हिंदी फिल्मों में शोहरत और ग्लैमर के बीच, एक लंबी फेहरिस्त है जहां कई कलाकार या तो गुमनामी में मर गए, या तन्हाई में, बहुत गरीबी में या रहस्यमय हालात में। सितारों की रहस्यमी मौत की लिस्ट तो काफी लंबी है, लेकिन आज की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम आपको ऐसे पांच कलाकारों के बारे में बताएंगे, जिनकी मौत आज भी एक सवाल है।
आज भी नहीं सुलझी इन सितारों की मौत की गुत्थी, इस निर्देशक ने तो अमिताभ को बनाया था सुपरस्टार
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भगवान दादा
अपने जमाने के मशहूर डांसिंग और एक्शन स्टर रहे भगवान दादा भी अपने आखिरी दौर में इंडस्ट्री से दूर और अकेले पड़ गए थे। अमिताभ बच्चन से लेकर गोविंदा तक में उनके डांस की छाप देखने को मिलती है। 40 और 50 के दशक में भगवान दादा के पास बंगला, कई गाड़ियाँ और खूब पैसा था, वे सबसे अमीर एक्टरों में से थे। 1951 में राज कपूर की आवारा और भगवान दादा की अलबेला एक ही दिन रिलीज हुई औरो दोनों सुपरहिट थी। मुंबई में गरीबी में एक चॉल में पैदा हुए भगवान दादा के पास फिल्मों में आने के बाद पैसे की कमी नहीं थी। लेकिन फिल्मी करियर ने ऐसी करवट बदली कि जिस गरीब बस्ती से उठकर वो आए थे, अपना बंगला बेच उन्हें वहीं वापस लौटना पड़ा।
भगवान दादा के बारे में किस्सा मशहूर है कि गणेश चतुर्थी के दौरान भीड़ उनके चॉल के आगे जाकर रुक जाती थी और जब वे अपने मशहूर गाने शोला जो भड़का पर डांस करते तभी वहां से लोग जाते। लेकिन 2002 में मौत के वक्त फिल्मी दुनिया उन्हें भुला चुकी थी। अगर नई पीढ़ी के लोगों को उन्हें पहचनाने में दिक्कत हो तो सलमान खान और भाग्यश्री का गाना 'हाँ मैंने प्यार किया प्यार किया' रिवाइंड करके देखें तो सलमान के पीछे लाल पगड़ी में डांस करने वाले भगवान दादा ही हैं जिनकी कभी इंडस्ट्री में तूती बोलती थी।
परवीन बाबी
परवीन बाबी ने अपनी बिंदास इमेज, ग्लैमर और जिदगी अपनी शर्तों पर जीने की अदा के चलते खास जगह बनाई। खूब पैसा और नाम कमाया, उनके कई रिश्ते बने और टूटे। फिर स्किजोफ्रीनिया ने उनकी जिंदगी को ऐसे अंधेरे में धकेला जहां से एक दिन उनकी मरने की ही खबर आई। जब कई दिनों तक घर के बाहर से अखबार और दूध के पैकेट किसी ने नहीं हटाए तो पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अभिनेत्री का शव निकाला था।
गुरु दत्त
अपने अभिनय और निर्देशन दोनों के लिए गुरु दत्त का बहुत नाम और इज्जत थी, लेकिन निजी जिंदगी में पत्नी गीता दत्त से उनका रिश्ता बिल्कुल बिखर चुका था और अक्सर झगड़ा होता था। वे बच्चों और पत्नी से अलग अकेले रहते थे। 9 अक्तूबर 1964 को ऐसे ही एक झगड़े के बाद उनके दोस्त अबरार अलवी मिलने पहुंचे तो गुरु दत्त शराब पी रहे थे। देर रात दोनों ने खाना खाया और अबरार अपने घर चले गए। अगले दिन अबरार अल्वी आए तो उन्होंने देखा कि गुरु दत्त की मेज पर एक गिलास रखा हुआ था जिसमें एक गुलाबी रंग का तरल पदार्थ बचा हुआ था और गुरु दत्त की मौत हो चुकी थी। ये खुदकुशी थी या ओवरडोज ये बहस आज भी जारी है लेकिन उस दिन एक चमकता सितारा हमेशा के लिए बुझ गया।
मनमोहन देसाई
अमिताभ बच्चन को अमर अकबर एंथनी, कुली, मर्द, नसीब जैसी फिल्में देकर सुपरस्टार बनाने वाली निर्देशक मनमोहन देसाई की मौत का राज भी कभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ। 1994 में जब उनकी मौत हुई तो वो पीठ के दर्द से परेशान थे। बॉलीवुड के बादशह रहे मनमोहन देसाई की फिल्में चलना बंद हो चुकी थी। ऐसे में बालकनी से गिरकर हुई उनकी मौत हमेशा सवालों के घेरे में रही।

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