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ओ पी नैयर की लव स्टोरी, 4 बच्चों का पिता होते हुए भी आशा भोसले पर आया दिल और...
Wed, 16 Jan 2019 09:47 AM IST
अपूर्वा राय
सुनीता कपूर
सुनीता कपूर
Published by: अपूर्वा राय
Updated Wed, 16 Jan 2019 09:47 AM IST
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op nayyar with asha bhosle
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ओमकार प्रसाद नैयर उर्फ ओ पी नैयर को हिंदी फिल्मों का मोहम्मद अली कहा जाता था। फिल्म संगीत के रसिया उनकी हर धुन में एक खास किस्म का पंच देने की अदा पर मर मिटते थे। ओपी नैयर को छोड़ कर किसी भी भारतीय संगीतकार ने लता मंगेश्कर की आवाज का इस्तेमाल किए बगैर इतना सुरीला संगीत नहीं दिया है।
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नैयर साहब को सिने संगीत के क्षेत्र में लाने का श्रेय गुरुदत्त की पत्नी गीता दत्त को जाता है। उनकी ही सिफारिश पर गुरुदत्त ने उन्हें आरपार, मिस्टर एंड मिसेज 55, सीआई डी और तुम सा नहीं देखा में मौका दिया और इन फिल्मों में नैयर साहब ने एक के बाद एक हिट संगीत रच कर अपनी उपयोगिता साबित कर दी। लेकिन किसी बात पर नैयर और गीता दत्त में अनबन हो गयी और उन्होंने गीता दत्त को छोड़ आशा भोंसले को आगे बढ़ाने का फैसला किया।
asha bhosle
आशा भोसले को आशा भोसले बनाने का श्रेय अगर किसी को दिया जा सकता है तो वो थे ओ पी नैयर। उन्होंने आशा की आवाज की रेंज का पूरा फायदा उठाया। कई फिल्मों में एक साथ काम करने के दौरान नैयर साहब और आशा भोंसले काफी करीब आ गए लेकिन यही प्रेम संबंध नैयर साहब की बर्बादी का कारण भी बन गया।
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1958 से लेकर 1972 तक नैयर और आशा भोंसले का प्रेम संबंध आगे बढ़ता रहा। एक शादीशुदा शख्स, जिसके चार बच्चे हैं और एक तलाकशुदा महिला यानी आशा भोंसले खुलेआम बंबई में घूमा करते थे। जाहिर है उस जमाने में हिंदी सिनेमा के लिए ये काफी सनसनीखेज बातें थीं।
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ओ पी नैयर का आशा भोंसले के साथ प्रेम संबंध 14 सालों तक चला। एक जमाने में ओ पी नैयर की कैडलक कार में घूमने वाली आशा भोंसले ने 1972 में अपने जीवन के इस संगीतमय अध्याय को खत्म करने का फैसला किया। इसके बाद आशा भोंसले और ओपी नैयर ने एक छत के नीचे कभी कदम नहीं रखा। लेकिन इससे पहले उन्होंने ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’ फिल्म के लिए एक गाना रिकॉर्ड किया, जिसे 1973 का फ़िल्म पुरस्कार मिला। आशा उस समारोह में नहीं गईं। ओपी नैयर ने उनकी तरफ़ से ट्रॉफी ली। घर वापस लौटते समय उन्होंने वो ट्रॉफी चलती कार से सड़क पर फेंक दी।