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Bioscope S2: ‘मुगल ए आजम’ के प्रीमियर पर नहीं गए थे दिलीप साहब, यह थी आसिफ से नाराजगी की वजह

Wed, 07 Jul 2021 10:05 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 07 Jul 2021 10:05 AM IST
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Bioscope with Pankaj Shukla Mughal E Azam dilip kumar madhubala k asif naushad
मुगल ए आजम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

जिस जमाने में पौने पांच रुपये का एक डॉलर हुआ करता था, उस जमाने में भारत में सिनेमा की टिकट रूपये, डेढ़ रुपये की हुआ करती थी। लेकिन, ‘‘मुगल ए आजम’’ की टिकट सिर्फ टिकट नहीं यादों का पूरा गुलदस्ता होता था। इसमें फिल्म की एक टिकट होती, फिल्म के फोटोग्राफ्स होते, फिल्म के गानों की बुकलेट होती और होतीं दूसरी कई यादगार चीजें। और कीमत, पूरे सौ रुपये। जी हां, सुनकर आप चौंक सकते हैं कि भला सन 60 में सौ रुपये की सिनेमा टिकट किसने खरीदी होगी। तो जनाब जान लीजिए कि दिलीप कुमार की शाहजादा सलीम और मधुबाला की अनाकली की ड्रेस में खिंची तस्वीरों का ये जलवा था कि फिल्म की एडवांस बुकिंग जिस दिन खुली उस दिन आसपास के शहरों के लोग भी बंबई पहुंच गए थे मराठा मंदिर के सामने फिल्म की टिकट के लिए लाइन लगाने। लेकिन क्या आपको पता है कि हिंदी सिनेमा में चार दशक तक सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी रही ‘मुगल ए आजम’ के प्रीमियर पर खुद दिलीप कुमार ही नहीं गए थे। चलिए आपको बताते हैं कि इसकी वजह क्या थी, लेकिन उससे पहले फिल्म से जुड़े कुछ और दिलचस्प किस्से।

Bioscope with Pankaj Shukla Mughal E Azam dilip kumar madhubala k asif naushad
‘मुगल ए आजम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

हाथियों पर लाया गया फिल्म का प्रिंट
बवाल हो गया था मुंबई में मुगले ए आजम का सिनेमाघरों में रिलीज होना। किसी फिल्म का एक साथ देश के डेढ़ सौ सिनेमाघरों में रिलीज होना उस वक्त का रिकॉर्ड था। मराठा मंदिर इस फिल्म के लिए ही रंग रोगन करके फिर से चमकाया गया था। प्रीमियर पर प्रिंट हाथियों पर लदकर आया। सिनेमा के बाहर भव्य सेट सा बनाया गया। फिल्म को पोस्टर एक जैसे रंगे जाएं इसके लिए के आसिफ ने उन दिनों की एक मशहूर पेंट कंपनी का पूरास्टॉक खरीद लिया था।

Bioscope with Pankaj Shukla Mughal E Azam dilip kumar madhubala k asif naushad
‘मुगल ए आजम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

चार दिन तक लोग लाइन में लगे
इधर, मराठा मंदिर में एक शो में हजार लोगों से कुछ ही ऊपर लोगों के बैठने की जगह थी और बाहर टिकट खरीदने वाले इकट्ठा हो गए थे कोई एक लाख। थिएटर वालों को पुलिस बुलानी पड़ी। लेकिन लोग भागे नहीं। वहीं डटे रहे। दिन में चार शोज में चार हजार, हफ्ते के 28 हजार के हिसाब से चार हफ्तों के टिकट बिके और उसके बाद अगले एक महीने तक थिएटर पर बुकिंग ही बंद रही। हाल फिलहाल के बरसों में आपने एपल आईफोन खरीदने वालों की लाइनें देखी होंगी। ‘मुगल ए आजम’ की रिलीज के समय ये भारत में हो चुका है कि लोग तीन चार दिन तक लाइन में लगे रहे। घर से खाना बनकर आता। रिलीवर फ्रेश होने के लिए रिलीव करता और लोग फिर आकर लाइन में लग जाए।

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‘मुगल ए आजम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

एक साथ तीन भाषाओं में हुई शूटिंग
फिल्म ‘मुगल ए आजम’ हिंदी सिनेमा के लिए एक फिल्म नहीं बल्कि कहानी है। हिंदुस्तानी (हिंदी व उर्दू) के अलावा अंग्रेजी और तमिल में भी फिल्म की शूटिंग होना तय हुई थी। हर सीन तीन बार शूट होता। लेकिन जिसका डर था बेदर्दी वही बात हो गई। अकबर के नाम से रिलीज फिल्म का तमिल संस्करण फ्लॉप रहा और के आसिफ ने इसके बाद उन सारे अंग्रेज एक्टर्स को वापस भेज दिया, जिन्हें उन्होंने मुंबई बुलाया था इस फिल्म की डबिंग करने के लिए। के आसिफ ने फिल्म पर दिल खोलकर पैसा बहाया। लेकिन फिल्म मे काम करने वाले कुछ लोग ऐसे भी थे जिन्हें पैसा काटता था, जैसे कि संगीतकार नौशाद।  

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मुगल-ए-आजम - फोटो : अमर उजाला आर्काइव, मुंबई

ऐसे राजी हुए बड़े गुलाम अली खां
हुआ यूं कि फिल्म के लिए बड़े गुलाम अली खान को राजी करने के लिए पैसों की चमक ही काम आई थी। जिस जमाने में लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी जैसे काबिल सिंगर एक गाने का चार- पांच सौ रुपये लिया करते थे, बड़े गुलाम अली खान ने के आसिफ को भगाने के लिए एक गाने के 25 हजार रुपये मांग लिए थे। के आसिफ तक एक ब्रीफकेस लेकर चलते थे। नोटों से भरा हुआ। उन्होंने वहीं ब्रीफकेस खोला और 25 हजार रुपये बड़े गुलाम अली खां को थमा दिए। दो गाने तय हुए। फिफ्टी परसेंट एडवांस थमाकर के आसिफ वहां से आ गए। बड़े गुलाम अली खान फिल्मों में गाने को तौहीन समझते थे लेकिन पैसा देख वह अब कैसे मना करते, मांग उन्होंने ही रखी थी, पूरी के आसिफ ने कर दी।

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