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महिलाओं की समस्याओं पर आधारित हैं ये फिल्में, समाज की सोच बदलने की कोशिश में जुटा बॉलीवुड

Sun, 08 Mar 2020 07:37 AM IST
प्रतीक्षा राणावत एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रतीक्षा राणावत Updated Sun, 08 Mar 2020 07:37 AM IST
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international womens day 2020 Padman Pink Thappad Toilet Ek Prem Katha Films Based on Female Issues
पैडमैन, पिंक, थप्पड़, टॉइलेट - फोटो : Social Media

परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। ये बात तो हम सभी जानते हैं। प्रकृति के इसी नियम पर ही बॉलीवुड भी चलता आया है। समय के साथ सिनेमा में कई बदलाव आए हैं। सिनेमा ने महिलाओं को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। बदलते हुए सिनेमा ने महिलाओं की ऐसी समस्या या मुद्दों पर लोगों का ध्यान केंद्रित किया है जिन्हें लोग अक्सर समस्या या मुद्दा समझते ही नहीं हैं। ऐसी कुछ बॉलीवुड फिल्मों के बारे में हम आपको इस पैकेज में बताएंगे जिन्होंने महिलाओं की आम समस्याओं पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

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padman

पैडमैन
साल 2018 में आई फिल्म पैडमैन एक ऐसे विषय पर आधारित फिल्म थी जिसपर लोग सार्वजनिक तौर पर बात करने से भी कतराते थे। ये फिल्म महिलाओं की माहवरी की समस्या पर आधारित थी। माहवरी के समय कितनी ही महिलाओं की बीमारी की वजह से मौत हो जाया करती थी। इससे बचने के लिए ऐसे समय में हाईजीन का खास ख्याल रखना चाहिए। फिल्म के द्वारा महिलाओं को हर माह होने वाली माहवरी के वक्त पैड का इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया था। फिल्म में मुख्य भूमिका में अभिनेता अक्षय कुमार और अभिनेत्री राधिका आप्टे थे। वहीं सोनम कपूर ने भी फिल्म में अहम किरदार निभाया था। इस फिल्म का निर्देशन आर बाल्कि ने किया था।

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पिंक
एक डायलॉग जो हमेशा सुनने को मिलता है, 'अरे भाई लड़की की ना में भी हां छुपी होती है।' इस डायलॉग को गलत साबित किया है फिल्म 'पिंक' ने। तापसी पन्नू, अमिताभ बच्चन स्टारर फिल्म पिंक एक ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर आधारित थी जिसे समाज कभी भी अपना नहीं पाता। समाज ने हमेशा ही महिलाओं की आजादी को उनके बिगड़ने की तरह देखा है। महिलाओं की आजादी के साथ हमेशा उनका सम्मान छिन जाता रहा है। ये फिल्म महिलाओं की उसी आजादी को सम्मान दिलाती है।

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टॉयलेट एक प्रेम कथा

टॉयलेट- एक प्रेम कथा
अक्षय कुमार और भूमि पेडनेकर स्टारर फिल्म 'टॉयलेट- एक प्रेम कथा' ऐसी समस्या पर आधारित थी जो सालों से चली आ रही थी। इस समस्या ने कई हादसों को भी अंजाम दिया। ये समस्या थी घर में टॉयलेट (बाथरूम) का ना होना। ये समस्या तो बहुत बड़ी थी लेकिन इसे कभी समस्या माना ही नहीं गया। इस फिल्म ने महिलाओं के खुले में शौच की प्रथा को बंद करने में मदद की। इस फिल्म का निर्देशन श्री नारायण सिंह ने किया।

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thappad - फोटो : amar ujala

थप्पड़
हाल ही में रिलीज हुई ये फिल्म यूं तो एक खुशहाल परिवार और पति-पत्नी के रिश्ते पर आधारित थी। लेकिन इस फिल्म ने समाज को आइना दिखाया है। फिल्म का संवाद 'एक थप्पड़ ही तो है, पर नहीं मार सकता' लोगों के दिल की गहराई तक प्रहार करता है। फिल्म में एक पत्नी जिसे उसका पति सबके सामने थप्पड़ मार देता है इस वजह से वो उससे तलाक की मांग करती है। इस फिल्म के जरिए घरेलू हिंसा जैसे मामले को उठाया गया है। जो कि समाज में महिलाओं को मजबूत बनाता है।

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