सत्तर के दशक के दो बड़े सुपरस्टार्स धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन की फिल्म शोले जिस साल रिलीज हुई, उसी साल दोनों कलाकारों की एक और फिल्म चुपके चुपके भी रिलीज हुई। लेकिन, शोले की धुआंधार कामयाबी के चलते इस फिल्म के ज्यादा चर्चे नहीं हुए। हिंदी सिनेमा की बेहतरीन कॉमेडी फिल्मों में से एक है फिल्म चुपके चुपके। इसका हास्य शुद्ध हास्य है। ये भोंडी कॉमेडी नहीं। इसमें फूहड़पन नहीं है। किसी दूसरे का मज़ाक उड़ाकर हास्य पैदा करने की कोशिश नहीं है। ये ऋषिकेश मुखर्जी की कॉमेडी है। वो ऋषिकेश मुखर्जी जो इस फिल्म के आने तक दिलीप कुमार के साथ मुसाफिर, राज कपूर के साथ अनाड़ी, देव आनंद के साथ असली नकली, धर्मेंद्र के साथ सत्यकाम, राजेश खन्ना के साथ आनंद और अमिताभ बच्चन के साथ अभिमान बना चुके थे।
शोले से पहले इस फिल्म में ‘जय’ ‘वीरू’ और ‘राधा’ ने किया था कमाल, क्लासिक कॉमेडी के पूरे हुए 45 साल
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11 अप्रैल 1975 यानी की 45 साल पहले मशहूर कॉमेडी फिल्म 'चुपके चुपके' रिलीज हुई। हिंदी सिनेमा के इतिहास में दिग्गज फिल्मकार ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित इस फिल्म को क्लासिक फिल्म का तमगा हासिल है। फिल्म में धर्मेंद्र से लेकर शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, ओम प्रकाश और असरानी मुख्य किरदारों में हैं। फिल्म की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 10 लाख रुपये से भी कम में बनी इस फिल्म ने उस जमाने में 2.22 करोड़ रुपये की कमाई की थी। 127 मिनट की इस फिल्म को इतनी खूबसूरती से फिल्माया गया है कि सिनेमाघरों में दर्शक अपनी कुर्सी से आखिर तक चिपके बैठे रहे। ये फिल्म नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम और सोनी लिव पर देखी जा सकती है।
'चुपके चुपके' बंगाली फिल्म 'छद्मबेशी' की हिंदी रीमेक है। यह फिल्म उपेन्द्रनाथ गांगुली की कहानी पर आधारित थी जो साल 1971 में रिलीज हुई। फिल्म में उत्तम कुमार ने ड्राइवर का किरदार निभाया है। ऋषिकेश मुखर्जी में इस फिल्म को बनाने का ख्याल कैसे आया इसके बारे में कुछ खास जानकारी तो नहीं है लेकिन ऐसा माना जाता है कि ऋषिकेश मुखर्जी ने इस फिल्म को बनाने का फैसला साल 1971 में ही कर लिया था। अटकलें हैं कि 'गुड्डी' में धर्मेंद्र के गेटअप को देखकर उन्हें 'छद्मबेशी' की रीमेक का ख्याल आया।
'चुपके चुपके' साल 1975 में रिलीज हुई थी। इसी साल फिल्म 'शोले' भी आई थी। दोनों ही फिल्मों में धर्मेंद्र, अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की तिकड़ी नजर आई थी। 'चुपके चुपके' में जहां तीनों अपनी कॉमेडी से लोगों को गुदगुदाते हुए नजर आए तो वहीं 'शोले' में पूरी तरह से अलग एक्टिंग थी। चुपके चुपके में धर्मेद्र ने प्रोफेसर परिमल त्रिपाठी का किरदार निभाया था। वह ड्राइवर के किरदार में भी नजर आए जो अपने जीजा जी को तंग करने के लिए मजेदार नाटक रचते हैं। धर्मेन्द्र के डायलॉग्स से लेकर अदाकारी ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। यह धर्मेंद्र की पहली कॉमेडी फिल्म थी।
ऋषिकेश मुखर्जी काफी सख्त फिल्मकार रहे। यहां तक कि फिल्म के सेट पर वह अमिताभ बच्चन से लेकर धर्मेंद्र जैसे उस जमाने के सुपरस्टार्स तक को छूट नहीं दिया करते थे। वह सेट पर अपने पास छड़ी लेकर रखते थे कि और खास ख्याल रखते थे कि सेट पर उनकी मर्जी के खिलाफ कोई कुछ भी ना करे। उनका अनुशासन लोग फिल्म आनंद के उस किस्से की वजह से भी याद रखते जिसके मुताबिक उन्होंने राजेश खन्ना के लेट आने पर तो उनसे कुछ नहीं कहा लेकिन जब वो मेकअप कराके ड्रेस बदल के कैमरे के सामने खड़े हुए तो उन्होंने पैकअप बोल दिया, यानी कि बिना उस दिन की शूटिंग शुरू किए ही शूटिंग खत्म कर दी।