बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता इरफान खान का इंतकाल को गया है। बीते कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब हुई थी जिसके बाद उन्हें मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती करवाया गया। मंगलवार को उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया था। जहां उन्होंने बुधवार को आखिरी सांस ली। इससे पहले इरफान खान कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से पीड़ित थे। जिसका उन्होंने लंदन में इलाज करवाया है। ऐसे में आपको बताते हैं कि 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' के बारे में, जिससे जूझ रहे थे इरफान खान।
Neuroendocrine Tumor: दो साल पहले इस खतरनाक बीमारी से ग्रस्त थे इरफान खान, जानें क्या होता है 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर'
अपनी बीमारी के बारे में खुद इरफान खान पांच मार्च साल 2018 को ट्विटर पर जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि वो एक खतरनाक बीमारी से पीड़ित हैं, जिसके बाद सभी उनकी बीमारी के बारे में अंदाजे लग रहे थे। जिसके बाद ट्वीट कर इरफान ने बताया कि उन्हें 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' है। ट्वीट में उन्होंने लिखा था, "जीवन में अनपेक्षित बदलाव आपको आगे बढ़ना सिखाते हैं। मेरे बीते कुछ दिनों का लब्बोलुआब यही है। पता चला है कि मुझे न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर हो गया है। इसे स्वीकार कर माना मुश्किल है। लेकिन मेरे आसपास जो लोग हैं, उनका प्यार और उनकी दुआओं ने मुझे शक्ति दी है। कुछ उम्मीद भी बंधी है। फिलहाल बीमारी के इलाज के लिए मुझे देश से दूर जाना पड़ रहा है। लेकिन मैं चाहूंगा कि आप अपने संदेश भेजते रहें।"
अपनी बीमारी के बारे में इरफान ने आगे लिखा, "न्यूरो सुनकर लोगों को लगता है कि ये समस्या जरूर सिर से जुड़ी बीमारी होगी। लेकिन ऐसा नहीं है। इसके बारे में अधिक जानने के लिए आप गूगल कर सकते हैं। जिन लोगों ने मेरे शब्दों की प्रतीक्षा की, इंतजार किया कि मैं अपनी बीमारी के बारे में कुछ कहूं, उनके लिए मैं कई और कहानियों के साथ जरूर लौटूंगा।"
क्या होता है इस ट्यूमर में?
एनएचएस डॉट यूके के मुताबिक, 'न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर' एक दुर्लभ किस्म का ट्यूमर होता है जो शरीर में कई अंगों में भी विकसित हो सकता है। हालांकि मरीजों की संख्या बताती है कि ये ट्यूमर सबसे ज्यादा आँतों में होता है। इसका सबसे शुरुआती असर उन ब्लड सेल्स पर होता है जो खून में हार्मोन छोड़ते हैं। ये बीमारी कई बार बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ती है। लेकिन हर मामले में ऐसा हो, ये जरूरी नहीं है।
मरीज के शरीर में ये ट्यूमर किस हिस्से में हुआ है, उसी से इसके लक्षण तय होते हैं। मसलन, अगर ये पेट में हो जाए तो मरीज को लगातार कब्ज की शिकायत रहेगी। ये फेफडों में हो जाए तो मरीज को लगातार बलगम रहेगा। ये बीमारी होने के बाद मरीज का ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल बढ़ता-घटता रहता है।
बीमारी के कारण?
डॉक्टर अभी तक इस बीमारी के कारणों को लेकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं। न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने के विविध कारण हो सकते हैं। लेकिन ये आनुवांशिक रूप से भी होती है। माना जाता है कि जिनके परिवार में इस तरह के मामले पहले रह चुके हों, वो लोग इसके रिस्क में ज्यादा होते हैं। कई डिटेल ब्लड टेस्ट, स्कैन और बायोप्सी करने के बाद ही ये बीमारी पकड़ में आती है।
क्या इसका इलाज है?
ट्यूमर किस स्टेज में है, वो शरीर में किस हिस्से में है और मरीज की सेहत कैसी है। इन सबके आधार पर ही ये तय होता है कि मरीज का इलाज कैसे किया जाएगा। सर्जरी के जरिए इसे निकाला जा सकता है। लेकिन ज्यादातर मामलों में सर्जरी का इस्तेमाल बीमारी पर काबू करने के लिए किया जाता है। इसके अलावा मरीज को ऐसी दवाएं दी जाती हैं जिससे कि शरीर कम मात्रा में हार्मोन छोड़े।
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