दिलीप कुमार हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार बने। उन्होंने अपनी दमदार अदाकारी के दम पर इंडस्ट्री को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। अपने पांच दशको के करियर में अभिनेता ने हिंदी सिनेमा को कई सुपरहिट फिल्में दीं और ट्रेजडी किंग बने। अभिनेता के जरिए निभाए गए दमदार किरदार आज तक नए कलाकारों के लिए अदाकारी का स्कूल हैं। अभिनेता ने फिल्मों के साथ-साथ निजी जिंदगी को लेकर भी काफी सुर्खियां बटोरी थीं। दिलीप कुमार आज भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी बातें, अदाकारी और फिल्में आज भी हमारे दिनों में बसी हुई हैं। आज अभिनेता के जन्मदिवस के मौके पर चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
Dilip Kumar: आजादी के आंदोलन में शामिल हुए थे दिलीप कुमार, ट्रेजडी किंग ने इस वजह से जेल में काटी थीं रातें
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दिलीप कुमार का असली नाम मोहम्मद यूसुफ खान था। उनका जन्म अब के पाकिस्तान के पेशावर में किस्सा ख्वानी बाजार की तंग गलियों में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। दिलीप कुमार उनका फिल्मी नाम था, जो प्रसिद्ध अभिनेत्री और फिल्म निर्माता देविका रानी ने दिया था। फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाली दिलीप ने कभी अभिनय नहीं सीखा था। वे फिल्मों में आने से पहले वह ब्रिटिश आर्मी कैंटीन में काम करते थे। कैंटीन में उनके बनाए हुए सैंडविच बेहद मशहूर हुआ करते थे। लोग बड़े चाव से उनकी सैंडविच खाने आते थे।
भारत को आजादी मिलने से पहले दिलीप कुमार का जन्म हुआ था, ऐसे में उन्होंने अपने सामने स्वतंत्रता के लिए सैनिकों को संघर्ष करते हुए देखा। ऐसे में वे भी इन कई आंदोलनों का हिस्सा रहे। कैंटीन में काम करते हुए दिलीप ने एक साथी के कहने पर भारत की तारीफ में भाषण दिया था। आजादी के लिए भारत की लड़ाई एकदम जायज है और ब्रिटिश शासक भारतीयों से साथ गलत पेश आते हैं। पुलिस ने दिलीप कुमार को अंग्रेज सरकार के खिलाफ बोलने के जुर्म में जेल में डाल दिया।
यह किस्सा दिलीप कुमार की किताब 'द सब्सटांस एंड द शैडो' में बताया गया। अपनी किताब 'दिलीप कुमार- द सब्सटांस एंड द शैडो' में दिलीप कुमार ने यह किस्सा बताते हुए लिखा था, 'फिर क्या था, ब्रिटेन विरोधी भाषण के लिए मुझे येरवडा जेल भेज दिया गया, जहां कई सत्याग्रही बंद थे। तब सत्याग्रहियों को गांधीवाले कहा जाता था। दूसरे कैदियों के समर्थन में मैं भी भूख हड़ताल पर बैठ गया। सुबह मेरे पहचान के एक मेजर आए तो मुझे जेल से रिहा किया गया। मुझे भी वहां गांधीवाला बुलाया जाता था।'
दिलीप कुमार ने 20 साल से कुछ ही अधिक उम्र में 1944 में ‘ज्वार भाटा’ से फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। 1998 में आई 'किला' उनकी आखिरी फिल्म थी। 56 साल के अपने फिल्मी जीवन में उन्होंने एक से बढ़कर एक यादगार फिल्में दीं। 1950 और 1960 के दशक को उनके साथ ही हिंदी सिनेमा के स्वर्ण काल के रूप में जाना जाता है। 1949 में आई महबूब खान की फिल्म ‘अंदाज’ से दिलीप कुमार सुपरस्टार बन गए। दिलीप 'देवदास', 'मुगल-ए-आजम' जैसी फिल्मों में अपने शानदार अभिनय को पेश किया है।