मोहम्मद आमिर हुसैन खान को देश की सरकार साल 2003 में पद्मश्री दे चुकी है और साल 2010 में पद्मभूषण भी। लेकिन ये उन दिनों की बात है जब आमिर खान अपनी फिल्मों के सेट पर निर्माताओं के लिए रोज अपना सोचा नया गुल खिलाया करते थे। कभी उनकी मांग होती कि फिल्म को सिंक साउंड में शूट करो तो कभी वह सेट पर बैठे बैठे निर्देशक को ज्ञान देने लगते थे। तमाम निर्देशक उनका कहा मान भी लेते थे लेकिन निर्देशक महेश भट्ट हों तो फिर मामला जमना मुश्किल है। महेश भट्ट ने आमिर खान को ‘दिल है के मानता नहीं’ और ‘हम हैं राही प्यार के’ के अलावा फिल्म ‘गुलाम’ में भी निर्देशित किया था। फिल्म ‘गुलाम’ के निर्माता महेश भट्ट के भाई मुकेश भट्ट थे और उनकी कंपनी विशेष फिल्म्स की फिल्में लगातार पिट रही थीं। 1991 के आखिर में रिलीज हुई फिल्म ‘सड़क’ के बाद से महेश भट्ट का बतौर निर्देशक आभामंडल क्षीण होने लगा था। उनकी बैक टू बैक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही थीं। फिल्म ‘नाजायज’ ने जरूर बीच में विशेष फिल्म्स की थोड़ी इज्जत बचाई लेकिन उसके बाद फिर वही ढाक के तीन पात। आमिर जैसे बड़े सितारे को विशेष फिल्म्स के मालिक मुकेश भट्ट किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहते थे और आमिर के रवैये से तंग आकर महेश भट्ट फिल्म पर आगे काम नहीं करना चाहते थे। इसी के बाद फिल्म में एंट्री हुई इसके दूसरे निर्देशक विक्रम भट्ट की। आज के बाइस्कोप की फिल्म ‘गुलाम’ के दामन पर कुछ खून के छींटे भी हैं।
Bioscope S2: आमिर के रवैये से तंग आकर महेश भट्ट ने छोड़ दी फिल्म, स्टंट की नकल करते युवाओं की गई जान
फैंस के लिए जानलेवा बना स्टंट
अगर आप हिंदी सिनेमा के शौकीन हैं तो आपने अंग्रेजी फिल्म ‘ऑन द वाटरफ्रंट’ से प्रेरित ‘गुलाम’ जरूर देखी होगी। हिंदी फिल्मों ‘दीवार’ ‘परिंदा’ और ‘कब्जा’ की भी यही कहानी है। मुकेश भट्ट इसे अपनी फिल्म ‘कब्जा’ की ही रीमेक बताते रहे हैं। लेकिन, कहानी की असल में इसके लेखक अंजुम रजबअली ने कहां से ‘प्रेरणा’ ली, ये सब जानते हैं। इस फिल्म के दामन पर कम से कम तीन युवाओं की मौत के दाग भी लगे हुए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा हल्ला हुआ था जूनियर आमिर खान के नाम से चर्चित गोवंडी के निलेश जगताप की मौत का। निलेश हर समय आमिर खान के ही हैंगओवर में रहता था। आमिर के जैसे ही कपड़े पहनना। आमिर की तरह ही बोलना बातें करना और आमिर की हर फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो देखना उसकी आदतों में शामिल हो चुका था। फिल्म ‘गुलाम’ में एक सीन है जिसमें आमिर पटरी पर सामने से आ रही ट्रेन की तरफ भागते हैं और उससे टकराने से ठीक पहले पटरी के बाहर कूद जाते हैं। विक्रम भट्ट की मानें तो आमिर की इस सीन को फिल्माते वक्त जान जाते जाते बची थी। निलेश जगताप ने भी अपने दोस्तों पर रौब जमाने के लिए ये सीन कई बार किए लेकिन 2010 के अक्तूबर महीने में किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। इस बार फिर वह ट्रेन की तरफ पिछली बार की तरह ही दौड़ा लेकिन इस बार उसका हिसाब गड़बड़ा गया और ट्रेन ने उसके पूरे शरीर को उठाकर हवा में फेंक दिया। निलेश ने वहीं दम तोड़ दिया। फिल्म ‘गुलाम’ के इस सीन की नकल करने इसके पिछले साल यानी साल 2009 में दो किशोर और अपनी जान दे चुके थे।
आमिर की जान जाते बची
