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मोदी की सुनामी में भी जीत नहीं पाए 'निरहुआ', सुपरस्टार की हार के 5 बड़े कारण
Fri, 24 May 2019 06:44 PM IST
अपूर्वा राय
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Published by: अपूर्वा राय
Updated Fri, 24 May 2019 06:44 PM IST
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akhilesh yadav, nirahua
- फोटो : Amar Ujala
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मोदी लहर में भी अखिलेश यादव अपने पिता सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट आजमगढ़ को बचाने में कामयाब हो गए। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा उम्मीदवार को 2 लाख 59 हजार 874 वोटों से हराया। अखिलेश यादव को छह लाख 21 हजार 578 वोट मिले जबकि निरहुआ को तीन लाख 61 हजार 704 वोट मिलें। आइए बात करते हैं उन 5 कारणों की जिसकी वजह से निरहुआ ये चुनाव हार गए।
अखिलेश यादव
- फोटो : Twitter
सपा का गढ़
गुरुवार को हुई मतगणना में जिस तरह वोटों के रूप में अखिलेश यादव को अपना प्यार दिया उसकी बदौलत अखिलेश यादव अपने पिता सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट को बचाने में कामयाब हो गए। हालांकि इस सीट पर उन्हें निरहुआ से कड़ी टक्कर मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मतगणना के बाद सारे कयासों पर विराम लग गया। निरहुआ को हर चक्र में पराजित करते हुए अखिलेश यादव ने अपने पिता से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। चूंकि इस सीट को सपा का गढ़ माना जाता है।
गुरुवार को हुई मतगणना में जिस तरह वोटों के रूप में अखिलेश यादव को अपना प्यार दिया उसकी बदौलत अखिलेश यादव अपने पिता सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की संसदीय सीट को बचाने में कामयाब हो गए। हालांकि इस सीट पर उन्हें निरहुआ से कड़ी टक्कर मिलने का अनुमान लगाया जा रहा था लेकिन मतगणना के बाद सारे कयासों पर विराम लग गया। निरहुआ को हर चक्र में पराजित करते हुए अखिलेश यादव ने अपने पिता से भी ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। चूंकि इस सीट को सपा का गढ़ माना जाता है।
अखिलेश यादव-दिनेश लाल यादव 'निरहुआ'
नेता वर्सेज अभिनेता
आजमगढ़ लोकसभा में एक तरफ जहां सालों से राजनीति कर रहे अखिलेश यादव थे तो दूसरी तरफ अभिनेता से नेता बने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ। हालांकि चुनाव बेशक दो यादवों के बीच था लेकिन निरहुआ अपनी पॉपुलैरिटी को वोट में भुनाने में कामयाब नहीं हो पाए।
आजमगढ़ लोकसभा में एक तरफ जहां सालों से राजनीति कर रहे अखिलेश यादव थे तो दूसरी तरफ अभिनेता से नेता बने भोजपुरी स्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ। हालांकि चुनाव बेशक दो यादवों के बीच था लेकिन निरहुआ अपनी पॉपुलैरिटी को वोट में भुनाने में कामयाब नहीं हो पाए।
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आजमगढ़ से भाजपा के प्रत्याशी निरहुवा
- फोटो : अमर उजाला
जब निरहुआ ने कहा था- मुझे कोई हरा नहीं सकता
कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू के दौरान निरहुआ ने कहा था, मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ क्योंकि मैं स्वतंत्र आदमी हूं। मेरी विचारधारा स्वतंत्र है। मैं किसी का गुलाम नहीं हूं। कहीं न कहीं ईश्वर के लेख को मिटाने वाला बयान उनके लिए भारी साबित हो गया।
कुछ दिनों पहले एक इंटरव्यू के दौरान निरहुआ ने कहा था, मुझे हराने वाला कोई पैदा नहीं हुआ क्योंकि मैं स्वतंत्र आदमी हूं। मेरी विचारधारा स्वतंत्र है। मैं किसी का गुलाम नहीं हूं। कहीं न कहीं ईश्वर के लेख को मिटाने वाला बयान उनके लिए भारी साबित हो गया।
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बसपा सुप्रीमो मायावती व अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
सपा-बसपा का साथ
हालांकि पूरे प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया लेकिन आजम गढ़ में अखिलेश यादव को इसका पूरा फायदा मिला क्योंकि वो गठबंधन के एक बड़े नेता थे और राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। आजमगढ़ में बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली से अखिलेश यादव को काफी हद तक फायदा पहुंचा। बसपा के परंपरागत वोट अखिलेश के पाले में आ गिरे।
हालांकि पूरे प्रदेश में सपा बसपा गठबंधन को जनता ने पूरी तरह से नकार दिया लेकिन आजम गढ़ में अखिलेश यादव को इसका पूरा फायदा मिला क्योंकि वो गठबंधन के एक बड़े नेता थे और राज्य के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। आजमगढ़ में बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली से अखिलेश यादव को काफी हद तक फायदा पहुंचा। बसपा के परंपरागत वोट अखिलेश के पाले में आ गिरे।