बप्पी लाहिड़ी ने अपने संगीत करियर में कोई तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में संगीत दिया। बांग्ला फिल्म से शुरू करके हिंदी के अलावा दक्षिण भारतीय भाषाओं की फिल्मों तक में उनकी धूम रही। लंबी बीमारी के बाद मंगलवार आधी रात के करीब मुंबई में उनका निधन हुआ। बुधवार की सुबह जब इसकी खबर फैली तो लोगों ने उन्हें तरह तरह ये याद किया। लोकप्रिय गीतकार अमित खन्ना का लिखा पहला गाना पूरे दिन सबको बार बार याद आता रहा ‘हम लौट आएंगे, तुम यूं ही बुलाते रहना, कभी अलविदा ना कहना, चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना..’। इस गाने के संगीतकार थे बप्पी लाहिड़ी। गीतकार अमित खन्ना से ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल ने ये एक्सक्लूसिव बातचीत की।
EXCLUSIVE: एस डी बर्मन के बेहतर वारिस साबित हुए बप्पी लाहिड़ी, गीतकार अमित खन्ना से खास मुलाकात
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अमितजी, आपने जो गाना लिखा ‘कभी अलविदा ना कहना’ एक ऐसा कालजयी गीत है, जो आज हम सबको बहुत याद आ रहा है। बप्पी लाहिड़ी के साथ इसकी रिकॉर्डिंग की क्या यादें हैं आपकी?
ये गाना मेरा भाग्य रहा है। उन दिनों नवकेतन में काम करता था मैं। बप्पी और उनके माता पिता और दूसरी फिल्म के लिए वहां मिलने आए थे। उसी समय मैंने ये गाना लिखा था। और, ये बहुत जल्दी लिखा गया। कोई 5-7 मिनट में पूरा हो गया ये गाना। और फिर उसकी रिकॉर्डिंग हुई। किशोर दा मुझे जानते तो थे क्योंकि मैं देव आनंद के प्रोडक्शन हाउस नवकेतन का काम संभालता था। उन्होंने जब ये गाना पढ़ा तो हैरान हो गए। बोले, तुम लिखते भी हो। रिकॉर्डिंग में उन्होंने बहुत दिलचस्पी से ये गाना गाया और जाते हुए मुझसे कहा कि ये गाना बहुत चलेगा।
बप्पी दा से मेरी मुलाकात में इस गाने का जिक्र अक्सर आता था। वह बताते थे कि जब भी मैं गाना ये गाना अपने स्टेज शोज में गाता हूं, देश में या विदेश में तो मेरी आंखों में आंसू भर आते हैं और ‘किशोर मामा’ ने जब ये गाना गाया था तो वह भी बहुत भावुक हो गए थे..
हां बिल्कुल सही
आपकी बप्पी दा से जुड़ी हुई और भी यादें होंगी, कुछ हमारे पाठकों के साथ साझा करना चाहेंगे आप?
बप्पी के साथ मैंने बहुत गाने लिखे और कई बहुत लोकप्रिय हुए हैं। रामसे ब्रदर्स की कम से कम 10 पिक्चरों में बप्पी का म्यूजिक था और मैंने गीत लिखे हैं। देव साहब के साथ भी ‘अव्वल नंबर’ बप्पी ने की, उसके गीत मैंने लिखे। निर्माता भीष्म कोहली की फिल्म थी ‘चलते चलते’, उसके बाद ‘दिल से मिले दिल’। उमेश मेहरा की फिल्म में उनके साथ मैंने गीत लिखे ‘अविनाश’ फिल्म में। केतन आनंद की दो फिल्में थीं ‘शर्त’ और ‘एक्शन’, उसमें मैंने गीत लिखे, बप्पी का संगीत था। बासु दा की एक फिल्म में मैंने गीत लिखे, उसमें बप्पी का संगीत था। हम लोगों ने साथ में काफी काम किया।
ये वो दौर था हिंदी सिनेमा का जब गानों के मायने होते थे। गाने याद रह जाते थे सिनेमा देखने के बाद। सिनेमा को लोग उनके गानों से याद रखते थे। आज की तारीख में मैं ‘चलते चलते मेरे गीत याद रखना’ की बात कर रहा हूं..
देखिए क्या है, संगीत और खासतौर पर जो फिल्मों का संगीत है, वह तो एक दर्पण है। जैसी फिल्म बनती है, जैसी निर्माता निर्देशक सोचते हैं, वैसा ही या उसमें बंध के संगीतकार उनकी रचना करता है और ये लेखक फिर उस पर बोल बिठाता है। अब इसमें कविता जो एक आदमी लिखता है, वह तो बिल्कुल खुली आजाद कविता होती है।
बप्पी दा की कौन कौन सी यादें हैं जो आज आपके मस्तिष्क में बार बार कौंध रही हैं?
देखिए क्या है कि एस डी बर्मन के बाद मेरे ख्याल से वह जो बांग्ला, असमिया और नॉर्थ ईस्ट के लोक में बसा जो संगीत है, उसका उन्होंने सबसे ज्यादा प्रयोग किया है। पंचम ने भी किया। लेकिन, पंचम ने कम किया। उन गानों में वही मिठास होती थी। वह बाउल संगीत का इस्तेमाल करते थे और रबींद्र संगीत से भी वह काफी प्रभावित हुए थे। और, मैं तो अक्सर ये किया करता जब मेरे अपने गाने रिकॉर्ड हो रहे होते तो मैं तो उनकी माता जी को भी बोल दिया कि करता था कि आप भी सिटिंग में बैठिए। उनकी माता जी (बांसुरी लाहिड़ी) और पिता जी (अपरेश लाहिड़ी) दोनों बहुत गुणी थे।
तो कोई एक याद जो उन्होंने कभी किसी गीत को लेकर या वैसे भी कही और जो आपको याद रह गई हो?
वह कहते थे तुम बहुत कम गीत लिखते हो, तो मैंने कहा कि मैं क्या करूं। अभी भी जो मेरी आखिरी बात हुई थी उनसे तो उस समय मुझे भी कोविड हुआ था तो उन्होंने फोन किया कि मुझे पता चला है कि तुम्हें कोविड हुआ है। मुझे भी हुआ था। मैं तो ठीक होकर घर आ गया हूं तुम भी ठीक हो जाओगे। मैंने कहा, हां ठीक हो जाऊंगा मैं भी। मेरा उस वक्त कोविड के समय ही स्पाइन का फ्रैक्चर हो गया था तो वह एक लंबा ट्रायल हो गया। और, उनकी भी तबियत खराब हो गई। मैंने एक दो बार फोन किया तो फोन उठाया नहीं। मुझे कोई आइडिया नहीं था। फिर एक दिन उनकी बेटी रीमा ने फोन उठाया और मुझे बताया कि बाबा की तबियत खराब है। तो मैंने कहा कि अच्छा, अगली बार जब मैं बंबई आऊंगा तो जरूर मिलूंगा।