इला अरुण किसी पहचान की मुहताज नहीं है। सिंगिंग के साथ-साथ 'शादी के साइड इफेक्ट्स', 'बेगम जान', 'लम्हे' और 'जोधा अकबर' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने वालीं इला अपने नए टेलीप्ले 'पीछा करती परछाइयां' की सफलता का आनंद ले रही हैं। 70 साल की उम्र में भी अभिनेत्री नए-नए प्रयोग करने से नहीं कतराती हैं। इसी कड़ी में इला ने अपने नए कार्यकाल के बारे में दिलचस्प विवरण साझा किए हैं।
Ila Arun: 'महिलाओं के जज्बात समझते थे हेनरिक इबसेन...', 'पीछा करती परछाइयां' को लेकर बोलीं इला अरुण
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इला अरुण ने जी थिएटर के टेलीप्ले 'पीछा करती परछाइयां' में केके रैना के साथ मिलकर काम किया है, जो थिएटर जगत के दिग्गज हैं। यह कहानी नॉर्वेजियन नाटककार हेनरिक इबसेन के 'घोस्ट्स' का हिंदी रूपांतरण है। इसी कड़ी में अभिनेत्री ने हेनरिक इबसेन की दिल खोलकर तारीफ की है। उनका मानना है कि हेनरिक इबसेन महिलाओं की आवाज और दिल की धड़कन को बखूबी समझते थे। यही वजह है कि उनके नाटक 200 साल बाद भी लोगों के प्रिय लोकप्रिय हैं।
सिंगर-अभिनेत्री इला सात बेटियों वाले परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनका मानना है कि महिलाओं ने बहुत प्रगति की है लेकिन रस्सी अभी भी पुरुषों के हाथ में है, जिसे महिलाएं अपनी मर्जी से पुरुषों को सौंपती हैं। 'पीछा करती परछाइयां' की बात करें तो इसकी कहानी राजस्थान के राजपूत परिवारों के इर्द गिर्द बुनी गई है। यह पारिवारिक बंधनों की जटिलताओं को दर्शाती है। यह टेलीप्ले एयरटेल स्पॉटलाइट, डिश टीवी रंगमंच एक्टिव और डी2एच रंगमंच एक्टिव पर प्रसारित हो रहा है।
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इला अरुणा ने साफ किया कि उन्होंने इस नाटक के जरिए यह दिखाने की कोशिश की है कि कैसे पूर्वज अपने समय में स्थापित नियमों और रीति-रिवाजों का भूत की तरह पीछा कर रहे हैं। यह नाटक धर्म के नाम पर चल रही सोच और मानसिकता की बात करता है। इला ने कहा, 'हर धर्म अच्छी बातें सिखाने की कोशिश करता है, लेकिन पुरुष अपनी सुविधा के लिए और महिलाओं को अपने नियंत्रण में रखते के लिए धर्म के नाम पर हेराफेरी करते हैं।'
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'पीछा करती परछाइयां' जी थिएटर के जरिए प्रस्तुत है। नाटकीय मंच के लिए इसका निर्देशन रैना द्वारा किया गया है। इसे टेलीविजन के लिए निर्देशक सौरभ श्रीवास्तव द्वारा फिल्माया गया था। नाटक में इला अरुण के अलावा विजय कश्यप, प्रियंवदा कांत और परम सिंह भी मुख्य भूमिका में हैं।