक अमिताभ कि दिली इच्छा थी और दिल में ही रह गई।
भारतीय सिनेमा के महान निर्देशक सत्यजीत रे की नजरों में सदी के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन काफी महंगे स्टार थे। इसी वजह से उन्होंने बिग बी के साथ कभी फिल्म नहीं बनाई। हालांकि अमिताभ की दिली ख्वाहिश थी कि वह सत्यजीत रे के साथ काम करें। सत्यजीत रे की पत्नी बिजोया ने अपनी किताब ‘माणिक एंड आई’ में इन अनुभवों को साझा किया है। 1992 में सत्यजीत रे के निधन तक लिखी गई उनकी निजी डायरी पर आधारित इस किताब को पेंग्विन इंडिया ने प्रकाशित किया है।
बिजोया ने अपनी किताब में लिखा है, ‘जया बच्चन ने मुझे बताया कि अमिताभ माणिक (सत्यजीत) के साथ उनकी किसी भी बंगाली फिल्म में काम करने के इच्छुक हैं। इस पर सत्यजीत मुस्कराए और बोले कि पहले मुझे अच्छा काम करने दो, तभी मैं दूसरी फिल्म के बारे में सोच सकता हूं। मैंने अमिताभ के साथ फिल्म करने की कई बार सोची, लेकिन बहुत महंगे एक्टरों में से एक हैं। हमारी बंगाल फिल्म इंडस्ट्री के पास इतना पैसा नहीं है।’
इस पर जया बच्चन ने तुरंत कहा, ‘आप ऐसा मत कहिए। आपके साथ काम करना काफी सम्मान की बात है और मुझे यकीन है कि वह आपसे इतने पैसों की मांग नहीं करेंगे।’ यह दोनों पहली बार ‘शतरंज के खिलाड़ी’ फिल्म में करीब आए, जिसमें अमिताभ ने कहानी कथन में अपनी आवाज दी थी। रे की फिल्में अक्सर कम बजट की ही होती थी।
सत्यजीत रे की निजी जिंदगी भी बॉलीवुड फिल्म से कम नहीं रही। इस किताब में उनकी पत्नी ने इसका खुलासा किया है। बिजोया ने बताया कि कैसे हम दोनों 8 साल तक डेटिंग करते रहे और फिर चुपचाप शादी कर ली। इसके बाद एक योजना बनाकर दोनों परिवारों को राजी किया। उन्होंने बताया कि वह और माणिक बचपन से ही दोस्त थे, लेकिन 1940 के आसपास वह दोनों एक दूसरे के ज्यादा करीब आए। दोनों ही रात भर साथ-साथ म्यूजिक सुनते रहते थे।