फिल्मों के बनने से पहले उसके कलाकारों का चयन करना भी एक अहम कार्य होता है। सही कलाकार चुनना बेहद जरूरी होता है क्योंकि वही है जो आगे जाकर फिल्म का चेहरा बनता है। बीते कुछ साल में इसी चयनकर्ता का सबसे चमकता चेहरा बनकर उभरे हैं मुकेश छाबड़ा। चिल्लर पार्टी, गैंग्स ऑफ वासेपुर, काए पो चे, रॉकस्टार और सुपर 30 की कास्टिंग करने वाले मुकेश छाबड़ा अब खुद फिल्म निर्देशक बन गए हैं।
कास्टिंग डायरेक्टर का इंटरव्यू में खुलासा, हजारों के बीच ऐसे होता है स्टारकास्ट का सेलेक्शन
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आपने अभिनय की पढ़ाई भी की है तो अभिनेता बनते बनते कास्टिंग डायरेक्टर कैसे बन गए?
मैंने अभिनय की पढ़ाई इसलिए नहीं की कि मैं एक अभिनेता बनना चाहता था। ये कोर्स मैंने नौकरी पाने के लिए किया। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा की थियेटर इन एजुकेशन में नौकरी पाने के लिए कम से कम क्वालिफिकेशन एक डिप्लोमा होना चाहिए या ग्रेजुएशन पूरी होनी चाहिए इसीलिए एक्टिंग का कोर्स किया था। अभिनेता नहीं बनना चाहता था। पर हां, जहां काम किया वहां एक्टिंग और कास्टिंग सभी कुछ करना पड़ता था।
हिंदी सिनेमा में कास्टिंग डायरेक्टर का नाम आपके नाम से ही प्रचलन में आया, तो कैसे चयन करते हैं आप कलाकारों का?
मैं सबसे पहले तो कलाकार की सच्चाई देखता हूं कि वह किस तरह के संस्कारों के साथ आया है, कहां से आया है और किस जगह का है? अगर फिल्म गुजरात की है तो गुजराती कलाकारों को ज्यादा महत्व दूंगा, या राजस्थान की है तो राजस्थानियों को। फिर आखिरी पड़ाव उसकी निष्ठा होती है। कितनी निष्ठा, धैर्य और मन लगाकर वह ऑडीशन देते हैं और आगे काम करते हैं। चयन करने से पहले इन्हीं सब चीजों पर गौर करता हूं।
फिल्म सुपर 30 की कास्टिंग की काफी तारीफ हो रही है, इसके बारे में बताइए हमारे पाठकों को?
बहुत ही ज्यादा कठिन और चुनौतीपूर्ण कार्य था यह। उन 30 बच्चों का चयन करने में मुझे सात महीनों से ज्यादा का वक्त लगा। बच्चे एक खास वर्ग के चाहिए थे और कहानी बिहार की थी तो पहले सोचा कि वहीं जाते हैं। वहां के लोगों से मिले। हमने सात लोगों की टीम बनाई फिर करीब 14 हजार बच्चों का ऑडीशन लिया। उस समय यही देखना था कि कौन कौन उम्र और भाषा के अनुसार किरदार के लिए सही बैठता है। उन सभी में से हमने दो सौ बच्चे चुने फिर गिनती सौ तक पहुंची। इन सौ बच्चों के साथ हमने महीनों वर्कशॉप्स कीं और फिर उन्हीं में से अंतिम 30 बच्चे चुने गए।
अपनी बड़ाई नहीं करूंगा पर इतना कहूंगा कि बहुत भाग्यशाली रहा हूं। सभी से बहुत प्यार भी मिला। फिल्म इंडस्ट्री में नए कलाकारों को लाने और उन उम्दा कलाकारों के कारण ही आज मुझे इतनी इज्जत मिल रही है। जिन-जिन का चयन मैंने किया है आज वे बड़े बड़े स्टार बन गए हैं। मुझे बहुत खुशी होती है क्योंकि मैं उनकी सफलता में एक छोटा सा हिस्सा हूं लेकिन असली कार्य उन्हीं का है।