10 साल में 25 फिल्में कर चुकीं 28 साल की रकुल प्रीत सिंह दिल्ली से हैं। तेलुगू सिनेमा की वह सुपरस्टार हैं। ज्यादा पॉकेटमनी के लालच में उन्होंने साउथ की पहली फिल्म की और फिर एक के बाद एक फिल्में ही करती गईं। अब हिंदी सिनेमा में भी वह कदम जमाने की कोशिश कर रही हैं। उनकी अगली हिंदी फिल्म दे दे प्यार दे इस शुक्रवार को रिलीज हो रही है। रकुल प्रीत से एक खास मुलाकात।
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अजय देवगन और तब्बू जैसे सीनियर कलाकारों के साथ काम करना कैसा रहा? इन दोनों कलाकारों को लेकर तो आपकी बचपन की भी कुछ यादें होंगी?
(मुस्कुराते हुए) मैंने अपनी ज़िंदगी में जो पहला गाना गाया वह अजय देवगन और तब्बू पर फिल्म विजयपथ में फिल्माया गया गाना ही था- 'रुक रुक रुक, अरे बाबा रुक', इसी गाने पर मैंने कई स्कूल परफॉर्मेंस भी दिए। अब फिल्म दे दे प्यार दे में इन दोनों के साथ मैं काम कर रही हूं। सबसे अच्छा तब लगा जब लोगों ने ट्रेलर और गानों में मुझे भी नोटिस किया क्योंकि इतने बड़े और सीनियर कलाकारों के बीच पहचान बनाना मुश्किल होता है। दोनों के साथ काम करने में काफी मजा आया। कभी लगा ही नहीं कि ये लोग इतने सीनियर हैं।
तो फिल्म साइन करते समय तो डर लगा होगा?
नहीं नहीं, ऐसा कुछ नहीं था। स्क्रिप्ट सुनते ही मैने हां कर दी। हालांकि, लव रंजन ने कहा कि एक दिन ले लो और आराम से सोच लो लेकिन मुझे समय जाया नहीं करना था। फिल्म की कहानी मुझे इतनी अच्छी लगी कि सुनते ही हां कर दिया। आज के समय से काफी मेल भी खाती है दे दे प्यार दे की कहानी। दोगुनी उम्र के साथी से प्यार करना भी प्यार ही है।
आप एक ऐसा किरदार कर रही हैं जिसे अपने से दोगुनी उम्र के इंसान से प्यार हो जाता है। निजी जिंदगी में ऐसा कोई अनुभव होता तो कैसा महसूस करतीं?
जिस तरह की मेरी परवरिश हुई है तो सच कहूं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं होती। अगर मेरे पिता मुझे 18 साल पहले छोड़ गए होते तो मेरी सोच अलग होती। मैं खुश होती यह देखकर कि वह किसी और के साथ खुश हैं। आजकल के समय में ऐसा काफी आम है कि माता-पिता अलग हो जाते हैं लेकिन तब भी अपने बच्चों की देखभाल करते हैं। वहीं यह उनका निर्णय है मेरा नहीं, अगर वह खुश हैं तो मैं भी खुश हूं।
हिंदी सिनेमा में अक्सर आपकी तुलना तापसी पन्नू से होती है, क्या कहना है आपका इस बारे में?
वैसे तो मैंने पहली फिल्म 2009 में कर ली थी, लेकिन तब मैं इतना सीरियस नहीं था। साउथ में मैं अपनी असली शुरूआत 2013 से मानती हूं। यह वो वक्त था जब कॉलेज और फैशन कॉम्पीटिशन पूरा कर मैंने फिल्मों को ही अपना करियर बनाने का फैसला किया। इस हिसाब से वह मेरी सीनियर हैं। हालांकि उन्होंने उतनी तेलगु फिल्में नहीं की हैं जितनी मैंने की। वह हिन्दी सिनेमा में भी मुझसे पहले आईं। मैं और तापसी अच्छे दोस्त हैं, उनका काम देखकर मुझे काफी प्रेरणा मिलती है।
