जानिए क्या हुआ जब आनंद कुमार ने मां को दिखाया सुपर 30 का ट्रेलर, अमर उजाला से एक्सक्लूसिव मुलाकात
इस फिल्म के साथ आप कितना जुड़े रहे?
अक्सर ऐसा होता है कि किसी बायोपिक बनाने के लिए निर्माता इसके राइट्स खरीदते हैं, कहानी पूछते हैं और चले जाते हैं फिल्म बनाने। मैं हर कदम पर इनके साथ रहा। शूटिंग के दौरान भी फिल्ममेकर्स ने मुझसे सेट्स पर रहने को कहा। लेकिन कोचिंग छोड़कर मैं जा नहीं सकता। एक बार मैं जब शूटिंग पर गया तो ऋतिक खुद चलकर मेरे पास आए। मुझे लगा कि मैं खुद को ही आइने में देख रहा हूं। उनकी बोली भी बिल्कुल मेरे जैसी हो गई थी। मैंने उनसे मगही में बात की तो उन्होंने जवाब भी मगही में ही दिया, दिल खुश हो गया उनकी मेहनत देखकर।
पिताजी चाहते थे कि मैं पढ़ लिखकर वैज्ञानिक या अध्यापक बनूं और फिर लोगों के लिए मिसाल बनूं। गणित मेरा प्रिय विषय रहा। मेरे लेख तमाम जर्नल्स में छपने लगे और मुझे कैंब्रिज यूनीवर्सिटी में दाखिला भी मिल गया। लेकिन, तमाम जतन करने भी हम हवाई जहाज के टिकट भर के पैसे नहीं जुटा सके। इसी सदमे में मेरे पिताजी गुजर गए। पिताजी पोस्ट ऑफिस में थे, उनके गुजर जाने पर मुझे अनुकंपा के आधार पर नौकरी ऑफर हुई थी पर मैंने मना कर दिया। मां हर पल मेरे साथ रहीं। उन्होंने पापड़ बनाकर घर चलाया है।
कुछ छात्रों ने आपके खिलाफ मुकदमा भी किया है, क्या कहना है इस विवाद के बारे में?
यह सब फिल्म बनने के बाद शुरू हुआ। ये बच्चे न मेरे संपर्क में कभी आए और न ही मुझसे पढ़े हैं। किसी ने मेरे संस्थान की प्रवेश परीक्षा तक नहीं दी है। मैं और मेरा भाई दिन रात करके यह संस्थान चलाते हैं। हम सरकारी मदद भी नहीं लेते हैं। किसी भी इंसान की तरक्की होती है तो उसकी राह में रोड़े अटकाने वाले बहुत लोग आ जाते हैं। मुझे इन बच्चों से पूरी सहानुभूति है। लगता है कि ये लोग किसी के बहकावे में आ गए।