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Guru Dutt Birth Anniversary: फिल्मों में आने से पहले टेलीफोन ऑपरेटर थे गुरु दत्त, पढ़ें उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से
50 और 60 के दशक को हिंदी सिनेमा का स्वर्णं काल माना जाता है। गुरु दत्त उसी जमाने के डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और एक्टर थे। गुरु दत्त को उनकी कल्ट फिल्मों के लिए जाना जाता है। उनकी फिल्मों में कला, गहराई और सच्चाई झलकती थी। और उनकी फिल्मों के गाने तो आपको दीवाना बनाने के लिए ही काफी हैं। फूल और कांटे को अगर छोड़ दें तो गुरु दत्त की हर फिल्म अपने आप में सुपरहिट थी। जब फ्रांस, जापान और जर्मनी जैसे देशों में फिर से उनकी फिल्में रिलीज की जाती हैं उनके प्रति लोगों की दीवानगी आज भी देखी जाती है। हालांकि गुरु दत्त की पहली पसंद एक्टिंग नहीं थी, लेकिन दुनिया भर में उनके अभिनय का डंका बजता था। आज गुरु दत्त साहब की 96वीं बर्थ एनिवर्सरी है। इस मौके पर हम आपको उनसे जुड़े कुछ किस्से बताने जा रहे हैं।
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गुरु दत्त
- फोटो : फाइल
9 जुलाई 1925 को कर्नाटक में जन्मे गुरु दत्त का पूरा नाम वसंत कुमार शिवशंकर पादुकोण था। इनको अपने समय से आगे का व्यक्ति माना जाता था। गुरु दत्त के पिताजी स्कूल में हेडमास्टर थे और माताजी लेखिका थीं। कला और शिक्षा के इनका गहरा लगाव रहा है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा कलकत्ता में हुई थी। बचपन में घटी एक दुर्घटना के बाद उन्होंने अपना नाम बदकर गुरु दत्त कर लिया था। इसके बाद वह मुंबई चले गए और इस नाम को हमेशा के लिए अपना लिया।
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गुरु दत्त
- फोटो : सोशल मीडिया
गुरु दत्त की आर्थिक स्थिति कमजोर थी, इस वजह से वह कभी कॉलेज नहीं जा पाए थे। दत्त ने फिल्मी दुनिया में आने से पहले कलकत्ता में टेलीफोन ऑपरेटर का काम किया था। बाद में इस काम से उनका मोहभंग हो गया और उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी। इसके बाद गुरु दत्त पुणे में एक फिल्म कंपनी में काम करने लगे। ये तीन साल का कॉन्ट्रैक्ट था। इसी कंपनी में काम करते वक्त गुरु दत्त की देवानंद और रहमान संग अच्छी दोस्ती हो गई थी।
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गुरु दत्त और देव आनंद
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद दत्त साहब ने कोरियोग्राफर, एक्टर और असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू कर दिया। साल 1944 में फिल्म चांद में सबसे पहले उनको श्रीकृष्ण का रोल करने के लिए मिला। हालांकि इसमें उनका किरदार काफी छोटा सा था। दत्त सहाब के डायरेक्शन में बनी पहली फिल्म बाजी थी, जो कि 1951 में रिलीज हुई। गुरु दत्त ने बॉलीवुड को कई उम्दा कलाकार दिए, जिनमें जॉनी वॉकर, वहीदा रहमान, राइटर-डायरेक्टर अबरार अल्वी और सिनेमेटोग्राफर वीके मूर्ति शामिल हैं।
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गुरु दत्त और गीता दत्त
- फोटो : सोशल मीडिया
1951 में आई फिल्म 'बाजी' के सेट पर गुरु दत्त की मुलाकात उस समय की मशहूर गायिका गीता रॉय से हुई। पहली ही मुलाकात में दत्त साहब उनको अपना दिल दे बैठे थे। बात आगे बढ़ी तो मुलाकातों का दौर शुरू हुआ। अक्सर गुरु दत्त गीता से मिलने और कई बार अपनी लंबी गाड़ी में बैठकर जाते थे। दोनों ने प्यार का इकरार किया और 1953 में गुरु दत्त और गीता रॉय की शादी हो गई।
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