हिंदी भाषी राज्यों में साउथ फिल्मों की सफलता ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस विवाद की शुरुआत तब हुई, जब कोरोना महामारी के बाद रणवीर सिंह की '83' ने अल्लू अर्जुन की 'पुष्पा: द राइस' के सामने घुटने टेक दिए थे। हालांकि मार्च महीने में जब बाहुबली स्टारर प्रभास की 'राधे श्याम' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हुई, तब इन चर्चाओं पर कुछ समय के लिए विराम लग गया था। लेकिन अब जब एस एस राजामौली की 'आरआरआर' और प्रशांत नील की 'केजीएफ: चैप्टर 2' ने अक्षय कुमार की 'बच्चन पांडे' और शाहिद कपूर की 'जर्सी' को बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह पछाड़ दिया, तब बॉलीवुड पर सवाल उठने फिर से शुरू हो गए हैं।
Bollywood vs South Cinema: हिंदी सिनेमा के अभिनेताओं ने ही कर डाली बॉलीवुड की किरकिरी, जानें किसने क्या कहा?
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हालांकि कोई भी इस मुद्दे पर खुलकर बात नहीं कर रहा था। लेकिन जैसे ही कन्नड़ अभिनेता किच्चा सुदीप ने बॉलीवुड पर बयान दिया है, वैसे ही बॉलीवुड के कई अभिनेता इसके विरोध में खड़े हो गए। आज हम आपको इस रिपोर्ट में यह बताने जा रहे हैं कि बॉलीवुड बनाम साउथ फिल्म इंडस्ट्री में किस अभिनेता ने किस इंडस्ट्री का सपोर्ट किया है। पढ़िए...
एक कार्यक्रम के दौरान किच्चा सुदीप ने कहा कि "हिंदी अब राष्ट्रभाषा नहीं रही।" इसके बाद, देवगन ने अपने ट्विटर हैंडल से सुदीप की टिप्पणी पर अपने विचार व्यक्त करते हुए हिंदी में लिखा, "किच्चा सुदीप, मेरे भाई, आपके अनुसार, अगर हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं है, तो आप अपनी मूल भाषा [मातृभाषा] फिल्मों को हिंदी में डब करके क्यों रिलीज करते हैं? हिंदी राष्ट्रभाषा थी, है और हमेशा रहेगी। जन गण मन।" दोनों अभिनेताओं के ट्वीट के बाद, बॉलीवुड और दक्षिण भारत के कई अभिनेताओं के बयान आने शुरू हो गए।
साउथ सिनेमा बदलेगा बॉलीवुड का तरीका
तेलुगू फिल्म ‘आचार्य’ में नजर आने वाले बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद ने हाल ही में एक साक्षामत्कार में कहा "मुझे नहीं लगता कि हिंदी को सिर्फ राष्ट्रभाषा कहा जा सकता है। भारत की एक भाषा है, जो मनोरंजन है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप किस उद्योग से संबंधित हैं। यदि आप लोगों का मनोरंजन करते हैं, तो वे आपसे प्यार करेंगे, आपका सम्मान करेंगे और स्वीकार करेंगे। केवल अच्छे सिनेमा को ही स्वीकार किया जाएगा। साउथ सिनेमा, हिंदी फिल्मों के निर्माण के तरीके को बदल देगा।"
साउथ की फिल्मों को इस वजह से करते हैं डब
अनूप जलोटा ने मीडिया से बातचीत में कहा, 'हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हिंदी में बात किया करते थे। देश की आधी से ज्यादा आबादी हिंदी समझती है। हम इन बातों पर चर्चा करके अपना वक्त बर्बाद कर रहे हैं। दक्षिण भारतीय भाषाओं का सम्मान होता है, यहां तक कि बिहारी और पंजाबी का भी पूरा सम्मान है, लेकिन लोग हर एक भाषा समझ नहीं सकते हैं। इसलिए दक्षिण भारतीय फिल्मों को हिंदी में डब किया जाता है, ताकि दर्शक समझ सकें।"