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EXCLUSIVE: देश सेवा करने के लिए मुझे राजनीति में उतरने की जरूरत नहीं- ममूटी

एंटरटेनमेंट डेस्क, मुंबई Published by: Mishra Mishra Updated Sat, 29 Jun 2019 01:06 PM IST
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Exclusive interview of Malayalam actor Mammootty Mamangam
Mammootty - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
मलयालम सिनेमा का नाम पहली बार केरल की सरहदों से बाहर लाकर दूसरी भाषाओं तक ले जाने वाले कलाकार हैं मोहम्मद कुट्टी पनीपरम्बिल इस्माल, प्यार से जिन्हें लोग ममूटी कहते हैं। सर्वश्रेष्ठ अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके ममूटी अब मलायलम सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की कोशिश में हैं। उनकी अगली फिल्म मामंगम मलायलम सिनेमा की अब तक की सबसे बड़े बजट की फिल्म है और इसे हिंदी, तमिल, तेलुगू में भी डब करने की तैयारी है। कोच्चि में ममूटी ने अमर उजाला से की ये खास मुलाकात।


करीब 400 फिल्में, दर्जनों पुरस्कार, दुनिया भर में फैले प्रशंसक। इस सबके बाद भी ऐसा क्या है जो आपको 67 साल की उम्र में भी मलयालम सिनेमा को दुनिया के नक्शे पर और बड़ा बनाने के लिए प्रेरित करता है?
बड़ा या छोटा ये आनुपातिक बाते हैं जो समय के हिसाब से बदलती रहती हैं। हम पहले भी बड़ी फिल्में बनाते थे, लेकिन वे उस समय के हिसाब से बड़ी थीं। आज के समय में खड़े होकर देखें तो वे उतनी बड़ी नजर नहीं आतीं। अब हम इस समय के हिसाब से एक बड़ी फिल्म बनाने जा रहे हैं जो आज के समय के हिसाब से बड़ी है। 
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Mammootty - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
देश के सबसे बड़े मेलों में कुंभ के बाद मामंगम की गिनती होती है? केरल के इस महाकुंभ की बरसों पुरानी इस कहानी में ऐसा क्या दिखा जिसने आपको ये किरदार करने के लिए प्रेरित किया?
यह भारतीय इतिहास का एक हिस्सा है। देश भर में तमाम ऐसे नायक हैं जो गुमनाम हैं। ये भी एक गुमनाम नायक की कहानी है। ऐसा नायक जिसका बस सरनेम ही इतिहास में मिलता है, वह भी बस एक दो जगह। बाकी कुछ उसके बारे में ज्यादा कहीं लिखा नहीं गया। हमने इसमें सिनेमाई आजादी ली है और एक ऐसी शख्सियत गढ़ी है जो किसी बंद दरवाजे की तरह है। भीतर क्या कुछ हुआ होगा, इसे हमने कल्पना के सहारे गढ़ने की कोशिश की है। इस फिल्म को बनाने का विचार हमें बाहुबली को मिली कामयाबी के बाद आया। फिल्म को लेखकों की एक बड़ी टीम का साथ मिला है और इसके लिए महीनों की रिसर्च लगी है। ये एक ऐसी कहानी जो भारत की नई पीढ़ी को बतानी जरूरी है।
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Exclusive interview of Malayalam actor Mammootty Mamangam
Mammootty - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

फिल्म बाहुबली में स्पेशल इफेक्ट्स का काफी इस्तेमाल हुआ है, क्या मामंगम में भी दर्शकों को वैसा ही कुछ देखने को मिलेगा?
नहीं, हम स्पेशल इफेक्ट्स पर ज्यादा यकीन नहीं करते। मैं कलारीपयट्टू जानता हूं। तमाम फिल्मों में इसका प्रदर्शन मैं पहले भी कर चुका हूं। हां, बदलती तकनीक का सहारा हम जरूर इस फिल्म में लेंगे। हमारा जोर इसकी कहानी पर है, जो बहुत रिसर्च के बाद तैयार की गई है। वीएफएक्स का इस्तेमाल सिर्फ उन दृश्यों में ही होगा, जहां इसकी जरूरत होगी। आपने फिल्म के सेट्स देखे हैं। हमने इसे ज्यादा से ज्यादा हकीकत के करीब रखने की कोशिश की है।

Exclusive interview of Malayalam actor Mammootty Mamangam
Mammootty - फोटो : Amar Ujala, Mumbai

आपके समकालीन अभिनेता कमल हासन और रजनीकांत राजनीति में आ चुके हैं? आमिर खान या शाहरुख खान जैसे सितारों के बयानों पर भी इन दिनों खूब राजनीति होती है, आपका राजनीति को लेकर क्या स्टैंड रहता है?
राजनीति को लेकर मेरा अपना नजरिया बिल्कुल साफ है। यह सबको पता भी है। इसे कहने से कोई फायदा नहीं। मैं सिर्फ इसलिए राजनीति में नहीं आना चाहता क्योंकि दूसरे अभिनेता राजनीति कर रहे हैं। राजनीति मेरे लिए नहीं है। मेरी अपनी राजनीतिक विचारधारा है। मैं भारत का नागरिक हूं और देश सेवा करने के लिए मुझे राजनीति में उतरने की जरूरत नही है। रही बात आमिर या शाहरुख के बयानों पर होने वाली राजनीति की तो इस बारे में मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता। राजनीतिक टिप्पणियों के लिए मेरे पास समय ही नहीं है। मैं जो हूं, सबको पता है, इसका खुलासा करने की जरूरत नहीं है।

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Exclusive interview of Malayalam actor Mammootty Mamangam
Mamangam - फोटो : Amar Ujala, Mumbai
सिनेमा में बायोपिक का जो दौर अब चल रहा है, उसके शुरूआती सूत्र अंबेडकर पर बनी बायोपिक से भी जोड़े जा सकते हैं, जिसमें आप भीमराव अंबेडकर बने। आपको लगता है कि सिनेमा में भाषाई सरहदें मिटाने का सही समय आ गया है?
हां, सिनेमा में भाषा की सरहदें कम हो रही है। दक्षिण भारत में बनी फिल्मों के हिंदी संस्करण ऊंचे दामों पर बिक रहे हैं। समय अब अखिल भारतीय सिनेमा का भी है। ये कभी भी हो सकता है। हर भाषा के कलाकारों को लेकर ऐसी फिल्में बननी ही चाहिए जो पूरे देश को पसंद आएं। दर्शकों की दूसरे राज्यों के ऐतिहासिक किरदारों में रुचि भी बढ़ी है। ये काम हॉलीवुड सरीखा इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि वहां सब एक ही भाषा अंग्रेजी बोलते हैं। हमारे देश में भाषाएं अलग हैं, खानपान अलग है, संस्कृति अलग है। हम सब बस एक भावना से जुड़े हैं जो है भारत।
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