अगर आपने अमिताभ बच्चन और प्राण की दमदार अदाकारी वाली फिल्म ज़ंजीर देखी है तो उसका गाना दीवाने हैं दीवानों को न घर चाहिए आपको जरूर याद होगा। मशहूर गीतकार गुलशन बावरा का लिखा ये गाना परदे पर भी उन्हीं पर फिल्माया गया है। उनका असली नाम है, गुलशन कुमार मेहता। लेकिन दुनिया उन्हें गुलशन बावरा के नाम से ज्यादा जानती है। 42 साल लंबे करियर में सिर्फ 240 गाने लिखने वाले गुलशन बावरा ने ये बताया कि मात्रा और गुणवत्ता का फर्क क्या होता है। अपने समय के बेहतरीन संगीतकारों कल्याणजी आनंदजी, शंकर जयकिशन और आर डी बर्मन के लिए लिखने वाले गुलशन बावरा आज होते तो 83 साल के होते। उनके जन्मदिन पर चलिए आपको बताते हैं उनके 10 सदाबहार, यादगार गाने, कुछ दिलचस्प किस्सों के साथ।
बावरा गीतकार जिसने लिखा, वो क्या समझे प्यार को जिनका सब कुछ चांदी सोना है और बसा दिया गीतों का गुलशन
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गीत: तुम्हें याद होगा
फिल्म: सट्टा बाजार (1959)
गुलशन बावरा को फिल्मों में काम करने का शौक था और वह किसी तरह बंबई आना चाहते थे। उन्होंने रेलवे में नौकरी के लिए अप्लाई किया तो उनको पोस्टिंग मिली कोटा, राजस्थान में। जब वह वहां पहुंचे तो वह नौकरी भर चुकी थी, अगले नंबर उनको मिला बंबई और बस वह अपनी पेटी संभाले पहुंच गए सन 55 में यहां। कल्याणजी आनंदजी वाले कल्याण जी तब अकेले ही संगीत देते थे कल्याण वीरजी शाह के नाम से। उन्होंने ही गुलशन बावरा को पहला ब्रेक दिया फिल्म चंद्रसेना में। और, जब कल्याणजी आनंदजी की जोड़ी बनी तो भी उनको अपना वादा याद रहा जिसकी बदौलत गुलशन बावरा को मिला अपने करियर का पहला हिट गाना, तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे।
गीत : मेरे देश की धरती
फिल्म : उपकार (1967)
लाहौर के करीब गांव शेखूपुरा में जन्मे गुलशन ने अपनी आंखों के सामने अपने पिता और अपने चाचा का कत्ल होते देखा। बहन तब जयपुर में थीं, वह उन्हें अपने पास ले आईं। बाद में गुलशन मेहता दिल्ली पहुंचे और यहां पढ़ाई के दौरान ही शायर बन गए। भारत कुमार के नाम से पहचाने जाने वाले अभिनेता मनोज कुमार ने फिल्म उपकार तब के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की फरमाइश पर बनाई थी। इसकी कहानी उन्होंने दिल्ली से मुंबई लौटते समय ट्रेन में लिख डाली थी। इस सुपरहिट फिल्म में गुलशन बावरा का लिखा ये गीत आज भी राष्ट्रीय पर्वों पर खूब सुना जाता है। इस गाने के लिए गुलशन को फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
गीत : चांदी की दीवार न तोड़ी
फिल्म : विश्वास (1969)
फिल्म उपकार के अलावा इस फिल्म में भी गुलशन बावरा ने एक्टिंग की। पैसे के पीछे भागने वाली मां से दूर भागने वाले बेटे को अपने साथ रखने की साजिशों की कहानी कहती फिल्म विश्वास अपने समय से आगे की फिल्म है। निर्देशक केवल कश्यप की इस फिल्म की पटकथा ब्रिज कात्याल ने लिखी। मुकेश की शानदार आवाज में गाया ये गीत फिल्म में जितेंद्र और अपर्णा सेन पर फिल्माया गया है। इस गीत में भी गुलशन बावरा को कल्याणजी आनंदजी का साथ मिला।
गीत : यारी है ईमान मेरा
फिल्म : जंजीर (1973)
कम लोगों को ही पता होगा कि फिल्म जंजीर वितरकों को प्राण की फिल्म कहकर बेची गई थी। कोलकाता में फिल्म के प्रीमियर पर फिल्म शुरू होने से पहले लोग प्राण की ही जय जयकार कर रहे थे, ये देखकर अमिताभ बच्चन की आखों में आंसू भर आए। इस पर फिल्म के निर्देशक प्रकाश मेहरा ने उनका कंधा दबाकर कहा, चिंता मत करो, फिल्म खत्म होने के बाद यही लोग तुम्हारी जय जयकार करेंगे। हुआ भी यही। प्रकाश मेहरा की इस फिल्म ने ही अमिताभ बच्चन को एंग्री यंगमैन का तमगा दिलाया। ये अलग बात है कि आखिरी दिनों में दोनों की खटपट हो गई और किसी ने भी इन गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश नहीं की। इन दोनों की पुरानी दोस्ती जैसा ही ये गाना। इसने गुलशन बावरा को एक और फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिलाया।