साधारण सा दुबला पतला इंसान, रोमांस करना भी ठीक से न आता हो और फिर भी परदे पर आए तो सीटियां, तालियां और सिक्कों की बौछार हो जाए। जी हां, हर दिल अजीज राजकुमार जब परदे पर आते थे तो ऐसा ही होता था। उनकी खास तरह की संवाद अदायगी ने राजकुमार को दशकों तक हिंदी सिनेमा का दुलारा बनाए रखा। मुंबई पुलिस की नौकरी छोड़ एक्टिंग के मैदान में उतरे बलूचिस्तान के इस नौजवान के बोले संवाद आज भी लोगों को जुबानी याद हैं। राजकुमार के जन्मदिन पर आइए आपको बताते हैं उनकी 10 दमदार फिल्मों के बारे में।
मदर इंडिया से तिरंगा तक, 'जानी'... आज भी सुपरहिट हैं राजकुमार के ये 10 किरदार
ऑस्कर पुरस्कार के लिए जाने वाली देश की पहली फिल्म मदर इंडिया में राजकुमार ने राधा (नरगिस) के पति शामू का किरदार निभाया। महबूब खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म को आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे अच्छी फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और 1957 में इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा की फिल्म के तौर पर ऑस्कर अवॉर्ड के लिए नामित किया गया। फिल्म में राजकुमार के साथ नरगिस, सुनील दत्त, और राजेन्द्र कुमार मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में राजकुमार की भूमिका छोटी पर अत्यंत महत्वपूर्ण थी। राजकुमार ने इस भूमिका को बखूबी अंजाम दिया।
एस.एस. वासन के निर्देशन में बनी फिल्म पैगाम में राजकुमार और दिलीप कुमार ने पहली बार एक साथ काम किया। इस फिल्म में राजकुमार और दिलीप कुमार के अलावा वैजयंती माला, सरोजा देवी और जॉनी वॉकर मुख्य किरदार निभा रहे थे। राजकुमार और दिलीप कुमार ने राम लाल और रतन लाल नामक भाइयों के किरदार निभाए। राजकुमार ने इस किरदार से हिंदी सिनेमा में अपने अभिनय की एक खास छाप छोड़ी। इस फिल्म में उम्दा अभिनय के लिए राजकुमार को फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के पुरस्कार के लिए नामित भी किया गया।
सी वी श्रीधर के निर्देशन में बनी फिल्म दिल एक मंदिर में राजकुमार, मीना कुमारी और राजेंद्र कुमार मुख्य किरदार निभा रहे थे। इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में राजकुमार ने राम नाम के एक कैंसर पीड़ित का किरदार निभाया। शंकर जयकिशन के संगीत से सजी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर साल 1963 की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक रही। इस फिल्म के लिए राजकुमार को फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के खिताब से नवाजा गया। इस फिल्म का ‘नेजिल ऑर अलायम’ नाम से तमिल रीमेक भी बना।
हिंदी सिनेमा में मल्टीस्टारर फिल्मों की शुरुआत वक्त से होती है। सुनील दत्त, राजकुमार, शशि कपूर, साधना, बलराज साहनी, मदन पुरी, शर्मीला टैगोर, और अचला सचदेव जैसे सितारों से सजी इस फिल्म को यश चोपड़ा ने निर्देशित किया। 1965 में बनी यह फिल्म साल की सबसे बड़ी हिट फिल्म साबित हुई। फिल्म में राजकुमार का डायलॉग ‘ये बच्चों के खेलने की चीज नहीं, हाथ कट जाए तो खून निकल आता है’ काफी प्रसिद्ध हुआ। फिल्म में राजकुमार के हिस्से कई बेहतरीन संवाद आए। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार दिया गया। फिल्म का सबसे मशहूर संवाद रहा, 'चिनॉय सेठ, जिनके अपने घर शीशे के हो, वे दूसरों पर पत्थर नही फेंका करते।'
