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'नूर' देखने जा रहे हैं तो जान लें ये 5 बातें
रवि बुले
Updated Sat, 22 Apr 2017 02:23 PM IST
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'नूर' फिल्म
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सोनाक्षी सिन्हा की शुक्रवार को रिलीज हुई 'नूर' लंबे एकालाप जैसी है जो आगे बढ़ती हुई बोरियत बढ़ाती जाती है। एक फ्रीलांस इंटरनेट जर्नलिस्ट के नजरिये से मुंबई को देखने की कोशिश उबाऊ है।
'नूर' फिल्म
कंफ्यूज कहानी:
'नूर' के किरदार की तरह कहानी कन्फ्यूज है। न ठीक-ठाक प्यार है और न करियर। 'नूर' इंटरनेट की आभासी और मायावी दुनिया जैसी रची गई है।
'नूर' के किरदार की तरह कहानी कन्फ्यूज है। न ठीक-ठाक प्यार है और न करियर। 'नूर' इंटरनेट की आभासी और मायावी दुनिया जैसी रची गई है।
'नूर' फिल्म
ढीली पकड़:
इंटरवेल तक जरूर 'नूर' की निजी दुनिया में आज के वर्चुअल वर्ल्ड वाले युवाओं की तस्वीर सामने आती है लेकिन दूसरे हिस्से में वह भी गायब है। पहले हिस्से की घटनाओं को समेट लेने की कोशिश, खोखले नतीजे सामने लाती है। कैमरे की आंख से मुंबई को नए ढंग से दिखाने में भी फिल्म नाकाम है।
इंटरवेल तक जरूर 'नूर' की निजी दुनिया में आज के वर्चुअल वर्ल्ड वाले युवाओं की तस्वीर सामने आती है लेकिन दूसरे हिस्से में वह भी गायब है। पहले हिस्से की घटनाओं को समेट लेने की कोशिश, खोखले नतीजे सामने लाती है। कैमरे की आंख से मुंबई को नए ढंग से दिखाने में भी फिल्म नाकाम है।
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'नूर' फिल्म
बेकार एक्टिंग:
सोनाक्षी को देख कर कभी नहीं लगताः तुम आ गए हो नूर आ गया है। कनन गिल नाजुक छोरे जैसे हैं। उनमें हीरो वाला दम नहीं। पूरब कोहली जरूर अपनी भूमिका में असर पैदा करते हैं।
सोनाक्षी को देख कर कभी नहीं लगताः तुम आ गए हो नूर आ गया है। कनन गिल नाजुक छोरे जैसे हैं। उनमें हीरो वाला दम नहीं। पूरब कोहली जरूर अपनी भूमिका में असर पैदा करते हैं।
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'नूर' फिल्म
कमजोर निर्देशन:
लंदन में जीवन का लंबा समय बिताने वाले निर्देशक सुनील सिप्पी की यह पहली फिल्म है। तकनीकी नजरिये से फिल्म पर उनकी पकड़ है परंतु कहानी और स्क्रिप्ट कमजोर थी तो वह क्या करते।
लंदन में जीवन का लंबा समय बिताने वाले निर्देशक सुनील सिप्पी की यह पहली फिल्म है। तकनीकी नजरिये से फिल्म पर उनकी पकड़ है परंतु कहानी और स्क्रिप्ट कमजोर थी तो वह क्या करते।