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वो बॉलीवुड फिल्में, जो बनती जा रही हैं राजनीति का अखाड़ा

बीबीसी हिंदी Published by: विजय जैन Updated Wed, 03 Apr 2019 12:18 PM IST
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bollywood political based film before lok sabha election 2019
Vivek Oberoi - फोटो : file photo
बीते 5 सालों में आपने भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव होता देखा होगा। अभिनेता और नेता के बीच जो रिश्ता है वो आज से नहीं कई सालों पुराना है। बस फर्क है तो इतना कि पहले अभिनेता अभिनय कर नाम कमाने के बाद राजनीति से जुड़ते थे और अब अभिनेता नेताओं की बायोपिक फ़िल्मों के ज़रिये बड़े पर्दे पर राजनीति करते दिख रहे हैं।


2018 में कई ऐसी फिल्में आईं जो किसी बड़े राजनेता कि बायोपिक का हिस्सा रहीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि चमकाने वाली एक के बाद एक कई फ़िल्में रिलीज़ हुईं। फिर वो 2018 में आई 'उरी :द सर्जिकल स्ट्राइक' हो या फिर हाल ही में रिलीज़ हुई राकेश ओम प्रकाश मेहरा कि फ़िल्म 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर'।

अब आलम ऐसा है कि पूरी फिल्म ही रिलीज़ हो रही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर। फ़िल्म का नाम है 'पीएम नरेंद्र मोदी'। इस फ़िल्म में नेरन्द्र मोदी का क़िरदार अभिनेता विवेक ओबेरॉय निभा रहे हैं। फिल्म की रिलीज डेट पहले 12 अप्रैल रखी गई थी, लेकिन अब फिल्म को 5 अप्रैल को रिलीज़ किया जाएगा।
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bollywood political based film before lok sabha election 2019
Vivek Oberoi - फोटो : twitter
इस तरह चुनावी माहौल में फ़िल्म को पहले रिलीज़ करने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि फ़िल्म के निर्माताओं ने कहा है कि यह उन्होंने पब्लिक डिमांड पर किया है। निर्माता संदीप सिंह फ़िल्म के निर्माता और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं और उन्होंने इसकी कहानी भी लिखी है। उन्होंने हाल ही में फ़िल्म के ट्रेलर लांच के दिन कहा था कि, "हम इस फ़िल्म की सार्वजनिक मांग को देखते हुए एक सप्ताह पहले रिलीज़ कर रहे हैं।

लोगों के बीच इसे लेकर बहुत प्यार और आशा है और हम नहीं चाहते कि वे लंबे समय तक इंतजार करें।" 'पीएम नरेंद्र मोदी' में शुरुआत से लेकर भारत के प्रधानमंत्री बनने तक के नरेंद्र मोदी के सफ़र को दिखाया गया है। क्या ये फ़िल्म प्रोपोगैंडा फ़िल्म है? इस सवाल पर फ़िल्म के निर्माता संदीप सिंह कहते हैं, "हम फ़िल्म के मेकर हैं और आप ट्रेलर देख चुके हैं और जब फ़िल्म देखेंगे तब आप सब ही तय करिएगा कि ये प्रोपोगैंडा फ़िल्म है या नहीं।"

उन्होंने कहा, "हम अपना काम कर रहे हैं। हमको नहीं जानना कौन क्या बोल रहा है। किसको क्या शिकायत है। ये एक सच्ची कहानी है जो हम दर्शकों तक पंहुचा रहे हैं। हम अपना काम कर रहे हैं और इसका विरोध कर दूसरी पार्टी के लीडर अपना काम कर रहे हैं।"
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Thackeray - फोटो : social media
लेकिन जाने माने वरिष्ठ पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज कहते हैं, "इन प्रोपोगैंडा फ़िल्मों को जानने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा। अभी जो लोग सत्ता में हैं वो सत्तारूढ़ पार्टी है फ़िल्मों को अपने हित में सही से इस्तेमाल करती है या ये कह लें करना जानती है और इन फ़िल्मों की प्लानिंग आज से नहीं सत्ता के आने के बाद से ही थी।"

"उन्होंने अपनी लॉबी पहले से ही तैयार कर ली थी अंदरूनी तरीके से। पार्टी से जुड़े कुछ फिल्म मेकर हैं जो बार बार इस बात पर ज़ोर डालते रहे हैं कि अगर आप राष्ट्रवाद की बात करेंगे या भाजपा की विचारधारा से प्रेरित होकर विषयों पर फिल्म बनाएंगे या उनकी बात करेंगे तो ये आपके लिए बेहतर होगा और ऐसा ही हुआ कुछ लोगों ने इन बातों पर अमल भी किया।"
bollywood political based film before lok sabha election 2019
Uri The Surgical Strike - फोटो : twitter
"ऐसा करना मैं ग़लत नहीं मानता हूँ। इसको अपराध की तरह देखना ग़लत होगा क्योंकि सत्ता के क़रीब कोई भी रहना चाहेगा और ये फ़िल्म कलाकार ज़्यादा ऐसा चाहते हैं। फिल्म मेकर भी इनके समर्थन में ही फ़िल्म बना रहे हैं और अगर कल कांग्रेस पार्टी या कोई और पार्टी सत्ता में आ गई तो वो फिर उन्हें समर्थन करने लगेंगे।"

ब्रह्मात्मज कहते हैं , "आज बायोपिक फिल्मों का ज़माना है, बायोपिक फिल्में आज कल फ़ैशन में हैं। आज के जो दर्शक है वो ही कल के मतदाता बनते हैं और बायोपिक फ़िल्में हमेशा प्रभावित करती रही हैं। ये फिल्में तीन लोगों पर ही बनती हैं सैनिक, खिलाड़ी या राजनेता।" वो पूछते हैं, "लेकिन क्या कभी किसी समाज सेवक पर फिल्म बनी है?

किसी ने बाबा अम्बेडकर पर बायोपिक बनाने की घोषणा की है? जवाब है ना क्योंकि उनके विचारों पर कोई फ़िल्म नहीं बनाना चाहता और बायोपिक फिल्मों के लिए ढेर सारे ड्रामे की ज़रूरत होती है।"
 
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The Accidental Prime Minister - फोटो : twitter
वो कहते हैं, "ड्रामा क्रिएट किया जाता है, हार के बाद जीत दिखाया जाता है फिर वो चाहे 'ठाकरे' हो या 'द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' या 'उरी' या फिर 'पीएम मोदी'। फ़िल्म 'उरी' का डायलॉग हमारे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बोलते नज़र आते हैं 'हाउ इज़ द जोश'।" वो कहते हैं, "आज तक कभी किसी प्रधानमंत्री ने किसी फ़िल्म का संवाद बोला है?" अजय ब्रह्मात्मज कहते हैं कि नेशनलिज़्म पर फ़िल्में आज से नहीं आजादी के समय से बनती आ रही हैं।

'गांधी' से लेकर कई फिल्में 'पूरब और पश्चिम', 'नया दौर' जैसी कई फिल्में बनीं जो भारत के विकास और उसकी विचारधारा पर बात करती थीं, लेकिन आज वैचारिकता जो है वो सिर्फ एक पार्टी के लिए हो गई है। जाने माने निर्देशक और निर्माता ने एक टाइम में 'माय नेम इज़ ख़ान' जैसी फ़िल्म बनाई थीं और आज वो केसरी भी बना रहे हैं। ये उनके विचार नहीं व्यापार है।
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