Web Series Review: हिज स्टोरी
कथा, पटकथा: सुपर्ण ए वर्मा। अतिरिक्त पटकथा व संवाद: ऋतु भाटिया
कल्पना: बलजीत सिंह चड्ढा। निर्देशक: प्रशांत भागिया
कलाकार: प्रिय मणि, सत्यदीप मिश्र, मृणाल दत्त, चारू शंकर, श्रुति मेनन, रियेन तेजानी, नितिन भाटिया, परिणीता सेठ, राजीव कुमार और मिकैल गांधी आदि।
ओटीटी: जी5/ऑल्ट बालाजी
रेटिंग: **
एकता कपूर की वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ और करण जौहर की फिल्मावली ‘अजीब दास्तान्स’ की टाइमिंग जानबूझकर आगे पीछे रखी गई या फिर ये महज एक संयोग है, ये तो इसे प्रसारित करने वाले ओटीटी ही जानें लेकिन दोनों ओटीटी ने समलैंगिकता पर कुछ अच्छी कहानियां कह सकने का एक एक बेहतरीन मौका खो दिया। समलैंगिक रिश्तों पर बनी कहानियों को सिनेमा की मुख्यधारा में लाने का जो काम 16 साल पहले एंग ली जैसे निर्देशक ने अपनी फिल्म ‘ब्रोकबैक माउंटेन’ में किया था, पुरुषों के बीच समलैंगिकता के वैसे भावनात्मक पहलू बाद में कम निर्देशक ही परदे पर पेश कर पाए। समलैंगिकता अब भी समाज के बड़े तबके में स्वीकार्य नहीं है। पारिवारिक माहौल में तो अब भी न ऐसे बातों की चर्चा होती है और न ही ऐसी कहानियां साझा की जाती हैं। वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ भी ऐसे ही माहौल में गढ़ी गई सीरीज है।
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हिज स्टोरी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
एकता कपूर ने ‘द मैरीड वूमन’ के बाद समलैंगिकता की विस्तार पुरुषों के बीच वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ में पाया है। उनकी क्रिएटिव टीम के पास ये विचार बहुत शक्तिशाली है, लेकिन उनकी सारी कहानियों का दम एक घिसी पिटी दुनिया में आकर टूट जाता है। दमकते चमकते चेहरों के पीछे का दर्द उकेरने के लिए एकता कपूर को पहले से तय चारदीवारी से बाहर उड़ने की सख्त जरूरत है। अपने टीवी सीरियलों जैसी दिखती दुनिया में वह नए जमाने की कहानियां गढ़ नहीं पा रही हैं। बदलते समय में उबलते रिश्तों के सांचे बदल चुके हैं। यहां कहानियों का कोई टैम्पलेट नहीं हो सकता। सुपर्ण वर्मा और ऋतु भाटिया यहीं मात खाते हैं। वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ की सबसे बड़ी कमजोरी इसका माहौल और इसके संवाद हैं, ऐसे रिश्तों को लिखने के लिए जिस संजीदा किस्म की स्याही की जरूरत थी, वह यहां बही नहीं।
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हिज स्टोरी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ की कहानी कोई खास चमत्कारिक नहीं है। हंसी खुशी और अपने दो बच्चों के साथ बीस साल से मस्त लाइफ जीते आए साक्षी और कुणाल की परफेक्ट लाइफ में धूमकेतु बनकर आता है प्रीत। कहने को वह फूड क्रिटक है लेकिन उसे स्वाद अनदेखे रिश्तों का लग चुका है। साक्षी को जब अपने पति के समलैंगिक होने का पता चलता है तो न सिर्फ उसका विश्वास दरकता है बल्कि उसे अपनी अब तक की जिंदगी ही बनावटी दिखने लगती है। नकली एहसासों की डोर वह थामे नहीं रहना चाहती और भरोसे के जिन जज्बात पर उसकी दुनिया अब तक टिकी रही, वे भटकने लगते हैं।
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हिज स्टोरी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रशांत के निर्देशन में अगर भावनाओं को उनके सच्चे एहसासों के साथ समेटने की कूवत होती है तो ये सीरीज कमाल की बन सकती थी। एकता कपूर को ऐसी कहानियों के लिए ओनीर या बिकास मिश्रा जैसे निर्देशकों को जरूर साधना चाहिए। मुंबई में समलैंगिकता पर काम करने वालों की कमी नहीं है। ये ऐसी भावनाएं हैं, जिनमें हर चीज तयशुदा खांचे में फिट नहीं हो सकती। दिक्कत बस ये है कि खांचे में फिट होकर जो लोग काम नहीं करते हैं, उनसे काम लेना हर एक के बस की बात नहीं। सत्यदीप के अभिनय में एक अलग रेंज है। यहां उनकी रेंज को बिखरने का मौका ही नहीं मिला। मृणाल भी खुद को बांधे सा रखते हैं। अभिनय को खुलकर बिखरने का आसमान चाहिए। उसे प्रियमणि की तरह हर वक्त कैमरे की मौजूदगी का एहसास नहीं होना चाहिए।
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हिज स्टोरी रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘हिज स्टोरी’ में असली कलाकारी इसकी दूसरी कतार के कलाकारों ने दिखाई है। बेटी के वीडियो कांड से हिली हुई मां के रोल में चारू शंकर ने कमाल का काम किया है। राजीव कुमार के किरदार से आपको घृणा हो सकती है लेकिन अपने बेटे के लिए जो वह करता है, उसकी फितरत वाला हर बाप वही कर सकता है। चारू की बेटी के रोल में रिएन और प्रियमणि के बेटे के रोल में मिकैल ने सीरीज में नोटिस करने लायक काम किया है। किशोरावस्था के लैंगिक विचारों पर बनने वाली किसी हिंदुस्तानी वेब सीरीज के दोनों परफेक्ट चेहरे हो सकते हैं। सीरीज में श्रीनिवास आचार्य की फोटोग्राफी औसत है। अजय शर्मा और आशीष विचारे की एडीटिंग सुस्त और आयुष चिरानिया का कला निर्देशन बस ठीक ठाक ही है। हां, सीरीज के गानों में सुनाई पड़ी आवाजें मोहक हैं। कार्तिक शाह, अभिरुचि चांद और अभिषेक अरोड़ा ने अच्छा संगीत बनाया है। सुकन्या पुरकायस्थ बड़ा मौका मिलने पर बड़ा कमाल कर सकती हैं।