16 साल पहले रिलीज हुई सुपरहिट भोजपुरी फिल्म ‘ससुरा बडा पइसावाला’ से एक नई महिला सुपरस्टार भोजपुरी के आसमान में चमकी। दुनिया उनको रानी चटर्जी के नाम से जानती है, लेकिन इस नाम की भी अनोखी कहानी है। अमर उजाला के लिए रानी चटर्जी से ये खास बातचीत की पंकज शुक्ल ने।
रानी चटर्जी ने ‘मस्तराम’ के अपने किरदार पर खुलकर की बात, टीवी की नई पारी की ये है पूरी तैयारी
रियलिटी शो ‘खतरों के खिलाड़ी’ का अनुभव कैसा रहा आपका, क्या ऐसे शोज में एक भोजपुरी कलाकार सिर्फ इसलिए रखा जाता है कि उनका गुलदस्ता पूरा हो सके?
मैं इसे इस नजरिए से देखती हूं कि आज भोजपुरी के दर्शकों की संख्या हर नेशनल टीवी की टीआरपी पर असर डालती है। ‘बिग बॉस’ से लेकर ‘खतरों के खिलाड़ी’ तक भोजपुरी कलाकारों की मौजूदगी की वजह जो भी हो लेकिन ये मनोरंजन जगत को एक बड़ा और तगड़ा संदेश है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के दर्शक भी स्टार बनाने की क्षमता रखते हैं।
ओटीटी पर आपने एमएक्स प्लेयर की सीरीज ‘मस्तराम’ में जो किया, उसे लेकर आपको काफी आलोचनाएं सुनने को मिलीं, ये सीरीज करते समय आपके मन में क्या था?
ओटीटी का दर्शक वर्ग सिनेमा औऱ टेलीविजन से बिल्कुल अलग है। सिनेमा आप अकेले भी देखते हैं और परिवार के साथ भी, उसी लिहाज से आप फिल्में चुनते हैं। टीवी जरूर ड्राइंगरूम में होने की वजह से सब साथ में देखते हैं। लेकिन, ओटीटी बहुत ही ‘पर्सनल व्यूइंग’ के लिए बना है। मुझे डर था कि ‘मस्तराम’ में मेरा काम देखकर मेरे प्रशंसकों के बीच मेरी नकारात्मक छवि बन सकती है, लेकिन सीरीज रिलीज हुई तो मेरे प्रशंसकों की तादाद और बढ़ गई। लोग अपनी फंतासियों में मुझे देखने लगे हैं।
फिर भोजपुरी सिनेमा पर ये आरोप क्यों कि यहां अश्लीलता बहुत है?
भोजपुरी सिनेमा में उतना ये सब नहीं है जितना भोजपुरी में बनने वाले म्यूजिक वीडियोज ने इस इंडस्ट्री का नाम खराब किया है। अभिनेता और सांसद रवि किशन ने इस बारे में वाकई बहुत ही अच्छी पहल की है। मैं उनको बधाई देती हूं इस बात के लिए। अब तो खैर डिजिटल मीडिया भी सूचना और प्रसारण मंत्रालय की निगरानी में आ ही गया है तो मैं उम्मीद करती हूं कि भोजपुरी गानों के यूट्यूब या दूसरे डिजिटल माध्यमों पर अपलोड होने से पहले परीक्षण के दौर से जरूर गुजरना पड़ेगा। तभी भोजपुरी के दामन पर लगा ये दाग छूटेगा।
और, ये सबीना शेख से रानी चटर्जी कैसे और क्यों बन गईं आप?
मेरी पहली फिल्म ‘ससुरा बड़ा पइसावाला’ का एक गाना गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में शूट होना था। जिस दिन ये गाना शूट हो रहा था, लोकेशन पर बहुत सारे मीडिया वाले आ गए। लोगों ने मुझसे मेरा नाम पूछना शुरू किया तो प्रोड्यूसर ने कहा कि तुम अपना फिल्म के किरदार वाला नाम ले लो, नहीं तो तुमको मंदिर में शूटिंग करते देख बवाल हो जाएगा। मैं मुंबई में ही जन्मी, यहीं पली बढ़ी हूं। लेकिन, पहली फिल्म की शूटिंग के लिए उस दिन मेरा नाम रानी रखा गया। बाद में फिल्म के निर्माता ने ही रानी मुखर्जी से साम्यता देखते हुए मेरा पूरा नाम रानी चटर्जी रख दिया। तब से यही नाम चला आ रहा है और ये नाम काफी भाग्यशाली भी रहा तो मैंने कभी इसे बदलने की जरूरत नहीं समझी।