ऐसा पहले कम ही हुआ है कि मुंबई की दिग्गज फिल्म निर्माण कंपनियों की फिल्में अपनी घोषणा के साल भर बाद भी शुरू न हो पा रही हों। अब तक होता यही आया है कि बड़े निर्देशक अपनी योजनाओं का सोशल मीडिया पर एलान करते हैं। निवेशक उनकी तरफ लपकते हैं। ओटीटी वाले रेड कारपेट बिछाते हैं और सैटेलाइट अधिकारों की खरीद फरोख्त करने वाले ब्रोकर तुरंत एक्टिव हो जाते हैं। लेकिन, साल 2024 की दूसरी छमाही हिंदी सिनेमा में सन्नाटे की छमाही है। और, इस सन्नाटे में शोर सुनाई दे रहा है उन तीन फिल्मों से जुड़े कलाकारों की जिनकी फिल्में धूम धड़ाके से हुए अनाउंसमेंट से आगे ही नहीं बढ़ सकी हैं।
Bollywood Crisis: इन तीन मेगाबजट फिल्मों का भविष्य अधर में, निवेशकों का हिंदी फिल्मों में पैसे लगाने से इन्कार
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सबसे पहले बात करते हैं फिल्म ‘डॉन 3’ की। इस फिल्म का एलान बीते साल 9 अगस्त को हिंदी सिनेमा की दिग्गज कंपनियों में शुमार एक्सेल एंटरटेनमेंट ने धूमधाम से किया था। चोटी के सितारों में शुमार रहे रणवीर सिंह को इसमें शाहरुख खान की विरासत संभालनी थी। ये वह समय था जब रणवीर सिंह हिंदी सिनेमा में खुद को लाने वाली कंपनी यशराज फिल्म्स के बाहर अपनी उड़ान भर रहे थे और खुद अपने बूते अपना सितारा बुलंद करने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन, पहले फिल्म ‘शक्तिमान’ से उनका पत्ता कटा और फिर अटकी फिल्म ‘डॉन 3’। फिल्म की घोषणा के 14 महीने बाद भी इस फिल्म का कहीं कोई अता पता नहीं है। सूत्र बताते हैं कि जितनी रकम इसके निर्माता व निर्देशक बाजार से उगाहना चाह रहे हैं, उतनी रकम देने को कोई उन्हें तैयार नहीं है।
ओटीटी और सैटेलाइट अधिकारों की फिल्म बनाने से पहले ही बिक्री हो जाने की परिपाटी भी अब धीरे धीरे उतार पर है। ओटीटी संचालकों ने हिंदी फिल्म निर्माताओं का खेल समझ लिया है। प्राइम वीडियो जैसी कंपनियों ने बड़े सितारों के कहने पर ‘रामसेतु’ जैसी फिल्मों में निवेश करके अपने हाथ जलाए हैं और अब ये सब छाछ भी फूंक फूंक कर पी रहे हैं। दोनों हाथों से पैसा लुटाती रही ओटीटी कंपनी नेटफ्लिक्स ने इसमें ट्रेंड सेट करने का काम किया है और सू्त्र बताते हैं कि इस कंपनी ने अब किसी भी ऐरी गैरी फिल्म के डिजिटल राइट फिल्म देखे बिना न खरीदने की नीति पर काम करना शुरू कर दिया है। ओरिजिनल फिल्में भी ये कंपनी बहुत ठोंक बजाकर खरीद रही है।
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बाजार से डिज्नी प्लस हॉटस्टार की विदाई कभी भी हो सकती है और उसकी सारी सामग्री जल्द ही जियो सिनेमा एप पर नजर आ सकती है। नई मेगा बजट हिंदी फिल्मों पर लगा ब्रेक बाजार में चल रही इन हलचलों से भी प्रभावित है। बड़े ओटीटी संचालकों ने सिनेमाघरों के लिए बन रही फिल्मों के राइट्स एडवांस में खरीदना करीब करीब रोक रखा है। इसके अलावा जयंती लाल गडा जैसे बड़े निवेशक भी अब रिस्क लेने के मूड में नहीं हैं। गडा की कंपनी पेन स्टूडियो ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ को संजीवनी पिलाई थी, लेकिन अब वह भी भंसाली की नई फिल्म में निवेश करने का मन नहीं बना पा रहे हैं। बीते दिन मुंबई में फिल्म के सेट को हुए नुकसान के चलते भंसाली की फिल्म की शूटिंग अटकने की जो खबर फैली, वह दरअसल इस तथ्य की तरफ से ध्यान हटाने की कोशिश ही रही कि इस फिल्म के लिए निवेशक अब तक तय नहीं हो पाया है।
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संजय लीला भंसाली के करियर में ये पहली बार हो रहा है कि उनकी किसी फिल्म के एलान के महीनों बाद भी कोई बड़ी कॉरपोरेट कंपनी उसमें बतौर निवेशक शामिल होने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। भंसाली की बतौर निर्देशक ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ से पहले बनी फिल्म ‘पद्मावत’ में जिस कंपनी वॉयकॉम18 का पैसा लगा, वह अब रिलायंस समूह के नियंत्रण में हैं। और उसके पहले की दो फिल्मों ‘बाजीराव मस्तानी’ व ‘गोलियों की रासलीला रामलीला’ में निवेश करने वाली कंपनी इरॉस का अब हिंदी फिल्म कारोबार की दैनिक गतिविधियों में जिक्र तक नहीं होता। जी स्टूडियोज अपनी उठापटक के दौर से गुजर रहा है और महीने के आखिर तक इसकी मौजूदा मार्केटिंग और क्रिएटिव टीम की विदाई हो रही है। अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली रिलायंस एंटरटेनमेंट को उनके सीईओ रहे शिबाशीष सरकार किसी तरह खींचन की कोशिश में लगे हैं, उनका विदेश से आने वाला फंडपूल नाकाम हो चुका है और सिंगापुर स्थित एक कंपनी रिलायंस एंटरटेनमेंट का अधिग्रहण करने की पूरी तैयारी कर चुकी है।
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