देशभर में हुए लॉकडाउन की वजह से आम से लेकर खास व्यक्ति तक कोई भी घर से बाहर नहीं निकल पा रहा है। लॉकडाउन के तीसरी बार बढ़से लोग एक बार फिर परेशान हो रहे हैं। ऐसे में महीनेभर से ज्यादा का समय घर पर बिताने की वजह से लोग बोर होने लगे हैं। आप लोगों की बोरियत मिटाने के लिए हम लेकर आए हैं आपके लिए 80 के दशक की ऐसी फिल्में जिन्हें देखकर आप बोर होने की बजाए हंस-हंसकर लोटपोट हो जाएंगे। ये कॉमेडी फिल्में इस लॉकडाउन के दौरान देखने के लिए और टाइमपास के लिए बेहतर विकल्प साबित होंगी। तो यहां है लिस्ट...
80 के दशक की ये कॉमेडी फिल्में करेंगी बढ़े हुए Lockdown में आपका टाइमपास, हंस-हंसकर हो जाएंगे लोटपोट
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चश्मे बद्दूर (1981)
साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म चश्मे बद्दूर में फारुख शेख और दीप्ती नवल मुख्य भूमिका में थे। फिल्म तीन दोस्तों की कहानी रहती है। तीनों एक फ्लैट शेयर करते हैं। जिनमें से दो दोस्त लल्लन मियां (सईद जाफरी) और ओमी (राकेश बेदी) अपने पड़ोस में रहने वाली हर लड़की को पटाने की कोशिश करते हैं लेकिन उनसे हो नहीं पाता। उनका तीसरा दोस्त जो हमेशा किताबों के बीच ही समय बिताता है उसकी तरफ पड़ोस में रहने वाली लड़की पट जाती है। असल कहानी यहीं से शुरू होती है। अब दोनों दोस्त लग जाते हैं इन दोनों के बीच की दोस्ती तुड़वाने में। ये कॉमेडी फिल्म आपके लॉकडाउन के समय को व्यतीत करने में आपकी पूरी तरह से मदद कर सकती है।
ऋषिकेश मुखर्जी निर्देशित फिल्म 'गोलमाल' साल 1979 में रिलीज हुई थी। फिल्म में अमोल पालेकर, उत्पल दत्त और बिंदिया गोस्वामी मुख्य भूमिका में नजर आए थे। ये फिल्म राम प्रसाद और लक्ष्मण प्रसाद के इर्द गिर्द घूमिती है। ये दोनों जुड़वा भाई रहते हैं। हालांकि ऐसा कुछ होता नहीं है। अपने एक झूठ को सच बताने के चक्कर में अमोल पालेकर अपने जुड़वां भाई होने की मनघड़ंत कहानी रचते हैं। पूरी कहानी बस यहीं घूमती है। इस फिल्म को देखने के बाद आप भी हंस हंसकर लोटपोट हो जाएंगे।
फिल्म शौकीन 1981 में रिलजी हुई थी। फिल्म में मुख्य किरदार में रति अग्निहोत्री, मिथुन चक्रवर्ती, उत्पल दत्त, एके हंगल और अशोक कुमार होते हैं। ये फिल्म तीन उम्रदराज बुजुर्गो पर आधारित है। तीनों उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचकर अपनी जिंदगी जीने की कोशिश करते हैं। इसी बीच तीनों बाहर घूमने के लिए जाते हैं जहां उन्हें अनीता (रति अग्निहोत्री) मिलती है। बस यहां से तीनों अनीता का अटेंशन पाने की कोशिश में लग जाते हैं। अनीता इन तीनों की आधी से भी कम उम्र की लड़की रहती है। लॉकडाउन के बीच ये फिल्म भी आपके मनोरंजन के लिए बेहतरीन है।
1983 में आई इस फिल्म में मुक्य किरदार में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह हैं। फिल्म एक पेशेवर फोटोग्राफर विनोद चोपड़ा (नसीरुद्दीन शाह) और सुधीर मिश्रा (रवि वासवानी) पर आधारित है। दोनों मिलकर मुंबई में एक फोटो स्टूडियो खोलते हैं। लेकिन ये स्टूडियो चल नहीं पाता। इसी बीच दोनों को एक समाचार संपादक एक खूफिया काम करने को देते हैं। ये काम होता है कई रसूखदार और भ्रष्टाचार लोगों के बारे में जानकारी एकत्रित करने का। ये फिल्म भी कॉमेडी के मामले में अव्वल है। ये फिल्म भी लॉकडाउन के दौरान आपका मनोरंजन करने में बेहतरीन है।

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