भारत ही नहीं पूरी दुनिया में मार्वल की कॉमिक्स पर बनीं फिल्मों का क्रेज है। जब भी कोई मार्वल की फिल्म सिनेमाघरों में आती है, तो फैंस के बीच एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि भारत की कॉमिक्स के सुपरहीरो पर फिल्में क्यों नहीं बनतीं। भारतीय कॉमिक्स के सुपरहीरो ‘डोगा’, ‘नागराज’, ‘सुपरकमांडो ध्रुव’ के बारे में आज की जनरेशन कम ही जानती हैं, अगर इन सुपरहीरो पर फिल्म बने तो लोग ‘आयरन मैन’, ‘कैप्टन अमेरिका’ की तरह इन्हें भी जान पाएंगे। ऐसा नहीं है कि भारत में इन सुपरहीरो पर फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की गई, कोशिश तो हुई लेकिन सफलता नहीं मिली। अनुराग कश्यप और बॉलीवुड के बादशाह शाहरुख खान ने इन सुपरहीरोज पर फिल्म बनाने घोषणा की, लेकिन सफल नहीं हो पाए। जानें क्या रही वजह...
Movies: मार्वल की तरह भारतीय कॉमिक्स पर क्यों नहीं बनती फिल्में? शाहरुख खान और अनुराग कश्यप की कोशिश भी रही असफल
डोगा पर फिल्म बनाना चाहते थे अनुराग
साल 2014 में कॉमिक सीरीज के लोकप्रिय किरदार ‘डोगा’ पर फिल्म बनाने की बात कहकर अनुराग कश्यप सुर्खियों में छा गए थे। उन्होंने कॉमिक बुक के अधिकार भी खरीद लिए थे और फैंटम फिल्म्स के मधु मेंतणा ने फिल्म की घोषणा भी कर दी थी। लेकिन रमन राघव की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अनुराग ने इस बात की पुष्टि कर दी कि अब फिल्म का निर्माण नहीं होगा। इसको लेकर कई बातें सामने आईं कि राज कॉमिक्स अपनी कहानी के लिए ज्यादा पैसे की मांग कर रहा है, तो ये बात भी सामने आई की राज कॉमिक्स फिल्म के मुनाफे से ज्यादा हिस्सा चाहता है। इसके बाद कभी डोगा पर फिल्म बन ही नहीं पाई।
सुपरहीरो बहादुर पर फिल्म बना रहे थे शाहरुख
आबिद सुरती की कॉमिक के हीरो ‘बहादुर’ पर शाहरुख खान और आशुतोष गोवरिकर फिल्म बनाना चाहते थे। इस बात की घोषणा भी हो गई थी और सुरती ने दिसंबर 2010 में एक इंटरव्यू के दौरान ये बात भी बताई। लेकिन कॉमिक के राइट्स को लेकर पंगा फंसा और फिर फिल्म नहीं बन पाई। अपने इंटरव्यू में आबिद सुरती ने कहा था, टाइम्स ग्रुप और उनके बीच कोई कानूनी समझौता नहीं है। जब वो इंद्रजाल के साथ थे तो उन्होंने सिर्फ एक कंट्रीब्यूटर के रूप में काम किया। सुरती ने उन्हें कॉमिक एक बार छापने का अधिकार दिया था। जब उन्होंने अपने सिल्वर जुबली अंक में कुछ स्ट्रिप्स को फिर से छापा, तो उन्हें सुरती को दोबारा भुगतान करना पड़ा। इस प्रकार से बहादुर के कॉपीराइट सुरती के पास हैं। सुरती ने कहा था, ‘निर्माताओं को कॉमिक पर फिल्म बनाने के लिए टाइम्स से एनओसी की आवश्यकता होती है और टाइम्स स्पष्ट रूप से मना कर देता है।’ ऐसा ही कुछ शाहरुख के साथ भी हुआ। इसके बाद 2011 में कबीर सदानंद ने भी फिल्म बनाने की बात कही थी। फिल्म की शूटिंग शुरू करने की घोषणा भी हुई, लेकिन फिल्म नहीं बन पाई।
कहां रह जाती है कमी
भारत में कई बार कॉमिक्स पर फिल्म बनाने की घोषणा की गई, लेकिन कोई भी फिल्म अभी तक बड़े पर्दे पर नहीं आई। 2020 में फिल्म निर्माता संजय गुप्ता ने भी कॉमिक बुक के कैरेक्टर ‘रक्षक’ पर फिल्म बनाने की घोषणा की थी, लेकिन इस फिल्म को लेकर अभी काम चल ही रहा है। दो साल पहले ही राज कॉमिक्स और करण जौहर मिलकर भी रणवीर सिंह के साथ इच्छाधारी सुपरहीरो नागराज पर फिल्म बनाने की बात कह चुके हैं। भारत में फिल्में न पूरी होनी की सबसे बड़ी वजह है, निर्माताओं का फिल्म के राइट्स और उसके बारे में जानने से पहले ही फिल्म बनाने की घोषणा कर देना। कई बार फिल्म के लिए ही इतना पैसा मांग लिया जाता है कि वे फिल्म बनाने का इरादा ही छोड़ देते हैं, जैसा अनुराग कश्यप के साथ हुआ। वहीं, मार्वल कॉमिक्स पर फिल्म बनाने के लिए पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया। पहले कॉमिक्स के राइटर से मिला गया और उसके बाद ही फिल्म बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई और मार्वल की फिल्मों का क्रेज देखते ही बनता है।