हिंदी सिनेमा का एक ऐसा अभिनेता जिसकी अदाओं भर से लोगों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती थी। जो सिनेमा के पर्दे पर अगर खामोश भी हो जाता था तो लोगों की हंसी थमती नहीं थी। 60 और 70 के दशक में राजेंद्र नाथ का नाम सबकी जुबान पर हुआ करता था। कलर और ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के जानदार हास्य कलाकार राजेंद्र नाथ की 13 फरवरी को डेथ एनिवर्सरी है। इस मौके पर जानिए उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्सों के बारे में....
Rajendra Nath: जब कंगाल होकर कर्ज चुकाने के लिए खून के आंसू रोए राजेन्द्र नाथ, तब पाई-पाई के मोहताज हुए थे
राजेंद्र नाथ का जन्म 8 जून 1931 को टीकमगढ़ राज्य में हुआ था। उस दौरान हिंदुस्तान में ब्रिटिश हुकूमत थी। आजादी के बाद टीकमगढ़ मध्य प्रदेश के हिस्से में चला गया। राजेंद्र के पिता करतार नाथ रीवा शहर के आईजी ऑफ पुलिस थे। राजेंद्र के आठ भाई और चार बहनें थीं। राजेंद्र के सबसे बड़े भाई प्रेमनाथ थे। राजेंद्र डॉक्टर बनना चाहते थे। बड़े भाई का फिल्मों में रुझान देखते हुए उनकी भी फिल्मों में रूचि बढ़ने लगी थी।
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रीवा में स्कूलिंग पूरी करने के बाद प्रेम नाथ के कहने पर राजेंद्र नाथ भी 1947 में बॉम्बे पहुंच गए। राजेंद्र नाथ की बहन कृष्णा की शादी पृथ्वीराज कपूर के बेटे राज कपूर से हुई थी, तो उन्हें बॉम्बे में मदद मिल गई। राजेंद्र नाथ ने पृथ्वी थिएटर जॉइन कर दीवार, आहुति, पठान और शकुंतला जैसे नाटकों में हिस्सा लिया।
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अपने बड़े भाई प्रेम नाथ के नक्शेकदम पर राजेंद्र बॉम्बे तो आए लेकिन काम के लेकर उनकी लापरवाही बड़े भाई से बर्दाश्त नहीं हुई। बात इतनी बढ़ी कि प्रेम ने इन्हें घर से निकाल दिया। कई महीनों के संघर्ष के बाद राजेंद्र नाथ फिल्मों में तो आए लेकिन इनकी शुरुआती फिल्में फ्लॉप रहीं। राजेंद्र नाथ ने साल 1961 में आई फिल्म 'जब-जब फूल खिले' में पोपटलाल का किरदार निभाया था। वह किरदार इतना हिट हुआ था कि लोग उन्हें राजेंद्र नाथ की जगह पोपट लाल के नाम से याद करने लगे थे। राजेंद्रनाथ रेडियो के लिए भी नाटक किया करते थे। तब से लेकर 1998 तक राजेंद्र नाथ करीब 253 फिल्मों का हिस्सा रहे। कॉमेडी के अलावा इन्होंने फिल्म मेकिंग में भी हाथ आजमाया, लेकिन पहली ही फिल्म ने उन्हें बड़े कर्जे में डूबा दिया।
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साल 1974 में राजेंद्र ने अपनी सारी जमा पूंजी लगाकर फिल्म द गेट क्रेशर बनाई। फिल्म में नीतू सिंह और रणधीर कपूर लीड रोल में थे। राजेंद्र को कॉमेडी में तो महारत हासिल थी, लेकिन फिल्म मेकिंग में उन्हें कोई अनुभव नहीं था। कास्ट, क्रू, और डायरेक्टर ने जो फीस मांगी, राजेंद्र ने हाथों-हाथ दे दी। नतीजा ये रहा कि ओवर बजट होने से 10 दिनों में ही फिल्म की शूटिंग रुक गई। राजेंद्र अब अपने और कर्ज लिए हुए सारे पैसे लगा चुके थे, लेकिन फिल्म बनने से पहले ही रुक गई। कर्ज देने वालों को उनके पैसे वापस चुकाने थे। मीडिया से एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया की कर्ज चुकाने के लिए राजेंद्र नाथ ने बता की , 'यूपी और दिल्ली के डिस्ट्रीब्यूटरों ने मुझे खून के आंसू रुलाया। मेरी स्थिति पता होते हुए भी लोगों ने मुझसे ज्यादा ब्याज लिया और एक-एक पैसे निकलवाए'।
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