हिंदी सिनेमा में अभिनेता जीवन का नाम पॉपुलर विलेन में गिना जाता था। आज जीवन की 33वीं पुण्यतिथि है। साल 1915 में कश्मीर में जन्में जीवन का असली नाम ओंकार नाथ धर था। वो बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे। जीवन का परिवार काफी बड़ा था। उनके 24 भाई बहन थे। जीवन के जन्म के साथ ही उनकी मां का निधन हो गया था। जब जीवन 3 साल के थे तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया।
जीवन के परिवार में एक्टिंग की इजाजत नहीं थी। इसलिए वह 18 साल की उम्र में ही अपना घर छोड़कर मुंबई आ गए। जब वो मुंबई आए तो उनकी जेब में सिर्फ 26 रुपए थे। करियर के शुरुआती दिनों में जीवन को काफी स्ट्रगल करना पड़ा। उन्हें नौकरी की जरूरत थी इसलिए वो एक स्टूडियो में काम करने लगे। ये स्टूडियो मोहनलाल सिन्हा का था। मोहन लाल उस समय के जाने- माने डायरेक्टर हुआ करते थे। जब मोहनलाल को पता चला कि जीवन एक्टिंग करना चाहते हैं तो उन्होंने अपनी फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में उन्हें रोल दिया।
जीवन ने फोटोग्राफी, नृत्य, एक्शन, संगीत आदि में भी किस्मत आजमाई लेकिन असफल रहे। जीवन के बेटे किरण कुमार भी मशहूर एक्टर हैं। हाल ही में वह कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इलाज के बाद वह घर पर हैं। 50 के दशक में बनी हर धार्मिक फिल्म में जीवन ने नारद का रोल किया। जीवन की डायलॉग डिलीवरी कमाल की थी। उन्हें जीवन नाम विजय भट्ट ने दिया था। जीवन ने पंजाबी फिल्मों में भी काम किया था। फिल्म 'कानून' में कठघरे के सीन का मोनोलॉग बेहद लोकप्रिय हुआ था।
इसके बाद जीवन को एक के बाद एक कई फिल्मों में काम मिला। जीवन ने अलग-अलग भाषाओं की करीब 61 फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया। जीवन को पहचान उस समय मिली जब 1935 में उन्होंने फिल्म 'रोमांटिक इंडिया' में काम किया। जीवन के नाम, फिल्मों में एक ही किरदार को सबसे ज्यादा बार निभाने का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने 61 फिल्मों में नारद मुनि का किरदार निभाया था।
जीवन की सफल फिल्मों में 'अफसाना', 'स्टेशन मास्टर', 'अमर अकबर एंथनी' और 'धर्म-वीर' जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं। उन्होंने नागिन, शबनम, हीर-रांझा, जॉनी मेरा नाम, कानून, सुरक्षा, लावारिस, आदि फिल्मों में भी अहम भूमिकाएं निभाई। जीवन अपने करियर के शुरुआती दौर में ही जान गए थे कि उनका चेहरा हीरो लायक नहीं है। इसलिए उन्होंने खलनायकी में हाथ आजमाया और सफल भी हुए।