16 अप्रैल की तारीख भारतीय रेलवे के लिए बेहद खास है क्योंकि इस दिन को भारतीय रेलवे के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। 16 अप्रैल 1853 में भारत में पहली बार यात्री ट्रेन बोरीबंदर से थाने के लिए निकली थी। भारत में रेल सिर्फ लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का ही काम नहीं करती बल्कि हिंदी सिनेमा में भी इसका खास महत्व रहा है। प्यार में डूबे दो प्रेमी को कहीं भागना हो या फिर किसी अंजान के हाथ में हाथ देकर जिंदगी का सफर तय करना रहा हो, ट्रेन हमेशा से बॉलीवुड फिल्मों के रोमांस का एक अहम हिस्सा रही।
अराधना से जब वी मेट तक, वो फिल्में जहां ट्रेन साबित हुई कहानी की असल हीरो
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फिल्मों में ट्रेन को सिर्फ ट्रेन की तरह नहीं दिखाया गया। कभी जाती हुई ट्रेन ने बताया कि कोई अपना दूर जा रहा तो कभी बताया कि कैसे दो अजनबी एक ट्रेन के सफर में हमसफर भी बन सकते हैं। फिल्ममेकर हों या संगीतकार हिंदी सिनेमा में ट्रेन को रोमांस, उम्मीद और आजादी के नजरिए से ही देखा गया। आज आपको बताते हैं कुछ ऐसी ही खास फिल्मों के बारे में जहां ट्रेन किसी किरदार की तरह नजर आई।
छलिया
मनमोहन देसाई की फिल्म छलिया की शुरूआती सीन में दिखाया गया कि एक ट्रेन लाहौर से दिल्ली की ओर आती है। इस फिल्म की हीरोइन नूतन लाहौर में फंस रहती है और इस ट्रेन में मौजूद रहती हैं। जैसे ही ट्रेन पाकिस्तान की सरहद छोड़ भारत में आती है तो नूतन के चेहरे पर खुशी छा जाती है। वो खुशी रहती है अपने देश लौट आने की। वो खुशी रहती है इस उम्मीद की कि वो दोबारा अपने परिवार से मिल पाएंगी।
जब प्यार किसी से होता है
1961 में रिलीज हुई फिल्म 'जब प्यार किसी से होता है' में ट्रेन के सीन को बेहद रोमांटिक अंदाज में दिखाया गया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे देवानंद ट्रेन से छलांग लगाते हुए कार की छत पर आ जाते हैं और शर्माती हुई आशा पारेख से कहते हैं, 'जिया ओ जिया कुछ बोल दो....'। आशा पारेख ट्रेन के दरवाजे पर खड़ी उनके दिल का हाल सुनती रहती हैं। फिल्म का ये गाना आज भी यादगार है और ट्रेन का ये सीन भी।
अराधना
ट्रेन हमेशा से रोमांस का हिस्सा रही और इसका एक और उदाहरण फिल्म 'अराधना' में भी देखने को मिला। ट्रेन की खिड़की के पास बैठीं शर्मिला टैगोर को देखते हुए जब राजेश खन्ना ने गाया 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू....'तो दर्शकों के दिल में खुशी की लहर दौड़ गई। खिड़की के पास बैठी शर्मिला कभी किताब पढ़ते तो कभी गीत के बोल सुनकर शर्माती नजर आईं। ट्रेन के बराबरी में राजेश खन्ना की गाड़ी चलती नजर आई और जब तक ये साथ बना रहा गीत के जरिए दिल के हालात कहे गए। फिर ट्रेन ने दूसरा रास्ता पकड़ लिया और गीत गाता शख्स ट्रेन में बैठी शर्मिला के लिए एक खूबसूरत याद बन गया।