बॉलीवुड में अपने नाम और काम से एक अलग पहचान बनाने वाले अभिनेता पंकज त्रिपाठी आज किसी भी पहचान के मोहताज नहीं हैं। पंकज त्रिपाठी संघर्षों से तपा हुआ लोहा हैं, ये बात उन्होंने खुद साबित तो की ही, साथ ही साथ वो खुद भी इस बात को मानते हैं। साल 2004 में फिल्म 'रन' में एक छोटा सा किरदार निभाने वाले पंकज आज पीछे मुड़कर अपने संघर्षों के देखते हैं तो उन्हें किसी बात का मलाल नहीं होता। वो अपनी सफलता का श्रेय भी अपने संघर्षों और अपनी विफलताओं को ही देते हैं।
हर काम को ठहराव के साथ करना पसंद करते हैं पंकज त्रिपाठी, असफलताओं को मानते हैं सफलता का कारण
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हाल ही में न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में पंकज त्रिपाठी ने अपने संघर्ष के दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि उनकी सफलता का रास्ता कई विफलताओं से होकर गुजरा है। लेकिन जब भी वो पीछे मुड़कर देखते हैं उन्हें कभी किसी बात का पछतावा या मलाल नहीं रहता है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने संघर्ष को दिया है। उन्होंने कहा, 'वे मेरे शुरुआती दिन थे। मैं आज जो कुछ भी हूं, वह पुरानी गलतियों और उस समय जो मैंने अच्छी चीजें की थी, उसकी देन है।'
त्रिपाठी ने बताया, "मेरे जेहन में बाबा नागार्जुन की कविता-'जो न हो सके पूर्ण काम, उनका करता हूं मैं प्रणाम' चलती थी। हमारा जो अतीत होता है, वह हमेशा ठीक ही होता है। मेरा मानना है कि जो कुछ भी होता है, अच्छे के लिए होता है। इसलिए वह सारी विफलताएं ठीक ही थी। मैं ऐसा व्यक्ति हूं जो चीजों को ठहराव के साथ करना पसंद करता है और इसलिए मैं कालीन भैया के किरदार में 'ठहराव' लाया। वह नकारात्मक है। मैं अपने किरदार इस उम्मीद के साथ निभाता हूं कि कहीं वे अच्छे होंगे या बेहतरी के लिए खुद को बदल सकते हैं।"
पंकज ने बताया, "इसलिए मैं अपने सभी किरदारों में कुछ मानवीय पुट और उम्मीद भरता हूं। आप उसे ऊपर से खराब नहीं पाएंगे, आपको उसकी बुराई को देखने के लिए अंदर झांकना होगा। मैं जिन लोगों के साथ बड़ा हुआ और जब मैं उनसे बातें करता हूं, चाहे वे बड़े शहरों में ही क्यों न रह रहे हों तो पाता हूं कि वह व्यक्ति खुद के विकास की राह में कहीं रुक सा गया है और इनमें से 90 फीसदी लोगों को महसूस भी नहीं होता कि इसमें कुछ दिक्कत है। हमने शिक्षा को सिर्फ नौकरी पाने का माध्यम बना दिया।"
बता दें कि पंकज त्रिपाठी बिहार के गोपालगंज जिले के बेलसंड के रहने वाले हैं। पंकज त्रिपाठी ने कुछ ही समय में कड़े संघर्ष के बाद इंडस्ट्री में वो मुकाम हासिल कर लिया है जिसके कई लोग केवल सपने ही देख पाते हैं। इतने वर्षों के फिल्मी सफर में पंकज ने 'गैंग्स ऑफ वासेपुर', 'गुड़गांव', 'मिर्जापुर', 'सेक्रेड गेम्स', 'मसान', 'न्यूटन', 'बरेली की बर्फी', 'गुंजन सक्सेना: द करगिल गर्ल' जैसी फिल्मों और वेब सीरीज में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं जिन्हें दर्शकों ने खूब पसंद भी किया है।
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