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पुण्यतिथि विशेषः यूं ही नहीं सबके दिलों में राज करते गालिब, बन चुकी हैं फिल्में और सीरियल
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: shrilata biswas
Updated Fri, 15 Feb 2019 07:33 AM IST
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मिर्जा गालिब
- फोटो : file photo
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महान शायर और फारसी कविता के प्रवाह को हिंदुस्तानी जुबान में लोकप्रिय कराने वाले मिर्जा गालिब के दीवाने दुनियाभर में फैले हैं। 27 दिसंबर, 1796 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मे मिर्जा गालिब की शेर-ओ-शायरी आज भी युवाओं की पहली पसंद है। 15 फरवरी, 1869 को दिल्ली में उन्होंने अपने प्राण त्यागे। अपनी लेखनी की जरिए आज भी गालिब लोगों के दिलों में राज कर रहे हैं। गालिब की पुण्यतिथि पर पढ़िए उनके जीवन पर बनी फिल्मों और टीवी सीरियल के बारे में....
Mirza Ghalib
- फोटो : social media
1954 में आई फिल्म मिर्जा गालिब
मिर्जा गालिब के जीवन पर आधारित सबसे पहली हिंदी फिल्म मिर्जा गालिब थी। यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के निर्देशक सोहराब मोदी और लीड एक्टर भारत भूषण थे। उस जमाने की मशहूर सिंगर सह अभिनेत्री सुरैया इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थीं। मिर्जा गालिब फिल्म को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया था।
मिर्जा गालिब के जीवन पर आधारित सबसे पहली हिंदी फिल्म मिर्जा गालिब थी। यह फिल्म 1954 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म के निर्देशक सोहराब मोदी और लीड एक्टर भारत भूषण थे। उस जमाने की मशहूर सिंगर सह अभिनेत्री सुरैया इस फिल्म में मुख्य भूमिका में थीं। मिर्जा गालिब फिल्म को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया था।
Mirza Ghalib
- फोटो : social media
1961 में पाकिस्तान में बनी मिर्जा गालिब
गालिब के चाहने वाले पाकिस्तान में भी बड़ी संख्या में हैं। इसी वजह से गालिब पर पाकिस्तान में फिल्म बनाई गई। 1961 में आई पाकिस्तानी फिल्म मिर्जा गालिब में पाकिस्तानी एक्टर सुधीर ने गालिब का रोल अदा किया था।
गालिब के चाहने वाले पाकिस्तान में भी बड़ी संख्या में हैं। इसी वजह से गालिब पर पाकिस्तान में फिल्म बनाई गई। 1961 में आई पाकिस्तानी फिल्म मिर्जा गालिब में पाकिस्तानी एक्टर सुधीर ने गालिब का रोल अदा किया था।
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मिर्जा गालिब
- फोटो : file photo
1988 में टीवी पर मिर्जा गालिब
गालिब की लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि फिल्म के अलावा टीवी सीरियल भी उनकी जीवनी पर बने। साल 1988 में मिर्जा के जीवन पर मिर्जा गालिब टीवी सीरियल बना। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले इस सीरियल को गुलजार ने लिखा था। मिर्जा गालिब टीवी सीरियल के हर एपिसोड का इंतजार दर्शक बड़ी ही बेसब्री से करते थे। इस सीरियल में भी नसीरुद्दीन शाह ने गालिब का किरदार निभाया था। नसीरुद्दीन को गालिब की पहचान इस फिल्म ने दिला दी। नसीरुद्दीन के करियर में यह सीरियल मील का पत्थर साबित हुआ। इस सीरियल में जगजीत सिंह की गाई ग़ज़लें कालजयी हो चुकी हैं।
गालिब की लोकप्रियता इतनी जबरदस्त थी कि फिल्म के अलावा टीवी सीरियल भी उनकी जीवनी पर बने। साल 1988 में मिर्जा के जीवन पर मिर्जा गालिब टीवी सीरियल बना। दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाले इस सीरियल को गुलजार ने लिखा था। मिर्जा गालिब टीवी सीरियल के हर एपिसोड का इंतजार दर्शक बड़ी ही बेसब्री से करते थे। इस सीरियल में भी नसीरुद्दीन शाह ने गालिब का किरदार निभाया था। नसीरुद्दीन को गालिब की पहचान इस फिल्म ने दिला दी। नसीरुद्दीन के करियर में यह सीरियल मील का पत्थर साबित हुआ। इस सीरियल में जगजीत सिंह की गाई ग़ज़लें कालजयी हो चुकी हैं।
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मिर्जा गालिब
- फोटो : file photo
सोशल मीडिया पर गालिब
13 साल की उम्र में गालिब की शादी नवाब ईलाही बख्श की बेटी उमराव बेगम से हो गई थी। निकाह के बाद वह दिल्ली आ गए जहां उनकी तमाम उम्र बीती। अपने पेंशन के सिलसिले में उन्हें कोलकाता की लम्बी यात्रा भी करनी पड़ी थी, जिसका जिक्र उनकी गजलों में जगह–जगह पर मिलता है। गालिब (और असद) नाम से लिखने वाले मिर्जा मुगल शासन के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर के दरबारी कवि भी थे। गालिब ने अपना जीवन आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में गुजारा था। फिल्मों और टीवी सीरियल के अलावा कई शॉर्ट और लॉन्ग फिल्में सोशल मीडिया पर रिलीज हुई हैं। गालिब के नाम से कई फेसबुक पेज और यूट्यब चैनल भी बने हैं।
13 साल की उम्र में गालिब की शादी नवाब ईलाही बख्श की बेटी उमराव बेगम से हो गई थी। निकाह के बाद वह दिल्ली आ गए जहां उनकी तमाम उम्र बीती। अपने पेंशन के सिलसिले में उन्हें कोलकाता की लम्बी यात्रा भी करनी पड़ी थी, जिसका जिक्र उनकी गजलों में जगह–जगह पर मिलता है। गालिब (और असद) नाम से लिखने वाले मिर्जा मुगल शासन के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर के दरबारी कवि भी थे। गालिब ने अपना जीवन आगरा, दिल्ली और कलकत्ता में गुजारा था। फिल्मों और टीवी सीरियल के अलावा कई शॉर्ट और लॉन्ग फिल्में सोशल मीडिया पर रिलीज हुई हैं। गालिब के नाम से कई फेसबुक पेज और यूट्यब चैनल भी बने हैं।