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प्रधानमंत्री होते हुए भी टिकट लेकर फिल्म देखते थे नेहरू, इस एक्ट्रेस के बारे में किया था बड़ा खुलासा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Sun, 26 May 2019 07:37 PM IST
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Jawaharlal Nehru Suraiya
- फोटो : twitter
पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि 27 मई को होती है। उनकी पुण्यतिथि पर उनकी जिंदगी से जुड़ा किस्सा बताते हैं। जवाहरलाल नेहरू देश चलाने के अलावा फिल्मों का भी काफी शौक रखते थे। 1954 में प्रदर्शित हिंदी सिनेमा की कालजयी फिल्म 'मिर्जा गालिब' में सुरैया ने नवाब जान का किरदार निभाया था जो शायर मिर्जा गालिब से बेहद प्यार करती है। फिल्म में गालिब की पांच गजलों को सुरैया ने अपनी आवाज दी। सुरैया की आवाज ही नहीं आंखों में भी कुछ ऐसा था कि जो उन्हें देखता उसमें कैद हो जाता। इसलिए जब सुरैया ने गाया तो हर सुनने वाले के दिल में सुरैया समाती चली गईं। उस वक्त भारत के प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू थे। उन्होंने भी सुरैया की गाईं यह गजलें सुनी थीं। इन्हें सुनने के बाद वह भी सुरैया के दीवाने हो चुके थे।
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Suraiya
- फोटो : file photo
पंडित जवाहर लाल नेहरू ने इस बात का खुलासा उन्होंने एक समारोह में किया था। जब सुरैया की वहां उनसे मुलाकात हुई तो नेहरू ने सुरैया से कहा था तुमने गालिब की रुह को जिंदा कर दिया।वहीं बीती पीढ़ी के राजनेताओं में जवाहरलाल नेहरू अकेले ऐसे राजनेता थे जिन्होंने अपने सिनेमा-प्रेम को कभी छिपा कर नहीं रखा। उनकी कोशिश हालांकि यही रहती थी कि उस अभियान में उनका साथ देने वाला कोई परिजन, पुरजन या प्रियजन हमेशा उनके साथ रहे। अकेले उन्हें किसी सिनेमाघर पहुंच कर शो का टिकट खरीदने में स्वाभाविक संकोच होता था। ऐसी फिल्मों में सिर्फ अंग्रेजी की फिल्में नहीं होती थीं, बल्कि देसी फिल्मों से भी उनको उतना ही अनुराग था जितना ब्रिटेन या हॉलीवुड में बनी फिल्मों से।
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jawaharlal nehru
- फोटो : file photo
जवाहर लाल जी उस जमाने में देविका रानी की अभिनय प्रतिभा के प्रशंसक थे और उनकी फिल्म जरूर देखते थे। उन्होंने देविका रानी के अभिनय की प्रशंसा में कुछ पत्र भी लिखे थे, जिसमें अभिनेत्री की मात्र एक हस्ताक्षरित तस्वीर भेजने का आग्रह भी था। लेकिन देविका रानी की ओर से उन्हें कभी कोई सार्थक प्रत्युत्तर नहीं मिल पाया। यह बात स्वयं देविका रानी के श्रीमुख से मुझे मालूम हुई थी। बंगलुरू में एक बार जब उनसे मेरी भेंट हुई, तब उन्होंने खुद बताया था कि आजादी मिलने के बाद नेहरू जी के उन सभी पत्रों को वह राष्ट्रीय अभिलेखागार नेशनल आर्काइव्ज़ को सौंप चुकी हैं और उनको कभी भी वहां देखा जा सकता है।
jawaharlal nehru
- फोटो : file photo
जवाहर लाल जी उस जमाने में देविका रानी की अभिनय प्रतिभा के प्रशंसक थे और उनकी फिल्म जरूर देखते थे। उन्होंने देविका रानी के अभिनय की प्रशंसा में कुछ पत्र भी लिखे थे, जिसमें अभिनेत्री की मात्र एक हस्ताक्षरित तस्वीर भेजने का आग्रह भी था। लेकिन देविका रानी की ओर से उन्हें कभी कोई सार्थक प्रत्युत्तर नहीं मिल पाया। यह बात स्वयं देविका रानी के श्रीमुख से मुझे मालूम हुई थी। बंगलुरू में एक बार जब उनसे मेरी भेंट हुई, तब उन्होंने खुद बताया था कि आजादी मिलने के बाद नेहरू जी के उन सभी पत्रों को वह राष्ट्रीय अभिलेखागार नेशनल आर्काइव्ज़ को सौंप चुकी हैं और उनको कभी भी वहां देखा जा सकता है।
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jawaharlal nehru
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देविका रानी ने बताया था कि अपने काम के दिनों में उन्होंने कभी किसी प्रशंसक के पत्रों का जवाब नहीं दिया और नेहरू जी भी उसके अपवाद नहीं थे। लेकिन उनका महत्व चूंकि उन्हें मालूम था इससे उन चिट्ठियों को उन्होंने सुरक्षित रखा।
अंततः दिल्ली में आयोजित किसी पुरस्कार समर्पण समारोह में उनकी भेंट जब जवाहर लाल जी से हुई तब इस राज का रहस्योद्घाटन हुआ और तत्कालीन केन्द्रीय संस्कृति मंत्री हुमायूं कबीर की सलाह पर वह पत्र अभिलेखागार के सुपुर्द कर दिए गए।
अंततः दिल्ली में आयोजित किसी पुरस्कार समर्पण समारोह में उनकी भेंट जब जवाहर लाल जी से हुई तब इस राज का रहस्योद्घाटन हुआ और तत्कालीन केन्द्रीय संस्कृति मंत्री हुमायूं कबीर की सलाह पर वह पत्र अभिलेखागार के सुपुर्द कर दिए गए।