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जमीदारी से बेदखल होने पर दर-दर भटके थे बिमल रॉय, 'दो बीघा जमीन' देखती रह गई थी दुनिया

Fri, 12 Jul 2019 07:51 AM IST
Mishra Mishra एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Mishra Mishra Updated Fri, 12 Jul 2019 07:51 AM IST
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Bimal Roy Birthday Special Unknown Fatcs and his life struggle
Bimal Roy - फोटो : Social Media

बिमल रॉय भारतीय सिनेमा के ऐसे फिल्मकार हैं जिनकी फिल्में आज भी सिने प्रेमियों के दिल पर अपनी अमिट छाप छोड़े हुए है। बिमल रॉय का जन्म 12 जुलाई 1909 को बांग्लादेश के ढाका में हुआ था। बिमल रॉय के पिता जमींदार थे। पिता की आकस्मिक मौत के बाद उनके घर पर पारिवारिक विवाद हुआ जिसकी वजह से उन्हें जमीदारी से बेदखल होना पड़ा। इसके बाद वह अपने पूरे परिवार के साथ कोलकाता चले आए। 

Bimal Roy Birthday Special Unknown Fatcs and his life struggle
Bimal Roy - फोटो : Social Media

मुंबई के माहौल में बिमल रॉय सिर्फ एक फिल्मकार ही नहीं एक संस्था थे जिन्होंने मानवीय सरोकारों से जुड़े मुद्दों को सिनेमा के जरिए दिखाया। बिमल रॉय के साथ लेखक नबेंदु घोष थे। संगीतकार सलिल चौधरी को बिमल रॉय ने 'दो बीघा जमीन' के लिए हिंदी सिनेमा में पहला ब्रेक दिया। सलिल चौधरी ने फिल्म की कहानी भी लिखी थी और बलराज साहनी को मुख्य भूमिका के लिए बिमल रॉय से मिलवाया था।

Bimal Roy Birthday Special Unknown Fatcs and his life struggle
दो बीघा जमीन

शायद जमींदारी से बेदखल होने का ही नतीजा रहा कि बिमल रॉय ने 'दो बीघा जमीन' जैसी बेहतरीन फिल्म बनाई। आज भी यह फिल्म सर्वश्रेष्ठ कलात्मक फिल्मों में शुमार की जाती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे काफी सराहा गया और कई पुरस्कार अपनी झोली में बटोरे। फिल्म देखने के बाद एक बार राजकपूर ने कहा था कि 'मैं इस फिल्म को क्यों नहीं बना सका।'

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Bimal Roy

बिमल रॉय को 1954 में कांस फिल्म फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार के अलावा 11 फिल्मफेयर और दो राष्ट्रीय पुरस्कार मिले। बिमल रॉय की शानदार फिल्मों में 'दो बीघा जमीन', 'परिणीता', 'बिराज बहू', 'मधुमति', 'सुजाता', 'देवदास' और 'बंदिनी' है। 1958 में उनकी फिल्म 'मधुमति' को 9 फिल्मफेयर पुरस्कार मिले थे। उनके नाम यह रिकॉर्ड 37 साल तक कायम रहा।

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बिमल रॉय - फोटो : SELF

निधन से कुछ समय पहले बिमल रॉय कुंभ के मेले पर एक फिल्म बनाना चाहते थे। तबीयत खराब होने के बावजूद इस पर काम चलता रहा। इलाहाबाद के माघ मेले की काफी सारी फुटेज इस फिल्म के लिए शूट की गई लेकिन तभी कैंसर से पीड़ित बिमल रॉय 55 साल की उम्र में चल बसे। अपनी जिंदगी के इतने कम समय में भी बिमल रॉय ने फिल्म प्रेमियों को इतना कुछ दिया कि सभी उनके कृतज्ञ रहेंगे।

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