दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार की आज पहली बरसी है। हिंदी सिनेमा में उनका काफी बड़ा योगदान रहा। उन्होंने कई शानदार फिल्मों में काम किया। इनमें से एक फिल्म है, 'मुगल-ए-आजम'। यह हिंदी सिनेमा की एक कालजयी फिल्म है। इसे बनाने में पानी की तरह पैसा बहाया गया। फिल्म में शहजादे सलीम का किरदार दिलीप कुमार ने निभाया और क्या खूब निभाया। वर्ष 1960 में रिलीज हुई इस फिल्म को के. आसिफ ने अपने खून-पसीने से सींचा, तो दिलीप कुमार सहित बाकी कलाकारों ने भी इस फिल्म को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यही वजह है कि आज भी जब सलीम का नाम लिया जाता है तो एकबारगी मुगल-ए-आजम वाले दिलीप कुमार का चेहरा ही सामने आता है। मगर, हैरानी की बात यह है कि के. आसिफ इस फिल्म में सलीम के किरदार के लिए दिलीप कुमार के नाम पर तुरंत सहमति नहीं बना पाए थे। पहली बार में तो उन्होंने दिलीप साहब को लेने से इनकार ही कर दिया था।
Dilip Kumar Death Anniversary: मुगल-ए-आजम के लिए रिजेक्ट हो गए थे दिलीप कुमार, फिर ऐसे बनी थी बात
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दिलीप कुमार के फिल्मी करियर का वह शुरुआती दौर था। उनकी पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' (1944) फ्लॉप हो चुकी थी। दिलीप कुमार अपने अभिनय की कोई खास छाप नहीं छोड़ पाए थे। हालांकि, इसके बाद भी उन्हें दर्शकों और निर्माता-निर्देशकों ने पूरी तरह खारिज नहीं किया था। दिलीप कुमार के अंदाज में कुछ तो बात थी कि लोग उनका सम्मान करते थे। इन्हीं में से एक थे के.आसिफ। दिलीप कुमार की आत्मकथा 'दिलीप कुमार-द सब्सटांस ऐंड द शेडो' में के आसिफ की पहली पत्नी और अभिनेत्री सितारा देवी ने इस बात का जिक्र करते हुए कहा है, 'के. आसिफ ने हैंडसम एक्टर दिलीप कुमार के बारे में सुन रखा था। एक दिन बोले चलो एक बार इसको भी देख ही लूं। हालांकि, उस वक्त तक सलीम के रोल के लिए सप्रू ही उनके जहन में थे। लेकिन, उन्होंने सोचा किसी नए एक्टर के बारे में भी सोचने में कोई गुरेज नहीं। जब दिलीप भाई आए और हमारे ड्रॉइंग रू में बैठे तो एक लम्हे को मैंने खुद को बेजुबान सा महसूस किया। चेहरे पर चुंधियाते बाल और नूर की चमक। अंदाज में नफासत थी। उसे देखकर कोई भी कह सकता था कि वह एक खास चीज है, जिस पर अल्लाह का साया है।'
उन्होंने आगे कहा, 'इसके बाद आसिफ और दिलीप कुमार के बीच कुछ बातचीत हुई। फिर दिलीप कुमार वह चले गए। इसमें कोई शक नहीं कि दिलीप कुमार से प्रभावित हुए बिना के. आसिफ नहीं रहे थे। मगर, उनका ख्याल था कि दिलीप कुमार काफी दुबले-पतले हैं और सलीम के किरदार में वही एक्टर जंचेगा, जिसमें मुगल शहजादों की सी जलवागिरी हो। इसके बाद के. आसिफ ने ऐसी बात कह डाली जो आगे चलकर सच साबित हो गई और दिलीप कुमार को यह रोल मिल गया।'
के. आसिफ ने सलीम के रोल के लिए दिलीप कुमार का ख्याल त्यागते हुए कहा था, 'मुमकिन है कि मैं दस साल बाद जब सलीम-अनारकली की मोहब्बत की इस दास्तान पर दोबारा स्क्रिप्ट लिखूं तब शायद सलीम के रोल के लिए मैं दिलीप कुमार को चुन लूं। उसमें शाहाना शान तो मौजूद है, मगर अभी वह इस रोल के लिए तैयार नहीं है।' हालांकि इस मुलाकात के बाद दिलीप कुमार के साथ के.आसिफ की अच्छी जान-पहचान हो गई। इस बीच के. आसिफ ने सलीम के रोल के लिए सप्रू को ले लिया। मगर, संयोग से वह फिल्म कभी बन नहीं पायी। जब बनी तो फिर दिलीप कुमार ने ही सलीम का किरदार अदा किया। बरसों बाद ही सही, लेकिन वह रोल लिखा दिलीप कुमार के नसीब में ही था।