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B'Day Spl: रेड लाइट एरिया से पहली हीरोइन ढूंढने गए थे दादा साहब फाल्के,जानें जिंदगी से जुड़े 7 सच
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बॉलीवुड में फिल्मों की शुरुआत करने वाले दादा साहब की आज 148वीं बर्थ एनिवर्सरी है। दादा साहब ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री की नींव रखी बल्कि बॉलीवुड को पहली हिंदी फिल्म भी दी जिसे लोग आज भी याद करते हैं। 19 साल के फिल्मी सफर में दादा साहब फाल्के ने 121 फिल्में बनाई जिसमें 26 शॉर्ट फिल्में शामिल हैं। तो चलिए आपको इस खास मौके पर दादा साहब फाल्के की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बाते बताते हैं।
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Dadasaheb Phalke
दादा साहब फाल्के का असल नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत गोधरा में बातौर फोटोग्राफर की थी लेकिन पहली पत्नी और बच्चे के अचानक निधन के बाद उन्होंने इससे किनारा कर लिया। जिसके बाद उन्होंने भारत के पुरातत्व सर्वेश्रण विभाग में ड्राफ्टमैन के तौर पर काम किया।
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दादा साहब फाल्के शुरुआत से ही अपने आप को किसी भी एक सीमा में बांध कर नहीं रखना चाहते थे। इसी वजह से पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में काम के दौरान ही उन्होंने अपना प्रिंटिंग प्रेस का बिजनेस शुरू कर दिया था। इसके बाद वह नई टेक्नोलॉजी सीखने के लिए जर्मनी भी गए।
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दादा साहब फाल्के हमेशा ही कुछ नया करने की चाहत रखते थे। उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट 'द लाइफ ऑफ क्राइस्ट' फिल्म साबित हुई। यह एक मूक फिल्म थी। इस फिल्म को देखने के बाद दादा साहब के मन में कई तरह के विचार तैरने लगे तभी उन्होंने अपनी पत्नी से कुछ पैसे उधार लिए और पहली मूक फिल्म बनाई।
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इसके बाद साल 1913 में दादा साहब फाल्के ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री की नींव रखी जिसकी वजह से लोग उन्हें इंडस्ट्री का जनक कहने लगे। 1913 में पहली मूक फिल्म 'राजा हरिश्चन्द्र' रिलीज हुई। यह पहली फिल्म थी जिसे पब्लिक के लिए कोरोनेशन सिनेमा में 3 मई 1913 को मुंबई में पहला शो रखा गया था।
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