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हिंदू-मुस्लिम की बहस पर खुलकर बोले सुशांत सिंह, कहा- 1947 से चल रही, हल किसी के पास नहीं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जीरकपुर
Updated Thu, 09 Aug 2018 04:19 PM IST
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सुशांत सिंह
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हिन्दू-मुस्लिमों पर चल रही बहस पर 'सावधान इंडिया' के सुशांत सिंह ने खुलकर बातचीत की और कहा कि इस समस्या का समाधान किसी के पास नहीं है। पढ़ें इंटरव्यू...
फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह
- फोटो : amarujala
थिएटर आर्टिस्ट से अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले कलाकार सुशांत सिंह बुधवार को जीरकपुर के एक होटल में पहुंचे। ‘अमर उजाला’ के साथ विशेष बातचीत में सुशांत सिंह ने बताया कि आजकल हिंदू-मुस्लिम को लेकर देश में चल रही बहस चिंता का विषय है। यह सब नेताओं द्वारा फैलाया जा रहा है।
सुशांत सिंह
सुशांत सिंह ने एक किस्सा शेयर करते हुए बताया कि एक बार किसी काम को लेकर लखनऊ गया था। वहां पर एक गाड़ी हायर की, जिसका चालक मुसलमान था। उसकी गाड़ी के पिछली तरफ हरिओम का निशान बना था। बाद में चालक से पूछताछ की तो पता चला कि गाड़ी का मालिक हिंदू है। मैंने चालक से हिंदू और मुसलमान की परिभाषा पूछने की कोशिश तो चालक ने जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं है। हम दोनों में जातपात को लेकर कोई भेदभाव नहीं। बल्कि हम दोनों एक दूसरे के पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।
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सुशांत सिंह
एक सवाल के जवाब में सुशांत सिंह ने कहा कि हिंदू और मुसलमान का मुद्दा 1947 से चला आ रहा है। मैं चाहता हूं कि इसको अब खत्म कर देना चाहिए। किसी को किसी में भेदभाव नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा सुशांत सिंह ने अपने एक्सपीरियंस को शेयर किए और अपने सीरियल 'सावधान इंडिया' में क्या नया किया जा रहा है के बारे जानकारी दी। सुशांत सिंह ने बताया कि उन्होंने अब तक 55 फिल्मों में काम किया है और अब अपना सारा फोकस सावधान इंडिया के दोबारा शुरू होने वाले कार्यों पर है।
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सुशांत सिंह
सुशांत सिंह ने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद लोगों के अंदर बढ़ रहे डर को दूर करना है। साथ ही जो समाज में कुरीतियां फैली हैं उस पर चोट करना अहम लक्ष्य है। आमतौर पर बच्चों से लेकर युवा स्मार्ट फोन का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि इसके जितने फायदे हैं उतने नुकसान भी। एक जमाना था जब हमें रेप का नाम तक सुनने को नहीं मिलता था और आज आलम यह है कि 15 से 16 साल का युवा रेप जैसी वारदातों को अंजाम दे रहा है। इसका कारण बच्चों में तेजी से बढ़ते स्मार्ट फोन की टेक्नोलॉजी है। पेरेंट्स से अपील है कि बच्चों को गैजेट्स से दूर रखें।