मशहूर शायर और दिग्गज गीतकार राहत इंदौरी की आज दूसरी पुण्यतिथि है। 1 जनवरी 1950 को इंदौर में जन्मे राहत कुरैशी 2020 में कोरोना संक्रमित हो गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 11 अगस्त को 77 साल की उम्र में उनका दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। राहत इंदौरी जिनते उम्दा शायर थे, उतने ही शानदार गीतकार भी थे। उन्होंने हिंदी सिनेमा के लिए भी कई गाने लिखे थे। आइए आज उनकी पुण्यतिथि के मौके आपको उनके जीवन से जुड़ी कुछ बातें बताते हैं...
Rahat Indori: ‘बुलाती है मगर जाने का नहीं...’, उम्दा शायर ही नहीं शानदार गीतकार भी थे राहत इंदौरी
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उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रहे
राहत इंदौरी की प्रारंभिक शिक्षा नूतन स्कूल इंदौर में हुई। इसके बाद उन्होंने 1973 में इस्लामिया करीमिया कॉलेज स्नातक और 1975 में बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल से उर्दू साहित्य में एमए किया। एमए के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी भी की। शायर बनने से पहले वह देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर में उर्दू साहित्य के प्राध्यापक भी रह चुके हैं। लेकिन शायरी का शौक उन्हें पहले से ही था।
कैसे तय हुआ शायर बनने का सफर
राहत कुरैशी का राहत इंदौरी बनने तक का सफर एक दिलचस्प किस्से से जुड़ा है। दरअसल, एक बार इंदौर में मुशायरा हो रहा था और राहत वहां पहुंच गए। मुशायरे में वह एक शायर के पास पहुंचे और उन्हें ऑटोग्राफ देने के लिए कहा। इसके साथ ही डरते हुए उन्होंने बड़े शायर के सामने अपनी इच्छा भी जाहिर की और पूछा कि मैं शायर बनना चाहता हूं, क्या करूं? कैसे बन सकता हूं? इस पर बड़े शायर ने जवाब दिया कि मियां पहले पांच हजार शायरी याद कर लो, फिर शायर बनना। इस पर राहत ने कहा कि उससे ज्यादा तो अभी याद हैं। इस पर उन्होंने कहा कि फिर देर किस बात की है शुरू हो जाओ। बस फिर क्या था राहत का एक बेहतरीन शायर बनने का सफर शुरू हो गया।
राहत कुरैशी से बने राहत इंदौरी
बड़े शायर से ये बात सुनने के बाद राहत इंदौर में ही अपनी महफिल सजाने लगे। लोगों को भी उनकी शायरी इस हद तक पसंद आने लगी कि वह अपनी शायरी के जरिए ही बहुत कुछ बातें कह देते थे। राहत लोकप्रिय होने लगे तो उन्होंने अपने नाम में अपने शहर का नाम जोड़ लिया। उनका मानना था कि दुनिया में जहां भी उनका नाम पहुंचेगा, वहां उनके शहर का नाम भी पहुंच जाएगा। ऐसे करके वह राहत कुरैशी से राहत इंदौरी बन गए।
राहत इंदौरी ने 'चोरी चोरी जब नजरें मिलीं', 'ये रिश्ता', 'बुंबरो', 'नींद चुराई मेरी किसने ओ सनम तूने', 'दिल को हजार बार रोका रोका रोका', 'छन छन' सहित कई बेहतरीन गाने हिंदी सिनेमा के लिए लिखे हैं। इसके अलावा उनकी शायरी, 'बुलाती है मगर जाने का नहीं, ये दुनिया है इधर जाने का नहीं, मेरे बेटे किसी से इश्क कर, मगर हद से गुजर जाने का नहीं, जमीं भी सर पे रखनी हो तो रखो, चले हो तो ठहर जाने का नहीं' सहित कई युवाओं में भी काफी लोकप्रिय है।