चकाचौंध से भरी फिल्मी दुनिया में कई किस्से और कहानियां लोगों के बीच मशहूर हैं। मनोरंजन जगत और इसके कलाकारों के बारे में जानने के लिए उत्सुक सिने प्रेमी की जुबां पर इन किस्सों का जिक्र रहता है। फिल्मी दुनिया में लोगों की इसी दिलचस्पी और उत्सुकता को देखते हुए अमर उजाला ने एक नई सीरीज बॉलीवुड गॉसिप्स की शुरुआत की है, जिसे पढ़कर आप ना सिर्फ चौंकेंगे बल्कि हैरान भी रह जाएंगे। सीरीज की 12वीं कड़ी में पेश है अपने जमाने की मशहूर फिल्म आनंद से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा-
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चकाचौंध से भरी फिल्मी दुनिया में कई किस्से और कहानियां लोगों के बीच मशहूर हैं। मनोरंजन जगत और इसके कलाकारों के बारे में जानने के लिए उत्सुक सिने प्रेमी की जुबां पर इन किस्सों का जिक्र रहता है।
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साल 1971 में आई फिल्म आनंद अपने जमाने की ब्लॉकबस्टर फिल्मों में से एक थी। यह फिल्म आज भी दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय है, जिसे फैंस जितनी बार भी देखें उनका मन नहीं भरता। दोस्ती और जिंदगी की अहमियत समझाती इस फिल्म को देख शायद ही कोई ऐसा हो जिसके आंसू ना निकले हो, लेकिन यह फिल्म अपने आप में जितनी शानदार और भावुक है, उतनी ही भावुक इसके बनने के पीछे की कहानी है।
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राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन कि यह फिल्म दोस्ती की अहमियत बताती है, लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे यह फिल्म असल में दो दिग्गज कलाकारों की दोस्ती पर ही आधारित है। फिल्म असल में बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर और निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की दोस्ती पर बनी थी। इतना ही नहीं इस फिल्म में नजर आए कलाकार भी पहले इसके लिए पहली पसंद नहीं थे। दरअसल, ऋषिकेश मुखर्जी पहले फिल्म में आनंद के किरदार के लिए किशोर कुमार और डॉ भास्कर की भूमिका के लिए महमूद को कास्ट करना चाहते थे।
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लेकिन फिर बाद में फिल्म में उस दौर के मशहूर अभिनेता राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन को कास्ट किया गया। फिल्म में गुलजार ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने फिल्म की कहानी के साथ ही इसके डायलॉग और कविता भी लिखी थी, जिसे फिल्म में डॉक्टर भास्कर अमिताभ बच्चन गाते सुनाई दिए थे। वहीं, बात करें फिल्म की कहानी की तो इसे लिखने के पीछे एक बेहद भावुक किस्सा है।
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दरअसल, निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी और अभिनेता राज कपूर एक-दूसरे के काफी करीबी दोस्त थे। उनकी दोस्ती में एक दौर ऐसा भी था, जब राज कपूर की तबीयत काफी खराब हो गई थी। राज की यह हालत देख उनके मित्र ऋषिकेश मुखर्जी काफी घबरा गए थे। उन्हें लगा कि अब राज कपूर उन्हें छोड़कर चले जाएंगे। यही वह समय था जब ऋषिकेश मुखर्जी के मन में एक फिल्म बनाने का विचार आया और फिर उन्होंने एक फिल्म के जरिए अपनी और राज कपूर की कहानी को दिखाने का फैसला किया।
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