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Bioscope S2: यश चोपड़ा की कंपनी की पहली फिल्म को 48 साल पूरे, साहिर ने लिखा, एक चेहरे पे कई चेहरे...

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 27 Apr 2021 10:30 AM IST
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bioscope by Pankaj Shukla Daag Rajesh Khanna Yash Chopra Rakhi Sharmila Tagore Kadar Khan Debut
फिल्म दाग पोस्टर - फोटो : अमर उजाला

याद रहता है किसे गुज़रे ज़माने का चलन


सर्द पड़ जाती है चाहत, हार जाती है लगन

अब मोहब्बत भी है क्या इक तिजारत के सिवा
हम ही नादां थे जो ओढ़ा बीती यादों का क़फ़न

वरना जीने के लिए सब कुछ भुला देते हैं लोग,
एक चेहरे पे कई चेहरे लगा लेते हैं लोग..

जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग...
 

साहिर लुधियानवी का ये गाना हर उस इंसान की हकीकत है जिसके दामन पर कोई न कोई दाग लगा है और जो जीते रहने के लिए हमेशा एक नई कहानी के इंतजार में रहता है। मशहूर उपन्यासकार गुलशन नंदा की कहानी पर बनी फिल्म ‘दाग’ प्रसिद्ध लेखक टॉमस हार्डी के उपन्यास ‘मेयर ऑफ कैस्टरब्रिज’ से प्रेरित मानी जाती है। फिल्म ‘दाग’ को हिंदी सिनेमा का मील का पत्थर माने जाने में इसके संवादों का बड़ा हाथ है जिन्हें लिखा था उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे शायर और लेखक अख्तर उल इमान ने। अख्तर उल इमान इस फिल्म के पहले तक बी आर फिल्म्स में मासिक वेतन पर लिखते रहे थे। दाग ने उनके करियर की रफ्तार बदल दी। आज के बाइस्कोप में कहानी इसी फिल्म ‘दाग’ की, लेकिन आगे बढ़ने से पहले सुन लेते हैं फिल्म का ये कालजयी गाना।

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राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

राजेश खन्ना का ‘यश’
बात सन 1970 की है कि बंबई के हर दूसरे प्रोडक्शन हाउस में एक ही बात की चर्चा चलती रहती थी और वो ये कि बलदेव राज चोपड़ा यानी बी आर चोपड़ा के छोटे भाई ने अपनी अलग फिल्म कंपनी खोल ली है। यशराज चोपड़ा को अपनी नई कंपनी खोलने का ख्याल भी आया तो राजेश खन्ना की वजह से ही। आखिरकार, राजेश खन्ना का करियर डूबने से यश चोपड़ा ने ही तो बचाया था। यश चोपड़ा तब बीआर फिल्म्स के लिए काम किया करते थे और राजेश खन्ना की शुरू की पांचों फिल्में फ्लॉप हो चुकी थीं। यश चोपड़ा उन दिनों फिल्म ‘आदमी और इंसान’ की शूटिंग कर रहे थे जब सायरा बानो के बीमार पड़ते ही शूटिंग रुक गई। सायरा बानो ठीक होकर लौटीं कोई महीने भर बाद और इस बीच सिर्फ 28 दिन के शूट में यश चोपड़ा ने बना डाली फिल्म ‘इत्तेफाक’, जो राजेश खन्ना के करियर की पहली हिट फिल्म बनी।

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फिल्म दाग का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

यश चोपड़ा का राज’
‘इत्तेफाक’ की कामयाबी का एहसान राजेश खन्ना ने फिल्म ‘दाग’ से उतारा। कहते हैं कि यश राज फिल्म्स की स्थापना यश चोपड़ा और राजेश खन्ना दोनों ने मिलकर की थी। कंपनी के नाम में राज शब्द दरअसल राजेश खन्ना का ही निकनेम है। ‘दाग’ के संवाद लिखने से पहले अख्तर उल इमान तमाम सुपरहिट फिल्मों के संवाद या पटकथा या दोनों लिख चुके थे। इनमें शामिल हैं, ‘कानून’, ‘धर्मपुत्र’, ‘गुमराह’, ‘वक्त’, ‘मेरा साया’, ‘गबन’, ‘पत्थर के सनम’, ‘हमराज’ के अलावा ‘आदमी और इंसान’ जैसी चर्चित फिल्में। यश चोपड़ा से उनकी पटती भी खूब थी। तो एक दिन राजेश खन्ना, यश चोपड़ा और अख्तर उल इमान मिल बैठे। ‘दाग’ की कहानी गुलशन नंदा ने सुनाई जिनके उपन्यास उन दिनों देश भर के बुक स्टाल्स पर धूम मचा रहे थे। फिल्म में हीरोइन के तौर पर आईं राजेश खन्ना की फेविरट हीरोइन शर्मिला टैगोर और इसी फिल्म से यश चोपड़ा ने हिंदी सिनेमा को दिया ‘चांदनी’ का किरदार। यश चोपड़ा की किसी भी फिल्म में चांदनी नाम का किरदार सबसे पहले करने का मौका मिला उन दिनों की उभरती अदाकारा राखी को।

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राजेश खन्ना-राखी - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

शर्मिला टैगोर और राखी के अंदाज
शर्मिला टैगोर की 1973 में तीन फिल्में रिलीज हुई जिसमें से दो फिल्में उन्होंने राजेश खन्ना के साथ 'राजा रानी' और 'दाग' कीं। इसके अलावा वह मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी फिल्म 'आ गले लग जा' में शशि कपूर और शत्रुघ्न सिन्हा के साथ नजर आईं। उनकी तीनों ही फिल्में हिट साबित हुईं। दो साल पहले हिंदी सिनेमा में अपने करियर की शुरुआत करने वाली राखी की 1973 में पांच फिल्में रिलीज हुईं। उन पांच में से तीन फिल्मों ‘हीरा पन्ना’, ‘बनारसी बाबू’ और ‘जोशीला’ में राखी उस समय के शानदार अभिनेता देव आनंद के साथ मुख्य भूमिका में नजर आईं।

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फिल्म दाग का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

बेहतर कहानी, बेहतरीन फिल्म
फिल्म ‘दाग’ कहानी है सुनील और सोनिया की। हनीमून के दौरान सोनिया पर हमला होता है और उसे बचाने के दौरान सुनील के हाथों कत्ल हो जाता है। सुनील को सजा ए मौत होती है लेकिन जेल लौटते समय सुनील को ले जा रही पुलिस की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है। माना जाता है कि वह मर गया। सोनिया मां बनती है। सुनील की यादों में जीते हुए वह स्कूल में नौकरी करती है। और, एक दिन उसे पता चलता है कि सुनील तो जिंदा है। वह चांदनी नाम की किसी रईस महिला का पति बनकर रह रहा होता है। चांदनी के गर्भवती होने का पता चलने पर उसका प्रेमी उसे छोड़ जाता है और इस बच्चे को पिता का नाम देने के लिए सुनील ये कदम उठाता है। कानून फिर एक बार सुनील के दरवाजे पहुंचता है, इस बार उसके सिर सिर्फ कत्ल का ही नहीं बल्कि दूसरी शादी करने का भी जुर्म है।

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