आमिर खान ने फिल्म ‘गुलाम’ में जो ये सीन किया उसमें से एक टेक विक्रम भट्ट बताते हैं कि वाकई आमिर ने किया था। हालांकि फिल्म में जो सीन इस्तेमाल किया गया है वह स्पेशल इफेक्ट्स पर शूट किया गया है। विक्रम ने इस बारे में बात करने पर एक बार कहा था, ‘उस दिन हुआ ये कि ये दिन का पहला शॉट था और आमिर ने जिद की कि वो इसे कर लेंगे। मैंने इसका विरोध किया तो आमिर ने कहा, ‘अरे मैं कर लूंगा और कोई प्रॉब्लम नहीं होगी।’ इसके बाद मैंने भी ज्यादा कुछ कहा नहीं। लेकिन शॉट लगा और कैमरा रोल हुआ तो ट्रेन कुछ ज्यादा ही रफ्तार में आ गई। आमिर के ट्रेन से टकराने में सिर्फ एक सेकेंड का गैप रहा। आमिर के पास वह एक सेकेंड का फुटेज अब भी है। उसे आमिर ने यादगार के तौर पर अपने पास रखा है।’ हालांकि फिल्म के एडीटर वामन भोसले ने एक बार बताया था कि फिल्म में जो सीन इस्तेमाल हुआ है वह क्रोमा पर शूट किया गया था। आमिर के पटरी से कूदने और ट्रेन के आने का सीन अलग अलग शूट हुआ और उसे बाद में स्पेशल इफेक्ट्स के जरिये जोड़ा गया।’ लेकिन आमिर की मार्केटिंग का असर ऐसा रहा कि इस सीन को फिल्मफेयर ने आमिर को खुश करने के लिए ‘बेस्ट सीन ऑफ द ईयर’ बता दिया और आमिर के चाहने वालों ने इस पर यकीन भी कर लिया। नतीजा, निलेश जगताप जैसे कई किशोरों ने इस चक्कर में जान दे दी।
आमिर ने शुरू किया लुक बदलना
फिल्म ‘गुलाम’ में आमिर खान ने बंबई के एक टपोरी सिद्धू का किरदार किया है। इसके पहले आमिर ने रंगीला में भी ऐसा ही कुछ किरदार किया था। लेकिन इस बार आमिर के भीतर वो आमिर आ चुका था जिसे फिल्म के हर विभाग में हस्तक्षेप करने की आदत हो चुकी थी। आमिर ने ही फिल्म ‘गुलाम’ का अपना कॉस्ट्यूम भी फाइनल किया। नाम न छापने की शर्त पर हिंदी सिनेमा के एक दिग्गज फैशन डिजाइनर इस लुक को आमिर का ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तां’ के बाद का दूसरा सबसे खराब लुक बता चुके हैं। इस लुक में आमिर बंबई की बजाय अमेरिका के किसी गैंगस्टर क्लब के सदस्य ज्यादा दिखते हैं। लेकिन, ये उन दिनों की बात है जब आमिर की दो फिल्में बैक टू बैक हिट हो चुकी थीं। फिजाओं में ‘राजा हिंदुस्तानी’ और ‘इश्क’ के गाने अब तक गूंज रहे थे दीपा मेहता की फिल्म ‘अर्थ’ की खबरें सामने आने लगी थीं। और आशुतोष गोवारिकर भी ‘बाजी’ की नाकामी भूल एक ऐसी कहानी पर काम शुरू कर चुके थे, जो अंग्रेजों और एक गांव वालों के बीच क्रिकेट के मैदान पर होने वाली जंग की कहानी कहती थी। आमिर ने फिल्म ‘गुलाम’ से ही अपने हर किरदार को एक अलग गेटअप और एक अलग लुक देने की शुरुआत की। इस फिल्म के क्लाइमेक्स के लिए तो बताते हैं कि आमिर कई दिन नहाए ही नहीं।
रानी मुखर्जी का टर्निंग प्वाइंट
रानी मुखर्जी के लिए फिल्म ‘गुलाम’ उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट बनकर आई। हालांकि उनकी पहली फिल्म ‘राजा की आएगी बारात’ में लोगों का उनका दबंग अंदाज और आवाज दोनों पसंद आई थी। लेकिन, महेश भट्ट के कहने पर फिल्म ‘गुलाम’ में रानी मुखर्जी की आवाज डब करा दी गई। फिल्म में जो आवाज सुनाई देती है वह हिंदी फिल्म जगत की कामयाब डबिंग आर्टिस्ट मोना शेट्टी की है। मोना शेट्टी की अपनी खुद की डबिंग कंपनी भी काफी मशहूर रही है। इस फिल्म में आमिर खान ने अगर युवाओं के भीतर सुलगते गुस्से को ज्वालामुखी बनाने का काम किया तो रानी मुखर्जी ने युवतियों को दिए बिंदास होकर मस्ती करने के तमाम बहाने। आमिर और रानी का मोटरसाइकिल पर रोमांस का अंदाज हालांकि एक अंग्रेजी म्यूजिक वीडियो से हू ब हू मारा हुआ है लेकिन उन दिनों इसके भी अपने ही जलवे थे। रानी और आमिर की जोड़ी लकी रही। विशेष फिल्म्स ने इससे अपना आगे पीछे का खाता सुधार लिया। लेकिन, तब भट्ट भाइयों को सपने में भी नहीं पता रहा होगा कि रानी मुखर्जी एक दिन यशराज फिल्म्स की मालकिन भी बनेगी। महेश भट्ट और मुकेश भट्ट दोनों का यशराज फिल्म्स से 36 का आंकड़ा रहा है और अक्सर यशराज फिल्म्स से छिटके कलाकारों को विशेष फिल्म्स का दफ्तर पनाह देता रहा है। रानी और आमिर की जोड़ी फिल्म ‘गुलाम’ में इतनी फिट लगती है कि दोनों जब फिल्म ‘तलाश’ में पति पत्नी के रोल में नजर आए तो लोगों को दिली सुकून भी मिला।
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