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उच्च न्यायालय ने खारिज की कंगना रणौत मामले में वकील को बीएमसी द्वारा भुगतान वाली याचिका

Mon, 08 Feb 2021 04:13 PM IST
शुभांगी गुप्ता एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: शुभांगी गुप्ता Updated Mon, 08 Feb 2021 04:13 PM IST
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Bombay HC dismisses plea on lawyer's fees paid by BMC in Kangana Ranaut bungalow demolition case
कंगना रणौत - फोटो : अमर उजाला

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अभिनेत्री कंगना रणौत का बंगला ढहाने के मामले में बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) द्वारा दी गई वकील की फीस को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। साथ ही कहा कि ऐसे फैसलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

Bombay HC dismisses plea on lawyer's fees paid by BMC in Kangana Ranaut bungalow demolition case
कंगना रनौत (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

न्यायमूर्ति एस. एस. शिंदे और न्यायमूर्ति मनीष पिटाले की बेंच ने शरद यादव की तरफ से दायर याचिका खारिज कर दी है। जिन्होंने दावा किया था कि रणौत द्वारा दायर याचिका में नगर निकाय का प्रतिनिधित्व करने के लिए बीएमसी ने वरिष्ठ वकील आस्पी चिनॉय को 82.50 लाख रुपये का भुगतान किया है।

Bombay HC dismisses plea on lawyer's fees paid by BMC in Kangana Ranaut bungalow demolition case
कंगना रणौत - फोटो : सोशल मीडिया

पीठ ने कहा ‘इस मामले में हम हस्तक्षेप नहीं कर सकते और न ही इसका नियमन कर सकते हैं। एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड या किसी वरिष्ठ वकील द्वारा कितना शुल्क लिया जाना चाहिए, यह देखना अदालत का काम नहीं है।’

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Bombay HC dismisses plea on lawyer's fees paid by BMC in Kangana Ranaut bungalow demolition case
कंगना रणौत - फोटो : सोशल मीडिया

शरद यादव जो एक आरटीआई कार्यकर्ता होने का दावा करते हैं उन्होंने इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की है और कहा कि बीएमसी ने राज्य के खजाने को हानि पहुंचाई है। याचिका में कहा गया कि बीएमसी को इस तरह के ‘साधारण और छोटे’ मामलों में इतने वरिष्ठ वकील को नियुक्त नहीं करना चाहिए था।

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Bombay HC dismisses plea on lawyer's fees paid by BMC in Kangana Ranaut bungalow demolition case
कंगना रणौत - फोटो : सोशल मीडिया

बहरहाल, अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों में अदालत दखल नहीं दे सकती है। साथ ही यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता को धोखाधड़ी का अपराध लगता है या सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो वह एक निजी शिकायत के साथ पुलिस या मजिस्ट्रेट अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

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