'हुस्न के लाखों रंग, कौन सा देखोगे?' आइटम नंबर की जब बात छेड़ी जाती है तो 70 के दशक की आइटम क्वीन पद्मा खन्ना का जिक्र न हो, हो नहीं सकता। हिंदी सिनेमा में एक नर्तकी के रूप में पहचान बनाने वालीं पद्मा खन्ना के सिनेमा में योगदान को भुलाया नहीं जा सकता और उनको हिंदी सिनेमा के रंग बिरंगे आसमान पर सजाने का श्रेय जाता है नए सितारों को लगातार खोजते रहे सदाबहार अभिनेतार निर्देशक देव आनंद को।
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भोजपुरी सिनेमा से बोहनी
हिंदी सिनेमा में कदम रखने से पहले पद्मा खन्ना भोजपुरी फिल्मों में काम किया करती थीं। गंगा मैया तोहे पियरी चढ़इबो, बिदेसिया, बलम परदेसिया उनकी कुछ बेहतरीन भोजपुरी फिल्मों में से एक हैं। पद्मा ने सात साल उम्र से ही कथक नृत्य सीखना शुरू कर दिया था। उनके गुरु कोई और नहीं बल्कि पंडित बिरजू महाराज थे। कला में उनकी ऐसी रुचि देखकर बिरजू महाराज ने ही उन्हें आगे बढ़ने की सलाह दी और अभिनय पर भी काम करने का मशविरा दिया। उस समय की बेहतरीन अदाकारा पद्मिनी और वैजयंती माला बनारस के दौरे पर थीं। एक समारोह में इस दोनों ने पद्मा को मंच पर नृत्य करते हुए देखा और वह पद्मा के नृत्य से बहुत प्रभावित हुईं। उन्होंने पद्मा को मुंबई आकर फिल्मों में काम करने की सलाह दी और भोजपुरी फिल्मों में काम देने की सिफारिश भी की।
'जॉनी मेरा नाम' ने बदल दी जिंदगी
भोजपुरी के साथ पद्मा को कुछ हिंदी फिल्मों में भी काम मिलना शुरू हुआ; जिनमें ये जिंदगी कितनी हसीन है, चांद पर चढ़ाई, हीर रांझा एक हैं। उस समय देव आनंद अपनी फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' बना रहे थे, और उस फिल्म के लिए एक आइटम नंबर शूट करना था। पद्मा की चर्चाएं देव आनंद ने भी सुन रखी थीं। उन्होंने अपनी फिल्म में नाचने के लिए पदमा को आमंत्रित किया। ऐसा मौका भला कौन छोड़ना चाहेगा? पद्मा ने झट से हां कर दी और उन्हें इतनी बड़ी फिल्म में एक आइटम नंबर करने का मौका मिला। यहां से पद्मा की जिंदगी बदल गई।
पाकीजा में मीना कुमारी की बॉडी डबल
इसके बाद पद्मा को सीमा, प्यार दीवाना, रामपुर का लक्ष्मण जैसी एक के बाद एक फिल्में मिलने लग गईं। पदमा का करियर धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा था, तभी उनके पास एक और बड़ा मौका खुद चल कर आया। यह मौका उन्हें उनकी शारीरिक बनावट की वजह से मिला। फिल्म निर्माता और निर्देशक कमाल अमरोही अपनी फिल्म 'पाकीजा' बना रहे थे। उसकी अभिनेत्री मीना कुमारी की फिल्म के बीच में ही तबीयत नासाज रहने लगी। पद्मा की कद-काठी एकदम मीना कुमारी जैसी ही थी। अमरोही के दिमाग में यह ख्याल आया कि क्यों न मीना के हिस्से की कुछ शूटिंग पद्मा से करवा ली जाए। इसके बाद मीना कुमारी के पीठ पीछे वाले सारे सीन पद्मा पर फिल्माए गए। पाकीजा के सुपरहिट गीत 'चांद के पार चलो' और 'तीर-ए-नजर देखेंगे' में पद्मा ने ही अभिनय किया है।
'सौदागर' में बनीं बिग बी की हीरोइन
कई फिल्मों में आइटम नंबर और छोटे-मोटे किरदार करने के बाद आखिरकार पद्मा को अमिताभ बच्चन के साथ फिल्म 'सौदागर' में मुख्य भूमिका निभाने का मौका मिला। इस मौके को पद्मा ने पूरी गंभीरता से लिया। उन्होंने इस फिल्म में एक गांव की लड़की का किरदार निभाया है। 'सजना है मुझे, सजना के लिए' इसी फिल्म का गाना है जिसे पद्मा पर फिल्माया गया है। आज भी कोई औरत जब सजती-संवरती है, तो लोग उसे इसी गाने को गाकर मन में लड्डू फूटने वाला महसूस कराते हैं।