एक वक्त ऐसा था जब डर का दूसरा नाम फूलन देवी हुआ करती थीं। कई बार गैंगरेप, अत्याचार फिर डाकू से सांसद बनीं फूलन देवी की जिंदगी का सफर रोंगटे खड़े करने वाला है। लेखिका माला सेन ने फूलन देवी की जिंदगी पर 'बैंडिट क्वीन: द ट्रू स्टोरी ऑफ फूलन देवी' किताब लिखी थी। इसी किताब पर 1994 में शेखर कपूर ने फिल्म 'बैंडिट क्वीन' बनाई। फिल्म में सीमा बिश्वास ने मुख्य किरदार निभाया था। उस साल इस फिल्म को बेस्ट फीचर फिल्म का नेशनल अवॉर्ड मिला था। साथ ही फिल्मफेयर का बेस्ट फिल्म क्रिटिक्स अवॉर्ड और बेस्ट डायरेक्शन का भी अवॉर्ड मिला था। आज फूलन देवी का जन्मदिन है।
3 हफ्ते तक फूलन देवी का हुआ था गैंगरेप, बदला लेने के लिए 22 लोगों को मार दी थी गोली
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उस वक्त फिल्म को लेकर कई विवाद हुए और इसे विरोध का भी सामना करना पड़ा। यही नहीं कहा जाता है फूलन देवी ने कई थियेटर मालिकों को फिल्म नहीं रिलीज करने की धमकी भी दी, हालांकि जब 'चैनल 4' के निर्माताओं की ओर से उन्हें 32 लाख रुपये दिए गए तो फूलन देवी ने फिल्म का विरोध बंद कर दिया। अंतत: फिल्म को कोर्ट के आदेश के बाद रिलीज किया गया।
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन के घूरा का पुरवा गांव में फूलन देवी का जन्म एक मल्लाह परिवार में हुआ था। फूलन देवी का बचपन बेहद गरीबी में बीता था लेकिन वो बचपन से ही दबंग थीं। 10 साल की उम्र में जब उन्हें पता चला कि चाचा ने उनकी जमीन हड़प ली है तो चचेरे भाई के सिर पर ईंट मार दी थी। फूलन के घरवाले उनकी इस हरकत से इतना नाराज हो गए थे कि महज 10 साल की उम्र में 35 साल बड़े आदमी से शादी कर दी थी। शादी के बाद उनके पति ने रेप किया, धीरे-धीरे फूलन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें मायके आना पड़ गया।
फूलन देवी जब वापस अपने ससुराल गईं तो पता चला कि उनके पति ने दूसरे शादी कर ली है। जिसके बाद पति और उसकी दूसरी पत्नी ने फूलन देवी को घर में घुसने नहीं दिया। इस दौरान फूलन देवी की मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई जो डाकुओंं के गैंग से थे। ये लोग उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बॉर्डर बुंदेलखंड में सक्रिय थे। बाद में फूलन देवी उन्हीं के गैंग में शामिल हो गईं और चंबल की मुख्य डाकुओं में से एक बनीं। इस गैंग में दो डाकुओं को फूलन देवी से प्यार हो गया, हालात ऐसे हो गए कि एक डाकू ने विक्रम मल्लाह नाम के दूसरे डाकू की हत्या कर दी।
इस घटना के कुछ समय बाद ही ठाकुरों के गैंग ने फूलन को किडनैप कर बहमई गांव ले गए और 3 हफ्ते तक गैंगरेप किया। यहां से किसी तरह बच निकलने के बाद फूलन डाकुओं के गैंग में शामिल हो गईं। 1981 में फूलन बहमई गांव गईं, जहां उनका रेप हुआ था। फूलन देवी ने रेप करने वाले दो लोगों को पहचान लिया। उसके बाद गांव के 22 ठाकुरों को गोली मार दी। फिल्म 'बैंडिट क्वीन' में भी यह दिखाया गया है। इस घटना के बाद ही फूलन देवी की चर्चा चारों ओर होने लगी और उनका नाम बैंडिट क्वीन पड़ गया।