ग्रेसी सिंह आज अपना 42वां जन्मदिन मना रही हैं। 20 जुलाई 1980 को दिल्ली में जन्मी ग्रेसी ने टेलीविजन से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद ग्रेसी उस समय चर्चा में आईं, जब वह आमिर खान के साथ 'लगान' में दिखाई दी थीं। बॉलीवुड में कई फिल्मों में बेहतरीन काम करने के बाद भी ग्रेसी अपनी सफलता बरकरार नहीं रख पाईं और फिल्मों से दूर होती चली गईं। तो चलिए ग्रेसी सिंह के जन्मदिन के मौके नजर डालते हैं उनके करियर पर...
Gracy Singh: ‘लगान’ की ‘गौरी’ को लोग कहने लगे थे ‘घमंडी’, फिल्में न मिलने पर टीवी की ‘संतोषी मां’ बनकर की वापसी
1997 में शुरू किया टीवी पर सफर
फिल्मों में काम करने से पहले ग्रेसी सिंह टीवी सीरियल में नजर आ चुकी हैं। ग्रेसी सिंह ने 1997 में 'अमानत' सीरियल से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्हें फिल्मों के ऑफर आने लगे। वह 'हू तू तू' और 'हम आपके दिल में रहते हैं' फिल्म में भी नजर आईं, लेकिन असल पहचान उन्हें निर्देशक आशुतोष गोवारिकर की फिल्म 'लगान' (2001) से मिली। इस फिल्म में वह आमिर खान के साथ नजर आई थीं और उन्होंने गौरी का किरदार निभाया था।
रातों रात बन गई थीं स्टार
ग्रेसी 'लगान' की सफलता के बाद रातों रात स्टार बन गईं और लोगों के बीच उनकी लोकप्रियता बढ़ती चली गई। लेकिन इस फिल्म ने उन्हें घमंडी का टैग भी दे दिया। दरअसल, फिल्म में ग्रेसी एक गांव की लड़की का किरदार निभाने मे इतनी रम गई थी कि सेट पर किसी से बात ही नहीं करती थी। इसी वजह से लोग उन्हें घमंडी समझने लगे और ऐसे उनके साथ ये घमंडी का टैग भी लग गया था।
अचानक बंद हो गया काम मिलना
'लगान' के बाद ग्रेसी अजय देवगन के साथ 'गंगाजल' और संजय दत्त के साथ 'लगे रहो मुन्ना भाई' में भी नजर आईं। लोगों को लगा कि वह बॉलीवुड में बहुत बढ़िया पारी खेलेंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और उन्हें फिल्में मिलना बंद हो गईं। एक इंटरव्यू में ग्रेसी ने कहा भी था कि मैं मेहनत कर सकती हूं, चापलूसी नहीं। इंडस्ट्री की खेमेबाजी मेरी समझ नहीं आती। मुझे पता ही नहीं चला कि कब मेरे पास काम आना बंद हो गया।
ब्रह्मकुमारी संगठन से जुड़ीं
फिल्मों से दूरी बनाने के बाद वह 'संतोषी मां' बनकर टीवी पर वपास लौट आईं। संतोषी मां के किरदार से उन्हें खासी पहचान मिलने लगी। 2009 में उन्होंने अपनी डांस अकादमी भी खोली, जहां वह डांस सिखाती हैं। वहीं, अब वह ब्रह्मकुमारी संस्था से जुड़ चुकी हैं और इसलिए उन्होंने शादी भी नहीं की है। वह अपनाअधिकतर समय आध्यात्म की ट्रेनिंग लेने और देने में बिता रही हैं।
