मद्रास कैफे और विकी डोनर जैसी फिल्में बनाकर हिंदी सिनेमा में कहानियों की अहमियत वापस लाने वाले जॉन अब्राहम के करियर का टर्निंग प्वाइंट है फिल्म रॉ यानी रोमियो अकबर वॉल्टर। बिना किसी शोर गुल के वॉयकॉम 18 ने इसका टीजर गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चुपके से जारी कर दिया है, लेकिन जैसा कि दुष्यंत कुमार लिखते हैं, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए, जॉन अब्राहम की इस फिल्म की आंच भी लोगों ने वीकएंड की छुट्टियों की प्लानिंग के बीच भी महसूस कर ही ली।
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डिजिटल रिव्यू: भारत के टीजर पर भारी है बहुरूपिये जॉन की फिल्म रॉ का ये टीजर
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sat, 26 Jan 2019 08:14 AM IST
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john abraham
- फोटो : file photo
कलाकार – जॉन अब्राहम, मौनी रॉय, जैकी श्रॉफ और सिकंदर खेर
मद्रास कैफे और विकी डोनर जैसी फिल्में बनाकर हिंदी सिनेमा में कहानियों की अहमियत वापस लाने वाले जॉन अब्राहम के करियर का टर्निंग प्वाइंट है फिल्म रॉ यानी रोमियो अकबर वॉल्टर। बिना किसी शोर गुल के वॉयकॉम 18 ने इसका टीजर गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चुपके से जारी कर दिया है, लेकिन जैसा कि दुष्यंत कुमार लिखते हैं, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए, जॉन अब्राहम की इस फिल्म की आंच भी लोगों ने वीकएंड की छुट्टियों की प्लानिंग के बीच भी महसूस कर ही ली।
मद्रास कैफे और विकी डोनर जैसी फिल्में बनाकर हिंदी सिनेमा में कहानियों की अहमियत वापस लाने वाले जॉन अब्राहम के करियर का टर्निंग प्वाइंट है फिल्म रॉ यानी रोमियो अकबर वॉल्टर। बिना किसी शोर गुल के वॉयकॉम 18 ने इसका टीजर गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चुपके से जारी कर दिया है, लेकिन जैसा कि दुष्यंत कुमार लिखते हैं, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए, जॉन अब्राहम की इस फिल्म की आंच भी लोगों ने वीकएंड की छुट्टियों की प्लानिंग के बीच भी महसूस कर ही ली।
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जॉन अब्राहम ने परमाणु और सत्यमेव जयते में खुद को हिंदी सिनेमा का नया पैट्रियॉटिक हीरो बनाकर पेश किया और अक्षय कुमार की औसत सी फिल्मों पैडमैन और गोल्ड पर भारी पड़े। इस साल उनका मुकाबला अक्षय की केसरी से होगा और टीजर देखकर लगता है कि ये मुकाबला भी दिलचस्प होने वाला है। टीजर शुरू होता है महिला स्वर में सुनाई देने वाले संवाद से, “तेरे अब्बा हमें दिल्ली ले गए थे 26 जनवरी की परेड दिखाने। जन गण मन बजा नहीं तू अपने अब्बा से पहले सैल्यूट मारने को तैयार।”
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Romeo Akbar Walter
- फोटो : social media
टीजर का पेरिमीटर इस संवाद के साथ सेट होते ही गाना बजना शुरू होता है, ‘ऐ वतन, ऐ वतन, हमको तेरी कमस...।’ 1965 में रिलीज हुई मनोज कुमार की फिल्म शहीद में प्रेम धवन के लिखे और कंपोज किए इस गाने ने न जाने कितने नौजवानों की रगों में खून का दौड़ान तेज किया है। और, गालिब के शेर, ‘.. जब आंख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है’ से क्लू लेते हुए जॉन के फ्रेम दर फ्रेम बदलते चेहरे के साथ टीजर वहां आकर खत्म होता है, जहां से शहीद का गाना शुरू होता है, जलते भी गये कहते भी गए, आज़ादी के परवाने। जीना तो उसी का जीना है, जो मरना देश पे जाने।
John Abraham
- फोटो : social media
हिंदी सिनेमा में बतौर डायरेक्टर डेब्यू कर रहे रॉबी ग्रेवाल ने टीजर की झलक दिखाकर बता दिया है कि रॉ से दर्शकों को क्या उम्मीद हो सकती है। फिल्म बनाने वालों को इसे रिलीज करने वालों से भी उम्मीदें काफी होंगी। भरोसा किया जाना चाहिए कि फिल्म को हिंदी पट्टी में प्रचारित-प्रसारित करने में वॉयकॉम 18 पहले अंधाधुन और अब ठाकरे की तरह कंजूसी नहीं करेगी। और ऐसा इसलिए भी क्योंकि 25 जनवरी की ही दोपहर रिलीज हुए सलमान खान की फिल्म भारत के टीजर पर जॉन की इस फिल्म का टीजर भारी है।

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